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Literature

रोज़ / गैंग्रीन ( अज्ञेय ) : अप्रेम से रसहीन होता जाता जीवन!

...[राकेश] ©

शिशु , संगीत और माँ

वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →

क्या टूटा है भीतर भीतर (कृष्ण बिहारी)

© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard

महाश्वेता : एक सांवली नायिका की कथा

,,,[राकेश] पेंटिंग : सुधीर खस्तगीर

Miles to go Before I Sleep (Robert Frost)

पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →

तुम्हें याद हो कि न याद हो …

अभिनय अभिनेताओं के लिए ही आरक्षित रहना चाहिए !

...[राकेश] © https://youtu.be/F1Q3iqG8aqw?si=7n1leXgaY4h4sDUE https://youtu.be/YR44z8wxgVc?si=enmBIdjomUrss5IV https://youtu.be/ZtNDMYTnbxI?si=nYXN4iMBGvCJ5PyX https://youtu.be/0LWJZBmARUk?si=7VEw4tlBiH1y1yDz

सुरेन्द्र मोहन पाठक क्या वाकई गलती कर बैठे?

जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →

पुल पार करना खाई, नदी, समंदर पार करना ही होता है !

पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →

जीवन और मृत्यु !

...[राकेश] पेंटिंग : Death and Life (Gustav Klimt)

लवर्स (निर्मल वर्मा) : दोस्ती में एक अंतर्मुखी का प्रेम प्रस्ताव

...[राकेश]

जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)

...[राकेश]

नो बॉस नो … (कृष्ण बिहारी)

© ~ कृष्ण बिहारी

15 अगस्त के बाद (शैलेन्द्र) : दृष्टा जन-कवि

यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज... Continue Reading →

महेंद्र रज्जन : कहीं खो चुके लेखक का लापता साहित्य

कई साल पहले हम कुछ साथी एक पब्लिक लाइब्रेरी में जाकर किताबें देखने लगे तो देखा वहां उपस्थित हिंदी साहित्य में गद्य की अधिकतर किताबें पढ़ ली हैं और काव्य व निबंधों की किताबें ही बची हैं| अलमारी को एक... Continue Reading →

दूसरी दुनिया (निर्मल वर्मा) : गरीबी, ठण्ड और अकेलापन

"It's no good trying to get rid of your own aloneness. You've got to stick to it all your life." — D.H. Lawrence ...[राकेश]

ओशो वाया प्रीतीश नंदी (1985)

Courtesy : Illustrated Weekly of India, 29 September 1985

“स्वराज भवन + आनंद भवन” @ इलाहाबाद

स्वराज भवन और आनंद भवन (इलाहाबाद) : राष्ट्र को समर्पित हैं या नहीं ? अपने समय के बहुत बड़े वकील मोतीलाल नेहरु ने सन 1900 में एक बना बनाया भवन खरीदा जिसका नाम "आनंद भवन" था या रखा गया| अपनी... Continue Reading →

अन्ना कारेनिना : क्या तुमने कभी सोचा!

© ...[ राकेश]

अंधायुग, अलकाजी, तुगलक : राम गोपाल बजाज

साभार : सारिका, फरवरी 1984

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