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amitabh bachchan

Shalimar (1978) : हॉलीवुड और हिन्दी सिनेमा के संगम की भव्यता से बनी फिल्म की निर्माणगाथा

हॉलीवुड के अभिनेताओं Rex Harrison एवं John Saxon तथा ग्लैमर की प्रतीक अभिनेत्री Gina Lollobrigida, और प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर Harvey Genkins को बम्बई लाकर अगर कोई निर्देशक इस बात की घोषणा करे कि इन विश्व प्रसिद्ध सितारों और हिन्दी सिनेमा के... Continue Reading →

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Bombai ka Babu(1960) : सुचित्रा सेन के लिए देव आनंद सगा भाई है, पर देव सुचित्रा में प्रेमिका खोजता है

देव आनंद अभिनीत राज खोसला दवारा निर्देशित बम्बई का बाबू फिल्म की कहानी में राजिंदर बेदी और एम.आर कामथ ने O Henry की कहानी A Double Dyed Deceiver से प्रेरित प्रसंगों को रखा और इसमें इनसेस्ट के कोण का मिश्रण... Continue Reading →

Ahalya (2015) : वासना का खतरनाक प्रलोभन

हर बुरा भाव मनुष्य के भीतर ही बसता है, किसी भी किस्म का लालच हो वह उसके भीतर के संसार को निर्मित करता है| साधू अपने अंदर के इस कलुषित संसार का शोधन करता रहता है, उस शुद्धतम अवस्था को... Continue Reading →

हिंदी सिनेमा का अनूठा संन्यासी सुपर अभिनेता स्टार

सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →

Piku (2015) : हाजत हजार नियामत

घर में लगे फोटो से जाहिर होता है कि या तो सत्तर वर्षीय वृद्ध पिता भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) या उसकी अविवाहित पुत्री, जो कि उम्र के तीसरे दशक के किसी पड़ाव पर रुकी जिंदगी जी रही है, या दोनों... Continue Reading →

किशोर कुमार : सवेरे वाली कुनमुनी, कुरमुरी लालिमा की छुअन जैसा गायन

चाहे हिमालय के भव्य अस्तित्व का श्रंगार करती हुयी सूरज की किरणें हों या एल्प्स की वादियों की गोद को धीमी नाजुक आँच से मदमाती हुयी सूरज की किरणें हों, सुबह के सूरज की लालिमा के सौंदर्य का कहीं कोई... Continue Reading →

शशि कपूर : ‘दादा साहेब फाल्के’

सिनेमा के भारतीय प्रेमी केन्द्र सरकार को धन्यवाद कह सकते हैं कि काफी समय से बीमार अभिनेता-निर्माता और निर्देशक शशि कपूर को अंततः उनके दवारा भारतीय सिनेमा को दिए  गये उल्लेखनीय योगदान के कारण उनके प्रति न्याय करते हुए (और... Continue Reading →

Kahaani (2012): विद्या बालन की थ्रिलर फिल्म

बेहतरीन अभिनेत्री विद्या बालन के बहुत अच्छे अभिनय वाली फिल्मों में इश्किया और कहानी दोनों ही थ्रिलर्स होने के कारण अलग ही स्थान रखती हैं|  निर्देशक सुजॉय घोष की फ़िल्म 'कहानी' दर्शक की उत्सुकता को अंत तक बाँध कर रखने... Continue Reading →

Shaan(1980): शोले की आन, बान और शान में घटोत्तरी

सत्तर का दशक बीत चुका था, अस्सी का दशक धड़ल्ले से आगमन कर गया था। अमिताभ बच्चन सफलता के पुष्पक विमान पर उड़ान भरते हुये हिन्दी सिनेमा में देवाधिदेव होने का मुकाम हासिल कर चुके थे। दर्शक उनकी हर नई... Continue Reading →

नवीन निश्चल : सौम्य चरित्रों के अभिनेता

11 April 1946 को जन्में अभिनेता नवीन निश्चल उस समय जीवन का परित्याग (19 March 2011) कर गये जब एक अभिनेता के रुप में हिन्दी सिनेमा उनका बहुत अच्छा उपयोग कर सकने की स्थिति में पहुँच गया था| आज के... Continue Reading →

i Am KALAM(2010): खुदी को कर बुलंद इतना…

होटल ढ़ाबे के गंदे बर्तन साफ करता छोटू ट्रक, बस के ऑयल में सना हुआ छोटू कचरे के ढ़ेर में से खाना ढ़ूँढ़ता छोटू मैडम के बच्चों को नन्हे हाथों से खिलाता छोटू मालिक की डाँट खाता छोटू बाबा के... Continue Reading →

आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को। मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन।... Continue Reading →

अमिताभ बच्चन : कवि पिता डा. हरिवंशराय बच्चन की कविता

फुल्ल कमल, गोद नवल, मोद नवल, गेहूं में विनोद नवल ! बाल नवल, लाल नवल, दीपक में ज्वाल नवल ! दूध नवल, पूत नवल, वंश में विभूति नवल ! नवल दृश्य, नवल दृष्टि, जीवन का नव भविष्य, जीवन की नवल... Continue Reading →

Saudagar (1973): चाहत भी जब व्यापार बन जाये

नारी बिचारी है पुरुष की मारी है तन से क्षुधित है मन से मुदित है लपककर झपककर अंत में चित्त है (रघुवीर सहाय) पतझड़ को ही मौसम की स्थायी अवस्था मानकर विधवा माजू बी (नूतन) किसी तरह जीवन काट रही... Continue Reading →

Abhimaan (1973) : अमिताभ- जया श्रेष्ठ हैं या कला और प्रतिभा?

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और सुबीर की शादी के स्वागत समारोह के बाद यह उमा और चित्रा की दूसरी ही... Continue Reading →

The Bald, the Bad and The Dangerous

उपरोक्त शीर्षक का भावार्थ किया जाये तो ” खतरनाक गंजा ” एकदम उपयुक्त लगेगा। यह शीर्षक किसी जासूसी (बाल, किशोर या वयस्क) उपन्यास से उठाया गया लगता है। पर ये समझ लेना जरुरी है कि इन गंजे महोदय से खतरनाक... Continue Reading →

Yathharth (2002): चाण्डाल का बदरंग जीवन

एक चाण्डाल अपनी पुत्री और दामाद की चिता की ठंडी होती राख के पास बैठा बिलख रहा है। इस समय वह केवल एक बाप है। “ हे भोलेनाथ तूने ठीक किया जो मेरी बिटिया को बुला लिया। वह कैसे जीती... Continue Reading →

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