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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Movies

तेरे जैसा कोई देखा (प्यार की मंजिल)

किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन... Continue Reading →

Mukhbir (2026): रॉ से पहले का जासूस

...[राकेश]

लेखक, निर्देशक से बड़ा होता है : गोविन्द निहलानी

साभार : सारिका फरवरी 1985

पुरस्कार तो दोनों किस्म की फिल्मों में मिले हैं : शबाना आज़मी

साभार - सत्यकुमारी , सारिका , फरवरी 1985

1959 के सिनेप्रेमियों के रोचक प्रश्न !

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

सुगम संगीत

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

भारतीय संगीत की बाधित राहें : नौशाद

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

फिल्मों में नृत्य – अभिनेत्री संध्या की दृष्टि में

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

संगीतरहित फ़िल्में : पंकज मलिक के विचार !

साभार : फिल्म संगीत, दिसम्बर 1959

तलत महमूद का एक संस्मरण (1959)

साभार : फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

हीर राँझा (1970) : पद्यात्मक संवादों से सजी फ़िल्म

...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|

Raakh (2026):

राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद ~ गुलजार दिल्ली के दिल के कुछ घाव ऐसे हैं जिन्होंने नासूर बनकर पूरे देश को प्रभावित किया| गीता और संजय चोपड़ा हत्याकांड और निर्भया कांड भी उनमें से... Continue Reading →

Maa Behen (2026)

कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →

Dr. Ramu : जूनून का मतलब तो बहुत खोकर कुछ पाना है

किसी ने ग़म नहीं समझा हमारामुक़द्दर खा गया सपना हमारा ~ आफ़रीद कुरैशी बाबा ...[राकेश] फिल्म को नीचे दिए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है| https://play.pocketfilms.in/dr.ramu

Sunny Deol @Damini (1993)

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →

अभिनय अभिनेताओं के लिए ही आरक्षित रहना चाहिए !

...[राकेश] © https://youtu.be/F1Q3iqG8aqw?si=7n1leXgaY4h4sDUE https://youtu.be/YR44z8wxgVc?si=enmBIdjomUrss5IV https://youtu.be/ZtNDMYTnbxI?si=nYXN4iMBGvCJ5PyX https://youtu.be/0LWJZBmARUk?si=7VEw4tlBiH1y1yDz

जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)

...[राकेश]

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा (दिल एक मंदिर 1963)

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेलाआज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेलारुक जा रात ...पहले मिलन की यादें लेकर आई है ये रात सुहानीदोहराते हैं चाँद सितारे मेरी तुम्हारी प्रेम कहानीमेरी तुम्हारी प्रेम... Continue Reading →

एक बार ज़रा फिर कह दो (बिन बदल बरसात 1963)

...[राकेश]

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

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