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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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October 2013

यही मेरी ज़िंदगी है (Dev D 2009): MMS के ग्रहण से अंधकार में डूबी चन्दा

…[राकेश]

Dus Tola (2010) : गुलज़ार की सोने की खान से कुछ स्वर्ण-मुद्राएं

…[राकेश]

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

...[राकेश] https://youtu.be/S3Lhs8HEC_I?si=633obFDq1l4icFzN

Maya (2001) : गढी हुयी सामाजिक कुरीति के नाम कन्या की बलि चढाती फिल्म

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रांझा रांझा (Raavan 2010) : सूफी अद्वैत से फ़िल्मी द्वैत तक

©… [राकेश]

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं (Road To Sikkim 1969): प्रेम में शिकायत से तडपते ह्रदय की भावनाएं व्यक्त करते मुकेश

तुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहींक्या नज़ारे वहाँ मुस्कुराते नहींक्या वहाँ ये घटायें बरसती नहींक्या हम तुम्हे कभी याद आते नहींतुम जहाँ हो वहाँ क्या ये मौसम नहीं ये जमाना हमेशा बेदर्द हैदर्दे दिल पे हाथ रखता नहींदिल... Continue Reading →

तुम महकती जवां चाँदनी हो (प्यासे दिल 1974) : मुकेश के सिरमौर रत्नों में से एक

तुम महकती जवां चांदनी होचलती फिरती कोई रोशनी होरंग भी, रुप भी, रागिनी भीजो भी सोचूँ तुम्हे तुम वही होतुम महकती जवां चांदनी हो जब कभी तुमने नजरें उठायीं आंख तारों की झुकने लगी हैं मुस्कारायीं जो आँखें झुका के... Continue Reading →

Road to Sangam (2010) : गाँधी कलश यात्रा

...[राकेश]

Khela(2008): ऋतुपर्णो घोष, नये अंदाज में

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Well Done Abba (2010): गरीबी और सिलिकॉन इम्प्लान्ट्स के बाजार के बीच फंसे देश की हास्यास्पद स्थिति

“वेल डन अब्बा“ अभाव और समृद्धि के निर्लज्ज प्रदर्शन के दो विरोधी पाटों के बीच पिसते भारत पर व्यंग्य करती एक कहानी को दिखाती है। श्याम बेनेगल इस फिल्म में भ्रष्ट भारतीय समाज में समस्यायों से दो चार होते एक... Continue Reading →

Road Movie (2010): जीना है ज़िन्दगी का धर्म और मर्म

©...[राकेश]

City of Gold (2010) : गरीबी को पटखनी देती अमीरी

महेश मांजरेकर की फिल्म City of Gold अमीरी गरीबी के बीच संघर्ष की राजनीति को दिखाती है। उदारीकरण के बाद से हिन्दी सिनेमा ने गरीब और अमीर के बीच के अन्तर को दर्शाती हुयी फिल्में बनाना बंद कर दिया था... Continue Reading →

Swami (1977): प्रेम का धागा पति से टूटे या प्रेमी से?

सत्तर के दशक में बासु दा बहुत तेज रफ्तार से फिल्में बनाते थे और उनकी उस दौरान बनायी गयी फिल्मों की गुणवत्ता सराहनीय है। सत्तर के दशक की उनकी फिल्में बार बार देखी जाती हैं और तब भी न तो... Continue Reading →

Peepli Live(2010): न्यू इंडिया और इसके मीडिया के मुँह पर तमाचा लगाता गरीब देहाती हिन्दुस्तान

प्रसिद्ध कवि रामावतार त्यागी की एक कविता की पंक्त्तियाँ हैं जी रहे हो जिस कला का नाम ले ले कुछ पता भी है कि वह कैसे बची है? सभ्यता की जिस अटारी पर खड़े हो, वही हम बदनाम लोगों ने... Continue Reading →

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

चरित्रचित्रण की ऐसी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिल्म को RED कैमरे के द्वारा शूट किया गया और सिनेमेटोग्राफर Robert Shacklady के कैमरे ने लंदन में फिल्माए भागों को खूबसूरती से पकड़ा है। एक अंतर जो दिखता है... Continue Reading →

Yeh Saali Zindagi (2011): प्रेम की ख्वाहिश पे दम निकले

ये साली ज़िंदगी, विकसित प्रेम-कहानियाँ और क्राइम थ्रिलर्स, दोनों ही किस्म की फिल्में देखने वाले दर्शकों को लुभा सकती है । ©…[राकेश]

Tickets(2005): तीन निर्देशक और तीन कहानियां एक ट्रेन में

©...[राकेश] https://youtu.be/zViD9yRse1g?si=AYtj7gNhgS2t7xKW

Offside (2006) : जीत सिनेमा और स्वतंत्रता की

©...[राकेश]

दिल तो बच्चा है जी (Ishqiya 2010) : पाजी दिल के करिश्मे

    ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं दाँत से रेशमी डोर कटती नहीं     उम्र कब की बरस कर सफ़ेद हो गयी कारी बदरी जवानी की छँटती नहीं     वल्लाह ये धड़कन बढ़ने लगी है चेहरे की रंगत उड़ने लगी... Continue Reading →

Haat The Weekly Bazaar : सामंतवादी पुरुष समाज में चीरहरण सहने को विवश स्त्री शक्त्ति की विजय गाथा

औरत ने जनम दिया मरदों को, मरदों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कही दिनारो में, बिकती है कही बाजारों में नंगी नचवाई जाती है अय्याशों के दरबारों में ये... Continue Reading →

जरा थम जा तू (Jogan 1950) : कोयल गर गाती गीतादत्त जैसा ही कूकती

जरा थम जा तू ए सावनमेरे साजन को आने दे आने देमेरे रुठे पिया को फिरमेरी बिगड़ी बनाने दे ओढ़नी पे बिजलियों की गोट मैं लगाऊंगीपीस के काली घटायें काजल बनाऊँगी गरज बादल की अपने दिल की धड़कन में बसाऊँगी... Continue Reading →

कुहू कुहू बोले कोयलिया (Suvarna Sundari– 1957) : मधुर रागमाला, नायाब संगीत

https://youtu.be/ANfV8VnzrYs?si=sv35zFCNO8DmBnrz …[राकेश]

3-Iron (2004): यथार्थ और कल्पना के बीच संतुलन

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जैसे हो गूँजता सुरीला सुर किसी सितार का (Naulakha Haar 1953) : आशा भोसले के स्वर तो गूंजने ही थे

©…[राकेश] https://youtu.be/k_aSZEbrckU?si=3WFv8qBQQ-CIq1TN https://youtu.be/VwYiuVVCw7Y?si=AMB_oIi2Zz7dDDGw

Mr Singh Mrs Mehta (2010): Nudity or Nakedness?

...[राकेश] https://youtu.be/Emv1nFGA3Oo?si=Xc5oYUmBX1yilcKj

My Brother Nikhil(2005): खुशहाल जीवन निगलता AIDS रूपी ब्लैकहोल

©…[राकेश]

Shukno Lanka(2010) : एक्स्ट्रा से नायक बनने वाले अभिनेता की गाथा

©...[राकेश] https://youtu.be/ozbp0wgxnU4?si=uRImjCA051MM8aTW

Kanchivaram 2008 : जब सिल्क के रेशे भी खुरदुरे लगें ज़िन्दगी को

कवि धूमिल की अंतिम कविता – लोहे का स्वाद- एक तरह से करोड़ों शोषितों की चुप्पी को जुबान देती है। प्रियदर्शन की फिल्म कांजीवरम एक सामंजस्य स्थापित करती है उस कविता से। शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो... Continue Reading →

Eskiya – The Bandit (1996) : तुर्की डाकू की प्रेमकहानी

© ...[राकेश] https://youtu.be/J-pSteDL6g4?si=jwN0So3lzO2IpBvQ

A man in our house (1961): जनांदोलन और प्रेमकहानी का सहअस्तित्व

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़बाँ अब तक तेरी है तेरा सुतवाँ जिस्म है तेरा बोल कि जाँ अब तक तेरी है देख के आहंगर की दुकां में तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन खुलने लगे क़ुफ़्फ़लों के... Continue Reading →

The White Balloon (1995): जफर पनाही की स्वतंत्रता कब उड़ान भरेगी?

© ...[राकेश]

The Other End of the Line (2008) : इंडो-अमेरिकन प्रेमकहानी

ओह्ह्ह्ह मुम्बई तो भारत का New York है और वहाँ नौकरियों का विस्फोट हो गया है अमेरिकी धनी Kit Hawksin अपने होटल में ठहरी हुयी भारत से अमेरिका गयी प्रिया से मिलने पर  कहता है। मैं New York को अमेरिका... Continue Reading →

स्मिता पाटिल : प्रतिभावान लड़की को भी समझौते करने पड़ते हैं|

अभिनेत्रियाँ तो स्मिता पाटिल से पहले भी बहुत आयीं और बाद में भी पर भारतीय सिनेमा में सबसे ज्यादा कमी किसी अभिनेत्री की खलती है तो वह स्मिता पाटिल ही हैं। नवम्बर 1985 में हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री कृष्ण... Continue Reading →

एक ही ख्वाब (Kinara 1977): गुलज़ार ने रची गहन प्रेम की खूबसूरत सिनेमाई अभिव्यक्त्ति

https://youtu.be/V-Ym1pm2hDw?si=IHlQatk3e5Qe14qD …[राकेश]

नव कल्पना नव रुप (Mrig Trishna 1978) : नारी सौन्दर्य की भारतीय परिकल्पना

https://youtu.be/UN5-DjAu85U?si=49MP4JjYOyGpjZnV ...[राकेश]

i Am KALAM(2010): खुदी को कर बुलंद इतना…

बेहद संतोष की बात है कि Smile Foundation जैसी गैर-सरकारी समाजसेवी संस्था ऐसी फिल्म के निर्माण के लिये आगे आयी। …[राकेश]

दो नैनों में (Khushboo 1975) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक के संगम का जादू

© …[राकेश] https://youtu.be/i_7PShD6gMM?si=PA6Gz1VJvI36DDFY https://youtu.be/v_qs7436aA4?si=T7dLjOamDU0sCqLy

तुम एक गोरखधंधा हो…याखुदा जवाब नहीं

…[राकेश] https://youtu.be/mXY5-TK2sJ0?si=D7z5et6E_Rt6GT4L

The Univited Guest (2004): सायों के भय से घिरा जीवन

© …[राकेश] https://youtu.be/K754vaau8XY?si=Ums3L8j9w1XYq63O https://youtu.be/_yg5rHqhNbg?si=nIPJx0E0jL_B_Xfp

Raavan (1984) : रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़

तेरे इश्क की एक बूँदइसमें मिल गयी थीइसलिये मैंने उम्र कीसारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम) कैसे रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़आके देखे तो सही ये भी नज़ारा कोई © …[राकेश]

मुरली मेरे श्याम की(1985): कान्हा की मधुर बांसुरी का रस्सावादन वाया गुलज़ार एवम रघुनाथ सेठ

स्त्री स्वरों में गाये गये गीत पुरुष स्वरों में गाये गीतों से ज्यादा अच्छे हैं। सुनो नंद रानी, ओ री सौतनियाँ, न जाने कहाँ बंसी बजाये घनश्याम, कहाँ छोड़ी मुरली कहाँ छोड़ी राधा, बन नौ रसमय, और मुरली तुम्हारी अजब... Continue Reading →

एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता और न्याय की विजय

कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर …[राकेश]

अमिताभ बच्चन : कवि पिता डा. हरिवंशराय बच्चन की कविता

फुल्ल कमल, गोद नवल, मोद नवल, गेहूं में विनोद नवल ! बाल नवल, लाल नवल, दीपक में ज्वाल नवल ! दूध नवल, पूत नवल, वंश में विभूति नवल ! नवल दृश्य, नवल दृष्टि, जीवन का नव भविष्य, जीवन की नवल... Continue Reading →

Saudagar (1973): चाहत भी जब व्यापार बन जाये

https://youtu.be/rsuzrIVoFYY?si=lJkmnH9lAZL1N80f ©…[राकेश]

Abhimaan (1973) : अमिताभ- जया श्रेष्ठ हैं या कला और प्रतिभा?

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और सुबीर की शादी के स्वागत समारोह के बाद यह उमा और चित्रा की दूसरी ही... Continue Reading →

ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है (Aaj-1990):संगीतकार जगजीत सिंह

ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है कभी दुश्मन तो कभी दोस्त नज़र आती है।     कभी छा जाये बरस जाये घटा बेमौसम     कभी एक बूँद को रुह तरस जाती है     ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल... Continue Reading →

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी, बचपन और वो जगजीत सिंह: कौन भूला है यहाँ कोई न भूलेगा यहाँ

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन सेकहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलते हैं (बशीर बद्र) मैं रोया परदेश में भीगा माँ का प्यार,दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार निदा फाज़ली के ही दोहे – छोटा... Continue Reading →

सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

https://youtu.be/_0r12WmrbEU?si=awZNFAjek-2TPxUw यह गीत उन महत्वपूर्ण गीतों में से एक है जो अपना गहरा असर सुनने वाले पर छोड़ जाते हैं। गीत किसी न किसी रुप में सुनने वाले को छुयेगा ही छुयेगा। आज नहीं तो किसी और दिन सही, पर... Continue Reading →

Partition (2007) : भारत के हिंसक विभाजन में जन्मी प्रेमकथा

भारतीय दर्शकों को खटक सकता है नसीम की भूमिका को विदेशी अभिनेत्री Kristin Kreuk से करवाया जाना। शुरु में उन्हे एक मुस्लिम महिला के रुप में स्वीकार करने में कठिनाई भी होती है पर यह एक हॉलीवुड प्रोडक्शन है और... Continue Reading →

Murder Unveiled (2006) : Indo-Canadian Honour Killing

जस्सी के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ा जा सकता है। Justice For Jassi जस्सी हत्याकांड पर आधारित कनेडियन टेलीविज़न की डॉक्यूमेंटरी -The Murdered Bride © ...[राकेश]

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