हिंदुस्तान में दो प्रयोग चलते थे पिछले पचास सालों में, शायद आपको खयाल में भी नहीं होगा कि हिंदुस्तान में दो विपरीत ढंग के प्रयोग पचास सालों में चले। एक प्रयोग गांधी ने किया, एक प्रयोग श्री अरविंद करते थे।... Continue Reading →
श्रीअरविंद से किसी ने एक बार पूछा," आप भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में अग्रणी सेनानी थे; लड़ रहे थे। फिर अचानक आप पलायनवादी कैसे हो गये कि सब छोड़कर आप पांडिचेरी में बैठ गए आँख बंद करके? वर्ष में... Continue Reading →
भारत के सन्दर्भ में बरसात, उसमें भी ग्रामीण भारत के सन्दर्भ में बरसात के गीतों में भारत और रूस (सोवियत संघ) के संयुक्त उपक्रम से सन 1957 में बनी फ़िल्म - परदेसी, जिसका भारतीय संस्करण ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा... Continue Reading →
परदे पर जिसे किशोरावस्था से युवा होने के काल के बीच का नायक कहा जा सके वे ऋषि कपूर पहले ही थे हिंदी सिनेमा में| उनसे पहले के जितने भी अभिनेताओं ने नायक के रूप में अपनी पारी शुरू की वे... Continue Reading →
मानव जाति का इतिहास गवाह है कि अच्छाई और बुराई एक साथ नहीं रह सकते, स्वतंत्रता और साम्राज्यवाद एक साथ नहीं रह सकते, अच्छी और बुराइयों से ग्रस्त सभ्यताओं में टकराव अवश्यंभावी है, इसे न कभी कोई टाल सका है... Continue Reading →
Hollywood की बगिया में मूलतः एक्शन स्टार Sylvester Stallone को एक कायदे का अभिनेता होने का सम्मान दिलवाने वाली फिल्मों की दो सीरीज में से एक है 5 फिल्मों वाली Rambo सीरीज, इसमें भी पहली फ़िल्म First Blood का एक अलग ही महत्त्व है| युद्ध सैनिक और... Continue Reading →
इससे पहले कि, भूखे–नंगे, आसमान से बगावत कर बैठते, उलट जाते मठाधीशों के सिंहासन, जिल्लेसुभानी बनने वालों के ताज नोंच दिए जाते, इससे पहले कि बराबरी का हक मांगने के लिए लहू पसीने की अंतिम क्रांति उठ खड़ी होती, पोथियों–उपदेशों-बाजों... Continue Reading →
साभार - सत्यकुमारी , सारिका , फरवरी 1985
...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|
पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →
यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज... Continue Reading →
अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ परकब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते ~ जौन एलिया जौन एलिया के उपरोक्त्त शेर में इस गीत की नायिका की दिल की हालत छिपी हुयी है| यह... Continue Reading →
"It's no good trying to get rid of your own aloneness. You've got to stick to it all your life." — D.H. Lawrence ...[राकेश]
रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेलाआज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेलारुक जा रात ...पहले मिलन की यादें लेकर आई है ये रात सुहानीदोहराते हैं चाँद सितारे मेरी तुम्हारी प्रेम कहानीमेरी तुम्हारी प्रेम... Continue Reading →
स्वराज भवन और आनंद भवन (इलाहाबाद) : राष्ट्र को समर्पित हैं या नहीं ? अपने समय के बहुत बड़े वकील मोतीलाल नेहरु ने सन 1900 में एक बना बनाया भवन खरीदा जिसका नाम "आनंद भवन" था या रखा गया| अपनी... Continue Reading →
लोगों ने केविन कार्टर की आत्महत्या के इर्द गिर्द मिथक रच दिए हैं| यह सत्य है कि उन्होंने आत्महत्या की लेकिन यह सत्य नहीं कि उन्होंने सूडान में भूख से बेहाल अफ्रीकन बच्चे और उसे घूरते, पास बैठे गिद्ध की... Continue Reading →
मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →
पंडित नेहरु की आत्मकथा (मेरी कहानी/ MY Story) में छपे वर्णन से स्पष्ट है कि हालांकि पंडित नेहरु ने अपनी आत्मकथा 1934-35 में लिखी और 1936 में छपवाई, जब तक कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद दोनों की प्रसिद्धि आकाश छू... Continue Reading →
खजुराहो पर जैसा ओशो ने अपने प्रवचनों पर कहा, वैसा उनसे पहले कभी किसी ने नहीं कहा था| खजुराहो के मंदिरों के अध्यात्मिक महत्त्व को ओशो ने ही सबसे पहले रेखांकित किया| उन्होंने ही इस बात पर प्रकाश डाला कि... Continue Reading →
चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर बनी फिल्मों पर उनके सुपुत्र अमृतराय के विचार सारिका, 1980 संलग्न चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए
खोट रे के रवैये में दीखता है - नेत्र सिंह रावत सारिका, मई 1978
© राजेन्द्र यादव प्रेमचंद की कहानी ज्यादा ईमानदार थी| - राजेंद्र यादव
मीना कुमारी की डायरी (14) , सारिका, मार्च 1975 प्रस्तुति - © गुलज़ार
लेखक - राजेश्वरी त्यागी (धर्मपत्नी दुष्यंत कुमार) साभार : दुष्यंत के जाने पर दोस्तों की यादें (संपादक - कमलेश्वर)
महादेवी वर्मा का साक्षात्कार , साक्षात्कारकर्ता - उमाकांत मालवीय Published in Sarika , November 1981
...[राकेश] सन्दर्भ : बलवंत गार्गी के पंजाबी और अंगरेजी में लिखे एक संस्मरण पर आधारित Paintings - Amrita Sher-Gil (Nude Self portraight) Vincent Von Gogh (Old shoes) Satish Gujral (Mural at Delhi High Court)
ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है ~ बशीर बद्र
First Published in - हमारे युग का खलनायक राजेंद्र यादव (संपादक - भारत भारद्वाज, साधना अग्रवाल), 2003 © कृष्ण बिहारी
प्रख्यात लेखक, नाट्य एवं फिल्म निर्देशक, व अवसरानुकूल अभिनेता श्री रंजीत कपूर की यह पहली प्रकाशित कहानी है जो अप्रैल 1969 में हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक पत्रिका सारिका में छपी थी| लेखक कमलेश्वर ने 1967 से तकरीबन 11 साल तक... Continue Reading →
---------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 6 ----------------------- सेवानिवृत्ति के बाद माथुर साहब अधिक समय तक अशोकनगर आते रहे. एक बार बसंत पंचमी के दिन वह वही थे. उन्हें स्मरण हुआ कि बसंत पंचमी के दिन तो महाप्राण निराला का जन्मदिन... Continue Reading →
----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 4 ----------------------- एम.ए. हिंदी करतें समय मुझे गुना कॉलेज के प्रो कांति कुमार जैन का मेसेज मिला की दों दिन बाद मुझे हिंदी विषय का शोध निबंध (dissertation) - "गिरिजा कुमार माथुर का काव्य शिल्प"... Continue Reading →
----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 2 ----------------------- अशोकनगर के रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठे हुए गिरिजा कुमार माथुर साहब मुझसे अपने अतीत की स्मृतियों को साझा करने लगे| उन्होंने बताया कि पचास के दशक में वह न्यू यॉर्क में... Continue Reading →
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