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Raj Kapoor

Tamasha (2015) : बचपन ओ’ मोहब्बत को दिल से न जुदा करना

बचपन, बचपन से मोहब्बत और बचपन की मोहब्बतें तीनों का इंसान के जीवन में बहुत बड़ा शायद सबसे बड़ा स्थान है| बचपन की मोहब्बतों में आवश्यक नहीं कि यह किसी इंसान से ही मोहब्बत का मामला हो, यह किसी विधा... Continue Reading →

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Bombai ka Babu(1960) : सुचित्रा सेन के लिए देव आनंद सगा भाई है, पर देव सुचित्रा में प्रेमिका खोजता है

देव आनंद अभिनीत राज खोसला दवारा निर्देशित बम्बई का बाबू फिल्म की कहानी में राजिंदर बेदी और एम.आर कामथ ने O Henry की कहानी A Double Dyed Deceiver से प्रेरित प्रसंगों को रखा और इसमें इनसेस्ट के कोण का मिश्रण... Continue Reading →

भारत कुमार – गांधी + भगत सिंह के संगम से उपजाया मनोज कुमार ने यह विलक्षण सिनेमाई चरित्र

कुछ बातें होती हैं जो जीवन की दिशा बदल देती हैं| अभिनेता मनोज कुमार के सिनेमाई जीवन में भगत सिंह के जीवन पर फिल्म बनाने का अवसर आया और उस एक घटना ने उनके सिनेमाई जीवन की दिशा ही बदल... Continue Reading →

Ugly (2014) : असंवेदनशीलता और खुदगर्जी से सड़ते रिश्तों की बजबजाती गंदगी में मरता बचपन

Ugly का अंत और कुछ अन्य हिस्से इस भयानक रूप से वास्तविक प्रतीत होते हैं कि फिल्म दर्शक को डराती है और इस कदर डराती है कि दर्शक पहले तो हजार बार सोचेगा अपने छोटे बच्चे को कार में छोड़कर... Continue Reading →

शशि कपूर : ‘दादा साहेब फाल्के’

सिनेमा के भारतीय प्रेमी केन्द्र सरकार को धन्यवाद कह सकते हैं कि काफी समय से बीमार अभिनेता-निर्माता और निर्देशक शशि कपूर को अंततः उनके दवारा भारतीय सिनेमा को दिए  गये उल्लेखनीय योगदान के कारण उनके प्रति न्याय करते हुए (और... Continue Reading →

Raj Kapoor : राजू तारा कहीं भी तो नहीं खोया!

श्री 420  के एक गीत की एक पंक्ति है ” एक तारा न जाने कहाँ खो गया “। 14 दिसम्बर 1924 को जन्मे राज कपूर की भौतिक शरीर रुपी उपस्थिति तो जरुर 2 जून 1988 को धरा से विलीन हो... Continue Reading →

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

जागते रहो, पूर्वज फिल्म है जाने भी दो यारों और इस जैसी अन्य फिल्मों की। जागते रहो में जाने भी दो यारों की तरह स्पष्ट हास्य भले ही हर फ्रेम में बिखरा हुआ न हो पर जागते रहो का असर... Continue Reading →

नव कल्पना नव रुप (Mrig Trishna 1978) : नारी सौन्दर्य की भारतीय परिकल्पना

उर्वशी और मेनका जैसी अप्सराओं के मिथकों, सिंधु घाटी की सभ्यता से मिले अवशेषों में पायी गयी यक्षिणी की मूर्ति और अजंता एलोरा की गुफाओं में सदियों से अपने विलक्षण सौन्दर्य की झलक दिखाती यक्षिणी तक ढेरों उदाहरण पाये जाते... Continue Reading →

जाने वाले मुड़ के (श्री 420) : राज कपूर की तकनीकी श्रेष्ठता

राज कपूर की इस सर्वश्रेष्ठ फिल्म के इस गीत के बोल लिखे थे हसरत जयपुरी ने। फिल्म में ऐसी परिस्थितियाँ बनती हैं कि नादिरा और नीमो द्वारा दी गयी पार्टी में राज कपूर, नरगिस को अपने साथ लेकर जाते हैं। वहाँ... Continue Reading →

मेरा जूता है जापानी (Shri 420) : बिगड़े दिल फक्कड़ शहज़ादों की ठसक

“I do not want my house to be walled in on all sides and my windows to be stuffed. I want the cultures of all the lands to be blown about my house as freely as possible. But I refuse... Continue Reading →

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