खोजें

Cine Manthan

टैग

rajesh khanna

Bawarchi (1972): दिल चोर बावर्ची!

सन 1972 से पहले ही भारत में हिंदी फिल्म उधोग के सुपर स्टार के रूप में राजेश खन्ना की अनूठी सफलता की चमक हिंदी सिनेमा के संसार को चुंधियाने लगी थी| आराधना के बाद राजेश खन्ना की लगभग हर फिल्म... Continue Reading →

Advertisements

Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल

हृषिकेश मुकर्जी की उल्लेखनीय फिल्म – आनंद, का शीर्षक फिल्म के एक मुख्य किरदार आनंद (राजेश खन्ना) के नाम पर रखा गया है, जो अपने जीवन के गमों और अपनी परेशानियों को दरकिनार करके अपना जीवन इस ईश्वरीय वरदान वाले... Continue Reading →

हिंदी सिनेमा का अनूठा संन्यासी सुपर अभिनेता स्टार

सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →

Masaan (2015) : खिलने से पहले फूलों को खिज़ा खा गई

‘मसान’ में बहुत कुछ ऐसा है जो लगभग सभी देखने वालों को बेहद पसंद आएगा| अच्छी फिल्मों में जो सामने दिखता है, जो भले ही अलग – अलग प्रतीत होता है, उसके पार्श्व में दिखाई न दे सकने वाले परन्तु... Continue Reading →

हमने देखी हैं उन आँखों की महकती खुशबू (Khamoshi 1969) : अनूठे मुखड़े से सजा प्रेमगीत ग्रंथ

रूप, स्पर्श, स्वर, स्वाद और गंध पांच ऐसे विषय हैं जिनके सम्मोहन से मनुष्य जीवन आदिकाल से बंधा हुआ है और अनंत काल तक, या जब तक धरती पर मनुष्य जीवन उपलब्ध है, बंधा ही रहेगा| यह सिद्ध रूप में... Continue Reading →

किशोर कुमार : सवेरे वाली कुनमुनी, कुरमुरी लालिमा की छुअन जैसा गायन

चाहे हिमालय के भव्य अस्तित्व का श्रंगार करती हुयी सूरज की किरणें हों या एल्प्स की वादियों की गोद को धीमी नाजुक आँच से मदमाती हुयी सूरज की किरणें हों, सुबह के सूरज की लालिमा के सौंदर्य का कहीं कोई... Continue Reading →

Khamoshi (1969): सन्नाटे की गूँज

जरुरी नहीं कि एक सलीके से फैला हुआ निबंध वह असर छोड़ जाये जो एक कविता, जो कि पूरी तरह से अतार्किक लगती है, छोड़ जाती है। यूँ ही नहीं कहा जाता कि भावना दिल का मामला है दिमाग का... Continue Reading →

WordPress.com पर ब्लॉग.

Up ↑