मानव जाति का इतिहास गवाह है कि अच्छाई और बुराई एक साथ नहीं रह सकते, स्वतंत्रता और साम्राज्यवाद एक साथ नहीं रह सकते, अच्छी और बुराइयों से ग्रस्त सभ्यताओं में टकराव अवश्यंभावी है, इसे न कभी कोई टाल सका है... Continue Reading →
बहुत प्यार पाया बहुत प्यार खोया बहुत मुस्कराया बहुत बार रोया मगर ज़िंदगी से शिकायत नहीं की। जिसे चाहता था वही खो गया किसी और का वो कहीं हो गया मगर एक बिरवा मुझे दे गया आकाश पीड़ा का... Continue Reading →
इससे पहले कि, भूखे–नंगे, आसमान से बगावत कर बैठते, उलट जाते मठाधीशों के सिंहासन, जिल्लेसुभानी बनने वालों के ताज नोंच दिए जाते, इससे पहले कि बराबरी का हक मांगने के लिए लहू पसीने की अंतिम क्रांति उठ खड़ी होती, पोथियों–उपदेशों-बाजों... Continue Reading →
तुमने कभी देखा ओस की बूंद को फूल पे? एक छोटी सी बूँद … बहुत नाज़ुक लेकिन कितनी जीवंत! सारे रंग अपने में समेटे, फूल के आगोश में लिपटी ‘बूँद’ रात भर सपना देखती है… सुबह का, सुबह के ताजगी... Continue Reading →
वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र राव जी ने बेहतरीन प्रेम कहानियाँ लिखी हैं और साहित्यिक पत्रिका - निकट (अंक 45) में उनकी लिखी एक प्रेम कहानी - एक खूबसूरत मोड़ , छपी है| कहानी स्त्री मन की परतों और पुरुष मन की... Continue Reading →
"यारों के यार", लेखिका कृष्णा सोबती की एक लंबी कहानी है जो दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर के अंदरूनी माहौल को दर्शाती है। इस कहानी को कृष्णा सोबती का सरकारी दफ्तरनामा कहा जा सकता है| यह नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पद-प्रतिष्ठा की... Continue Reading →
समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं... Continue Reading →
वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →
© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard
पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →
जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →
पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →
यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज... Continue Reading →
कई साल पहले हम कुछ साथी एक पब्लिक लाइब्रेरी में जाकर किताबें देखने लगे तो देखा वहां उपस्थित हिंदी साहित्य में गद्य की अधिकतर किताबें पढ़ ली हैं और काव्य व निबंधों की किताबें ही बची हैं| अलमारी को एक... Continue Reading →
"It's no good trying to get rid of your own aloneness. You've got to stick to it all your life." — D.H. Lawrence ...[राकेश]
स्वराज भवन और आनंद भवन (इलाहाबाद) : राष्ट्र को समर्पित हैं या नहीं ? अपने समय के बहुत बड़े वकील मोतीलाल नेहरु ने सन 1900 में एक बना बनाया भवन खरीदा जिसका नाम "आनंद भवन" था या रखा गया| अपनी... Continue Reading →
पंडित नेहरु की आत्मकथा (मेरी कहानी/ MY Story) में छपे वर्णन से स्पष्ट है कि हालांकि पंडित नेहरु ने अपनी आत्मकथा 1934-35 में लिखी और 1936 में छपवाई, जब तक कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद दोनों की प्रसिद्धि आकाश छू... Continue Reading →
खजुराहो पर जैसा ओशो ने अपने प्रवचनों पर कहा, वैसा उनसे पहले कभी किसी ने नहीं कहा था| खजुराहो के मंदिरों के अध्यात्मिक महत्त्व को ओशो ने ही सबसे पहले रेखांकित किया| उन्होंने ही इस बात पर प्रकाश डाला कि... Continue Reading →
चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर बनी फिल्मों पर उनके सुपुत्र अमृतराय के विचार सारिका, 1980 संलग्न चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए
खोट रे के रवैये में दीखता है - नेत्र सिंह रावत सारिका, मई 1978
© राजेन्द्र यादव प्रेमचंद की कहानी ज्यादा ईमानदार थी| - राजेंद्र यादव
मीना कुमारी की डायरी (14) , सारिका, मार्च 1975 प्रस्तुति - © गुलज़ार
लेखक - राजेश्वरी त्यागी (धर्मपत्नी दुष्यंत कुमार) साभार : दुष्यंत के जाने पर दोस्तों की यादें (संपादक - कमलेश्वर)
महादेवी वर्मा का साक्षात्कार , साक्षात्कारकर्ता - उमाकांत मालवीय Published in Sarika , November 1981
...[राकेश] सन्दर्भ : बलवंत गार्गी के पंजाबी और अंगरेजी में लिखे एक संस्मरण पर आधारित Paintings - Amrita Sher-Gil (Nude Self portraight) Vincent Von Gogh (Old shoes) Satish Gujral (Mural at Delhi High Court)
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