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Pancham

फिर से अइयो बदरा बिदेसी (नमकीन 1982) … गुलज़ार का मेघदूत

“कैफ बरदोश, बादलों को न देख, बेखबर, तू न कुचल जाए कहीं|” आकाश में उमड़ घुमड़ आये बादलों से मनुष्य का बहुत पुराना सम्बन्ध है शायद तब का जब मानव ने धरती पर बस जन्म लिया ही होगा और उसे... Continue Reading →

Khushboo (1975) : रिश्ते में प्रेम, त्याग, इंतजार, दुख और अधिकार की मिली-जुली खुशबू

शरत चंद्र चटर्जी की कहानी पर आधारित खुशबू, एक पीरियड फिल्म है और फिल्म देखते हुए इस बात को ध्यान में रखना जरुरी है क्योंकि आधुनिक दौर की परिभाषाएँ ऐसी फिल्मों पर लागू नहीं होतीं और हो नहीं सकतीं क्योंकि... Continue Reading →

किशोर कुमार : सवेरे वाली कुनमुनी, कुरमुरी लालिमा की छुअन जैसा गायन

चाहे हिमालय के भव्य अस्तित्व का श्रंगार करती हुयी सूरज की किरणें हों या एल्प्स की वादियों की गोद को धीमी नाजुक आँच से मदमाती हुयी सूरज की किरणें हों, सुबह के सूरज की लालिमा के सौंदर्य का कहीं कोई... Continue Reading →

Kahaani (2012): विद्या बालन की थ्रिलर फिल्म

बेहतरीन अभिनेत्री विद्या बालन के बहुत अच्छे अभिनय वाली फिल्मों में इश्किया और कहानी दोनों ही थ्रिलर्स होने के कारण अलग ही स्थान रखती हैं|  निर्देशक सुजॉय घोष की फ़िल्म 'कहानी' दर्शक की उत्सुकता को अंत तक बाँध कर रखने... Continue Reading →

एक ही ख्वाब (Kinara 1977): गुलज़ार ने रची गहन प्रेम की खूबसूरत सिनेमाई अभिव्यक्त्ति

गुलज़ार की फिल्म किनारा (1977) का यह गीत कई मायनों में अनूठा है। ऐसा कोई और गीत हिन्दी फिल्मों में मुश्किल से ही मिलेगा। हिन्दी सिनेमा की सबसे खूबसूरत और विश्वसनीय रुप से रोमांटिक जोड़ियों में से एक हेमा मालिनी-... Continue Reading →

दो नैनों में (Khushboo 1975) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक के संगम का जादू

यूँ तो खुशबू के सभी गीत एक से बढ़कर एक हैं पर फिल्म की परिस्थितियों के अनुरुप – दो नैनों में आँसू भरे हैं, गीत तो कमाल का बन पड़ा है। यह कहना अतिशयोक्त्ति न होगी कि यह गीत गुलज़ार... Continue Reading →

कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार: मुकेश के गीत में लता की “हॆ”

यह गीत हृषिकेष मुखर्जी की फिल्म फिर कब मिलोगी (1974) का है। इसे लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीतबद्ध किया था आर.डी.बर्मन/पंचम ने। फिल्म में यह यह गीत दो बार आता है। पहली बार यह एकल गीत के रुप... Continue Reading →

Teen Deviyan (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की मनोस्थिति को... Continue Reading →

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