...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|
...[राकेश] © First published on Passionforcinema.com (January 18, 2007 at 6.22 a.m.)
राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद ~ गुलजार दिल्ली के दिल के कुछ घाव ऐसे हैं जिन्होंने नासूर बनकर पूरे देश को प्रभावित किया| गीता और संजय चोपड़ा हत्याकांड और निर्भया कांड भी उनमें से... Continue Reading →
वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →
© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard
कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करोहौसले मुश्किलों में पलते हैं ~ महफूजुर्रहमान आदिल टाइटन जैसे भारतीय स्वदेशी ब्रांड की बड़ी सफलता की कहानी फिल्म या वैब सीरीज का विषय बने यह एक शानदार पहल है| किसी प्रोडक्ट को रिर्सर्च... Continue Reading →
किसी ने ग़म नहीं समझा हमारामुक़द्दर खा गया सपना हमारा ~ आफ़रीद कुरैशी बाबा ...[राकेश] फिल्म को नीचे दिए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है| https://play.pocketfilms.in/dr.ramu
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →
पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →
जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →
...[राकेश] मामला लीगल है https://cinemanthan.com/2024/03/02/maamla-legal-hai2024/
पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →
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