"यारों के यार", लेखिका कृष्णा सोबती की एक लंबी कहानी है जो दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर के अंदरूनी माहौल को दर्शाती है। इस कहानी को कृष्णा सोबती का सरकारी दफ्तरनामा कहा जा सकता है| यह नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पद-प्रतिष्ठा की... Continue Reading →
समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं... Continue Reading →
वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →
© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard
पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →
जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →
पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →
यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज... Continue Reading →
कई साल पहले हम कुछ साथी एक पब्लिक लाइब्रेरी में जाकर किताबें देखने लगे तो देखा वहां उपस्थित हिंदी साहित्य में गद्य की अधिकतर किताबें पढ़ ली हैं और काव्य व निबंधों की किताबें ही बची हैं| अलमारी को एक... Continue Reading →
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