"यारों के यार", लेखिका कृष्णा सोबती की एक लंबी कहानी है जो दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर के अंदरूनी माहौल को दर्शाती है। इस कहानी को कृष्णा सोबती का सरकारी दफ्तरनामा कहा जा सकता है| यह नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पद-प्रतिष्ठा की... Continue Reading →
Ginny Weds Sunny (2020), 14 Phere (2021) के बाद बहुत अरसे तक विक्रांत मैसी डार्क विषयों वाली फिल्मों में ही दिखाई देते रहे हैं और जिनमें कई में उन्होंने ऋणात्मक भूमिकाएं भी कीं उस लिहाज से एक पूरी तरह रोमांटिक... Continue Reading →
समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं... Continue Reading →
नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुयी इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म - मैं वापिस आऊँगा, के एक सिक्वेंस में 1947 में नायक (वेदांग रैना) अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ पाकिस्तान से ट्रेन में लद कर भारत पहुँचता है तो अमृतसर... Continue Reading →
किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन... Continue Reading →
वह जो बंगला है नासामनेमेडिकल कॉलेज के एकडॉक्टर का हैवहाँ जो भीड़ हैवह पागलों की हैबीमारों की हैमरीजों के साथ साथ उनके परिजन भीबीमार हो गये हैं।पागलों का इलाज करते करतेडॉक्टर भी हो गया है पागल पैसे के पीछे। (~... Continue Reading →
साभार - सत्यकुमारी , सारिका , फरवरी 1985
साभार : फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)
...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|
Recent Comments