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Cinema, Theatre, Music & Literature

हीर राँझा (1970) : पद्यात्मक संवादों से सजी फ़िल्म

...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|

Heer Raanjha (1970) : A Unique film in the verse

              ...[राकेश] © First published on Passionforcinema.com (January 18, 2007 at 6.22 a.m.)

Raakh (2026):

राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद ~ गुलजार दिल्ली के दिल के कुछ घाव ऐसे हैं जिन्होंने नासूर बनकर पूरे देश को प्रभावित किया| गीता और संजय चोपड़ा हत्याकांड और निर्भया कांड भी उनमें से... Continue Reading →

शिशु , संगीत और माँ

वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →

क्या टूटा है भीतर भीतर (कृष्ण बिहारी)

© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard

Maa Behen (2026)

कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →

A Titan Story!

वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करोहौसले मुश्किलों में पलते हैं ~ महफूजुर्रहमान आदिल टाइटन जैसे भारतीय स्वदेशी ब्रांड की बड़ी सफलता की कहानी फिल्म या वैब सीरीज का विषय बने यह एक शानदार पहल है| किसी प्रोडक्ट को रिर्सर्च... Continue Reading →

महाश्वेता : एक सांवली नायिका की कथा

,,,[राकेश] पेंटिंग : सुधीर खस्तगीर

Dr. Ramu : जूनून का मतलब तो बहुत खोकर कुछ पाना है

किसी ने ग़म नहीं समझा हमारामुक़द्दर खा गया सपना हमारा ~ आफ़रीद कुरैशी बाबा ...[राकेश] फिल्म को नीचे दिए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है| https://play.pocketfilms.in/dr.ramu

Sunny Deol @Damini (1993)

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →

Miles to go Before I Sleep (Robert Frost)

पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →

तुम्हें याद हो कि न याद हो …

अभिनय अभिनेताओं के लिए ही आरक्षित रहना चाहिए !

...[राकेश] © https://youtu.be/F1Q3iqG8aqw?si=7n1leXgaY4h4sDUE https://youtu.be/YR44z8wxgVc?si=enmBIdjomUrss5IV https://youtu.be/ZtNDMYTnbxI?si=nYXN4iMBGvCJ5PyX https://youtu.be/0LWJZBmARUk?si=7VEw4tlBiH1y1yDz

सुरेन्द्र मोहन पाठक क्या वाकई गलती कर बैठे?

जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →

Maamla Legal hai (Season 2) : केस कमजोर है !

...[राकेश] मामला लीगल है https://cinemanthan.com/2024/03/02/maamla-legal-hai2024/

पुल पार करना खाई, नदी, समंदर पार करना ही होता है !

पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →

जीवन और मृत्यु !

...[राकेश] पेंटिंग : Death and Life (Gustav Klimt)

लवर्स (निर्मल वर्मा) : दोस्ती में एक अंतर्मुखी का प्रेम प्रस्ताव

...[राकेश]

जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)

...[राकेश]

नो बॉस नो … (कृष्ण बिहारी)

© ~ कृष्ण बिहारी

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