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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Movies

Kill Bill 1 & 2

निर्देशक Quentin Tarantino की फ़िल्म Kill Bill के दोनों भाग, एक के तुरंत बाद दूसरा, देखने के लिए दर्शक के पास अगर लगभग 4 घंटे और 10 मिनट न हों, तो इसे तभी देखने का प्रयास करना चाहिए जब इतना... Continue Reading →

रिमझिम बरसे पानी (परदेसी 1957)

भारत के सन्दर्भ में बरसात, उसमें भी ग्रामीण भारत के सन्दर्भ में बरसात के गीतों में भारत और रूस (सोवियत संघ) के संयुक्त उपक्रम से सन 1957 में बनी फ़िल्म - परदेसी, जिसका भारतीय संस्करण ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा... Continue Reading →

ऋषि कपूर : कुछ महत्वपूर्ण फ़िल्में

परदे पर जिसे  किशोरावस्था से युवा होने के काल के बीच का नायक कहा जा सके वे ऋषि कपूर पहले ही थे हिंदी सिनेमा में| उनसे पहले के जितने भी अभिनेताओं ने नायक के रूप में अपनी पारी शुरू की वे... Continue Reading →

Rambo : First Blood (1982)

Hollywood की बगिया में मूलतः एक्शन स्टार Sylvester Stallone को एक कायदे का अभिनेता होने का सम्मान दिलवाने वाली फिल्मों की दो सीरीज में से एक है 5 फिल्मों वाली Rambo सीरीज, इसमें भी पहली फ़िल्म First Blood का एक अलग ही महत्त्व है| युद्ध सैनिक और... Continue Reading →

Governor (2026) : झूठ मिले तथ्यों पर अच्छे अभिनय वाली फ़िल्म

1991 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के काल में देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट आ गया था और यह चार माह के लिए प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर और उनकी सरकार के कारण तो आया नहीं था, यह पहले की सरकारों की... Continue Reading →

Musafir Cafe (2026) : विवाह और प्रेम की गलियों में भटकते लोग!

Ginny Weds Sunny (2020), 14 Phere (2021) के बाद बहुत अरसे तक विक्रांत मैसी डार्क विषयों वाली फिल्मों में ही दिखाई देते रहे हैं और जिनमें कई में उन्होंने ऋणात्मक भूमिकाएं भी कीं उस लिहाज से एक पूरी तरह रोमांटिक... Continue Reading →

मैं वापस आऊंगा (2026): क्या फ़िल्म ने गलत दिखाया?

नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुयी इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म - मैं वापिस आऊँगा, के एक सिक्वेंस में 1947 में नायक (वेदांग रैना) अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ पाकिस्तान से ट्रेन में लद कर भारत पहुँचता है तो अमृतसर... Continue Reading →

तेरे जैसा कोई देखा (प्यार की मंजिल)

किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन... Continue Reading →

Mukhbir (2026): रॉ से पहले का जासूस

...[राकेश]

लेखक, निर्देशक से बड़ा होता है : गोविन्द निहलानी

साभार : सारिका फरवरी 1985

पुरस्कार तो दोनों किस्म की फिल्मों में मिले हैं : शबाना आज़मी

साभार - सत्यकुमारी , सारिका , फरवरी 1985

1959 के सिनेप्रेमियों के रोचक प्रश्न !

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

सुगम संगीत

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

भारतीय संगीत की बाधित राहें : नौशाद

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

फिल्मों में नृत्य – अभिनेत्री संध्या की दृष्टि में

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

संगीतरहित फ़िल्में : पंकज मलिक के विचार !

साभार : फिल्म संगीत, दिसम्बर 1959

तलत महमूद का एक संस्मरण (1959)

साभार : फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

हीर राँझा (1970) : पद्यात्मक संवादों से सजी फ़िल्म

...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|

Raakh (2026):

राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद ~ गुलजार दिल्ली के दिल के कुछ घाव ऐसे हैं जिन्होंने नासूर बनकर पूरे देश को प्रभावित किया| गीता और संजय चोपड़ा हत्याकांड और निर्भया कांड भी उनमें से... Continue Reading →

Maa Behen (2026)

कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →

Dr. Ramu : जूनून का मतलब तो बहुत खोकर कुछ पाना है

किसी ने ग़म नहीं समझा हमारामुक़द्दर खा गया सपना हमारा ~ आफ़रीद कुरैशी बाबा   ...[राकेश] फिल्म को नीचे दिए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है| https://play.pocketfilms.in/dr.ramu  

Sunny Deol @Damini (1993)

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →

अभिनय अभिनेताओं के लिए ही आरक्षित रहना चाहिए !

...[राकेश] © https://youtu.be/F1Q3iqG8aqw?si=7n1leXgaY4h4sDUE https://youtu.be/YR44z8wxgVc?si=enmBIdjomUrss5IV https://youtu.be/ZtNDMYTnbxI?si=nYXN4iMBGvCJ5PyX https://youtu.be/0LWJZBmARUk?si=7VEw4tlBiH1y1yDz

जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)

...[राकेश]

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा (दिल एक मंदिर 1963)

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेलाआज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेलारुक जा रात ...पहले मिलन की यादें लेकर आई है ये रात सुहानीदोहराते हैं चाँद सितारे मेरी तुम्हारी प्रेम कहानीमेरी तुम्हारी प्रेम... Continue Reading →

एक बार ज़रा फिर कह दो (बिन बदल बरसात 1963)

...[राकेश]

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

शतरंज के खिलाड़ी और प्रेमचंद की कहानियों पर बनी अन्य फ़िल्में

चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर बनी फिल्मों पर उनके सुपुत्र अमृतराय के विचार सारिका, 1980 संलग्न चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए

शतरंज के खिलाड़ी – सत्यजित रे का रवैया

खोट रे के रवैये में दीखता है - नेत्र सिंह रावत सारिका, मई 1978

शतरंज के खिलाड़ी : प्रेमचंद बनाम सत्यजित रॉय

© राजेन्द्र यादव प्रेमचंद की कहानी ज्यादा ईमानदार थी| - राजेंद्र यादव

कविराज शैलेन्द्र का पढ़ाकूपन

प्रेम कपूर ( सारिका 1966)

कुंदनलाल सहगल … फिल्मों में पदार्पण

राघव मेनन , Published in सारिका 1981

Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग

होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →

Anupama(1966): एक स्त्री और एक पिता की मूर्तियों की गढ़न

The Great Shamsuddin Family

लखनऊ के इतिहासकार योगेश प्रवीण ने लखनऊ का एक पुराना किस्सा सुनाया जो बेहद लोकप्रिय हो गया| ******** "1920 में लखनऊ में पहली बार म्यूनिसिपैलिटी के चुनाव हुए तो चौक के इलाक़े से कारपोरेटर के चुनाव के लिये लखनऊ की मशहूर... Continue Reading →

JwarBhata(1944): दलीप कुमार की पहली फ़िल्म की समीक्षा

प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक बाबूराव पटेल ने दलीप कुमार की पहली फिल्म ज्वार भाटा (1944) की समीक्षा में दलीप कुमार की बेरहमी से आलोचना की थी| Review Courtesy : Jhinjhar @ IMDB

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं (सनी 1984) : धर्मेन्द्र फैक्टर

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैंलोग मिलते हैं, जुदा होते हैं कब बिछड़ जाए, हमसफ़र ही तो हैकब बदल जाए, एक नज़र ही तो हैजान-ओ-दिल जिसपे फ़िदा होते हैं और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं जब रुला लेते हैं जी भर के... Continue Reading →

धर्मेन्द्र : परदे पर स्त्री तिरस्कार का सामना

...[राकेश]

Maharani 4 : रानी भारती की मूर्ति का भंजन !

...[राकेश]

Baramulla (2025): अगर रूहें न होतीं तो क्या बात होती!

तुम्हारा इंतज़ार है तुम पुकार लो : Khamoshi(1969)

...[राकेश]

Dharmendra : Sholay(1975) – सफलता के कारवां का सबसे कम भाग्यशाली अभिनेता

संजीव कुमार : अभिनय कला की बारीकी के उस्ताद

ज़हीन आप के दर पर सदाएँ देते रहेजो ना-समझ थे वो दर-दर सदाएँ देते रहे (~वरुन आनन्द) संजीव कुमार और गुलज़ार की शानदार सिनेमाई जोड़ी की अंतिम दो प्रस्तुतियों में से एक है "नमकीन"| नमकीन में एक गीत है -... Continue Reading →

Doctor G (2022) : पुरुष स्पर्श का घुल जाना

कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में (~हमीदा शाहीन) पश्चिमी देशों में ऐसे बहुत सारे पुरुष डॉक्टर्स मिलेंगे जो स्त्री-रोग विशेषज्ञ हैं, प्रसूति विभाग के अध्यक्ष हैं, बल्कि अक्सर ही सबसे ज्यादा जाने... Continue Reading →

Sulakshana Pandit : चेहरा है या फूल खिला है!

हिंदी सिनेमा में तीन ऐसे खुशनुमा चेहरों वाली अभिनेत्रियाँ रही हैं जिनके चेहरों पर उदासी कभी भी फ़बी नहीं और उनके उदास चेहरे देख दर्शक भी बैचेनी महसूस करने लगते हैं कि ये स्त्रियाँ हंस क्यों नहीं रहीं? क्योंकि उनकी... Continue Reading →

Uff Ye Siyappa (2025) : संवाद रहित हंगामा

ओटीटी मंचों पर देखने लायक कोई हल्की फुल्की फिल्म खोजी जा रही हो या ऐसी कोई फिल्म एकाएक सामने आ जाए तो ऐसी फिल्मों के वर्ग में लेखक, निर्देशक और निर्माता लव रंजन का नाम अपनी विश्वसनीयता कायम कर चुका... Continue Reading →

The Ba***ds of Bollywood (2025) : A Satirical Model

नवोदित निर्देशक के तौर पर आर्यन खान ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है| उनकी वेब सीरीज की सामग्री को देखा जाए तो भाषा के स्तर पर वह कुछ वर्षों पूर्व AIB के एक कुख्यात कार्यक्रम जैसी है, जिसे अंततः... Continue Reading →

Mani Kaul : जहाँ सिनेमा एक ‘राग’ बन गया (HK Verma)

~ © HK Verma हिन्दी अनुवाद – …[राकेश] [नोट : यह लेख श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद है| HK Verma, an alumnus of FTII, is a renowned cinematographer who earlier in his career collaborated with celebrated cinematographer KK... Continue Reading →

Saiyaara (2025) : मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

दुखांत न भी हों लेकिन दुःख भरे मार्गों से गुजरने वाली प्रेम कहानियों पर आधारित महत्वपूर्ण हिन्दी फ़िल्में हर दशक में 2-3 के औसत से बनती ही आ रही हैं| कभी लता मंगेशकर के आयेगा आने वाला गीत (महल) को... Continue Reading →

Pehla Pyaar < 1% Chance : दिल तो आशिक है

वो कमसिन हैं उन्हें मश्क़-ए-सितम को चाहिए मुद्दतअभी तो नाम सुन कर ख़ंजर-ओ-पैकाँ का डरते हैं [~ हाज़िक़] ओटीटी के भारत में पैर जमाने से दो अच्छे काम सिनेमा के माध्यम में हुए, एक तो बचपन को समाहित करने वाली... Continue Reading →

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