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Om Puri

Sacred Games (2018,2019) : खोजा परमाणु बम, निकला गुरुजी!

श्रंखला के दूसरे सीज़न में उपस्थित कमजोरियों में सबसे बड़ी कमजोरी हर षड्यंत्र का सूत्रधार गुरुजी को दिखाना ही है| कथा का सारा वज़न इस कोण पर गिर जाता है| दुनिया में बहुत से षड्यंत्रकारी सिद्धान्त चलते रहते हैं| इनमें... Continue Reading →

Sacred Games (2018,2019) : क्या श्रंखला सिख संप्रदाय का अपमान करती है?

सिख धर्म का अपमान करना तो श्रंखला के लेखकों, निर्देशकों और प्रस्तोता का आशय  बिलकुल भी नहीं रहा होगा पर उन्होने अतार्किक गलती अवश्य की या उनसे ऐसी अतार्किक गलती अवश्य ही हुयी या हो गई| इस पर आने से... Continue Reading →

Sacred Games (2018,2019) : दर्शक के भ्रम की आंच पर पकता खेल

किसी भी फ़िल्म में बड़े और महत्वपूर्ण चरित्रों को पा जाने वाले अभिनेताओं में अपने आप एक ऊर्जा भर जाती है और हर काबिल अभिनेता उसका लाभ उठाता है| पर अकसर ही कम महत्व वाले या छोटे काल के लिए... Continue Reading →

इरफ़ान (1966-2020) : चकाचौंध मचाता सितारा डूब गया गुलशन सारा उदास छोड़ कर

अच्छे सिनेमा की शक्ति मनुष्य के ऊपर ऐसी होती है कि जिस अंत के बारे में दर्शक निश्चित ही जानते हैं, उसके बारे में भी एक और बार फ़िल्म देखते हुये भावनाओं के वशीभूत होकर बदलाव की आशा रख बैठते... Continue Reading →

Mr Kabaadi (2017) :  भारत में काम होता बड़ा या छोटा, बनाता मनुष्य को चलता या खोटा

फ़िल्म के अंतिम दृश्य में कैमरे की ओर पीठ करे सड़क पर जा रहे रूहानी सुकून देने वाले इत्र और सुरमा प्रदानकर्ता छन्नू खान (ओम पुरी) अचानक पलटते हैं और कैमरे की मार्फ़त अभिनेता ओम पुरी दर्शकों से मुखातिब होते... Continue Reading →

Kalyug (1981) : महाभारत के संघर्ष आधुनिक परिवेश में

‘कुलटा’…, बेटा जोर से अपनी माँ को गाली देकर वार करने के लिए उसकी ओर दौडता है| * * * * * * लोगों के लिए कितना आसान होता है पढ़ना, देखना या सुनना कि कुंती कर्ण के पास जाती... Continue Reading →

Holi (1984) : केतन मेहता की, फिल्ममेकिंग पर, रची गाइड

होली (1984) नये फिल्मकारों के लिए एक बहुत अच्छी गाइड है और यह नवोदित निर्देशकों और तकनीकी लोगों, खासकर कैमरा निर्देशकों और कैमरा ऑपरेटर्स को बहुत कुछ सिखा सकती है| होली के निर्देशक केतन मेहता, FTII पुणे के छात्रों के... Continue Reading →

Jai Ho! Democracy : भारत-पाक तनाव की निरर्थकता को उकेरती एक एंटी वार फिल्म

भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →

रंजीत कपूर : थियेटर के एवरेस्ट पर झण्डारोहण से फिल्मों के सृजन तक

विख्यात थियेटर निर्देशक (और अब फिल्म निर्देशक भी) और लेखक रंजीत कपूर की रगों में थिएटर एक तरह से बचपन से ही समाया हुआ था क्योंकि नाट्यशास्त्र और रंगमच की दुनिया से उनका सम्बंध तभी जुड़ गया था जब वे... Continue Reading →

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