(हरिशंकर परसाई) https://www.youtube.com/watch?v=oM7i4DNYkQA
2015 के अक्तूबर और नवम्बर माह में हुए बिहार में विधानसभा चुनावों के समय आम आदमी पार्टी से बाहर हो चुके योगेन्द्र यादव ने एक राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर भारत में सेक्युलरिज्म पर के बेहतरीन लेख लिखा था और... Continue Reading →
चंद्रशेखर एकमात्र प्रधानमंत्री रहे हैं देश के, जिनके बारे में निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि चंद्रशेखर प्रधानमंत्री न बनते उस समय तो भारत को दिवालिया होने की शर्मिंदगी और फिर टूटने की शर्मनाक स्थितियों से गुज़ारना पड़ता|... Continue Reading →
ब्रिटिश राज से भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त करके भारत में लोकतंत्र की स्थापना की और भारत का संविधान बनाया तो सब कुछ आदर्शवादी तासीर वाला रहा होगा| पर शनैः शनैः लोकतंत्र की मूल भावना से खिलवाड किया जाता रहा और... Continue Reading →
“भारत गाँवों में बसता है, अगर गाँव नष्ट होते हैं तो भारत भी नष्ट हो जायेगा| इंसान का जन्म जंगल में रहने के लिए नहीं हुआ बल्कि समाज में रहने के लिए हुआ है| एक आदर्श समाज की आधारभूत ईकाई... Continue Reading →
समाजवादी चिन्तक और राजनेता डा. राम मनोहर लोहिया, ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता पाए भारत में, इसके प्रथम प्रधानमंत्री प. जवाहर लाल नेहरु के घनघोर राजनीतिक आलोचक रहे| परन्तु ब्रिटिश राज से आजादी से पूर्व दोनों बड़े नेताओं के मध्य कैसे संबंध थे यह... Continue Reading →
जब मैंने कहा, तकरीबन बीस बरस पहले, कि आदमी-आदमी समान नहीं हैं, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई) ने मेरी आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया और कम्यूनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष – एस. ऐ . डांगे ने घोषणा की कि शीघ्र ही उनका दामाद,... Continue Reading →
हालात और हादसों से गुज़रते हुए आम आदमी बहुत सजग और चौकन्ना हो गया है | हर बात पर वह संदेह करने लगा है | मैंने एक आदमी से पूछा – दो और दो कितने होते है ?सवाल सुनते ही... Continue Reading →
[ Sir Francis Bacon की एक कविता - The Art of Reading से प्रेरित, विस्तृत की गयी कविता ] ...[राकेश]
सिनेमा परदे पर मायाजाल रचता है और दर्शक उसमें जानबूझ कर फंसते हैं| कई बार मायाजाल भी झूठे चित्रों से रचा जाता है जिसके बारे में अक्सर दर्शकों को पता नहीं चलता| स्टंट सीन्स में तो जानकार मानकर ही चलते... Continue Reading →
कुछ लोगों में कहीं न कहीं जीवन को त्यागने की इच्छा का बीज छिपा रहता है और किसी भी तरह की समस्याओं से घिरने पर वह बीज अंकुरित हो उठता है और ऐसे लोगों में से कुछ लोग आत्मघात की... Continue Reading →
ओशो महावीर के जीवन के सहारे अपनी बात कहते हैं| महावीर के जीवन में एक घटना का उल्लेख है, जिस पर एक बहुत बड़ा विवाद चला। और महावीर के अनुयायियों का एक वर्ग टूट गया। और महावीर के पाँच सौ मुनियों... Continue Reading →
~ © HK Verma [नोट : यह लेख श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद है| HK Verma, an alumnus of FTII, is a renowned cinematographer who earlier in his career collaborated with celebrated cinematographer KK Mahajan on many great... Continue Reading →
फिल्म ज़मीन आसमान (1984) में संजय दत्त और अनीता राज पर फिल्माया गीत "ऐसा समां न होता, कुछ भी यहाँ न होता, मेरे हमराही जो तुम न होते" से है, अस्सी के दशक में पंचम द्वारा संगीतबद्ध उन बेहतरीन गीतों... Continue Reading →
इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान(विद्यार्थी) राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है। विद्यार्थी से कालेज में दाखिल होने से पहले इस आशय की शर्त... Continue Reading →
श्री संपादक जी,माडर्न रिव्यू, आपने अपने सम्मानित पत्र के दिसंबर, १९२९ के अंक में एक टिप्पणी “इंकलाब जिन्दाबाद” शीर्षक से लिखी है और इस नारे को निरर्थक ठहराने की चेष्टा की है। आप सरीखे परिपक्व विचारक तथा अनुभवी और यशस्वी... Continue Reading →
प्रिय भाई, मुझे दंड सुना दिया गया है और फ़ांसी का आदेश हुआ है। इन कोठरियों में मेरे अतिरिक्त फ़ांसी की प्रतीक्षा करने वाले बहुत से अपराधी हैं। ये लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह फ़ांसी से... Continue Reading →
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