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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Music

तेरे जैसा कोई देखा (प्यार की मंजिल)

किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन... Continue Reading →

1959 के सिनेप्रेमियों के रोचक प्रश्न !

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

सुगम संगीत

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

भारतीय संगीत की बाधित राहें : नौशाद

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

फिल्मों में नृत्य – अभिनेत्री संध्या की दृष्टि में

साभार - फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

संगीतरहित फ़िल्में : पंकज मलिक के विचार !

साभार : फिल्म संगीत, दिसम्बर 1959

तलत महमूद का एक संस्मरण (1959)

साभार : फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)

जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)

...[राकेश]

चैन से हमको कभी (प्राण जाए पर वचन न जाए 1974)

अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ परकब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते ~ जौन एलिया जौन एलिया के उपरोक्त्त शेर में इस गीत की नायिका की दिल की हालत छिपी हुयी है| यह... Continue Reading →

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा (दिल एक मंदिर 1963)

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते न मिलन की बेलाआज चांदनी की नगरी में अरमानों का मेलारुक जा रात ...पहले मिलन की यादें लेकर आई है ये रात सुहानीदोहराते हैं चाँद सितारे मेरी तुम्हारी प्रेम कहानीमेरी तुम्हारी प्रेम... Continue Reading →

एक बार ज़रा फिर कह दो (बिन बदल बरसात 1963)

...[राकेश]

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

कुंदनलाल सहगल … फिल्मों में पदार्पण

राघव मेनन , Published in सारिका 1981

Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग

होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →

लता मंगेशकर : स्मरण

ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है ~ बशीर बद्र

मीना कुमारी की दौड़ !

मधुलिका कुमारी थी, सुंदरी थी। कौशेय वसन उसके शरीर पर इधर-उधर लहराता हुआ स्वयं शोभित हो रहा था। वह कभी उसे संभालती और कभी अपनी रूखी अलकों को। कृषक बालिका के शुभ्र भाल पर श्रमकणों की भी कमी न थी,... Continue Reading →

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं (सनी 1984) : धर्मेन्द्र फैक्टर

और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैंलोग मिलते हैं, जुदा होते हैं कब बिछड़ जाए, हमसफ़र ही तो हैकब बदल जाए, एक नज़र ही तो हैजान-ओ-दिल जिसपे फ़िदा होते हैं और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं जब रुला लेते हैं जी भर के... Continue Reading →

तुम्हारा इंतज़ार है तुम पुकार लो : Khamoshi(1969)

...[राकेश]

Sulakshana Pandit : चेहरा है या फूल खिला है!

हिंदी सिनेमा में तीन ऐसे खुशनुमा चेहरों वाली अभिनेत्रियाँ रही हैं जिनके चेहरों पर उदासी कभी भी फ़बी नहीं और उनके उदास चेहरे देख दर्शक भी बैचेनी महसूस करने लगते हैं कि ये स्त्रियाँ हंस क्यों नहीं रहीं? क्योंकि उनकी... Continue Reading →

कुमार गन्धर्व : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

कुमार गन्धर्व का गायन सुनते हुए ... (सर्वेश्वरदयाल सक्सेना) https://youtu.be/fls_YUpVbvs?si=_24Cccm7-bf9Ltly

चल अकेला, चल अकेला … मुकेश

जोड़ी तोर डाक शुने केऊ ना एशे तोबे एकला चोलो रे। तोबे एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो रे। (रविन्द्रनाथ टैगोर) चल अकेला, चल अकेला, चल अकेलातेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको... Continue Reading →

राजेश खन्ना : नूरजहाँ और एक प्रेम कहानी

राजेश खन्ना ने बहारों के सपने (1967) से लेकर अनुरोध (1977) के बीच के दस सालों में तकरीबन दो दर्जन हिन्दी फिल्मों में हिन्दी सिनेमा के बेहद अच्छे रोमांटिक दृश्य सिनेमा के परदे पर जीवंत किये, वे संवाद से भरे... Continue Reading →

धीरज कुमार – का करूँ सजनी आये न बालम

अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, लेखक एवं गीतकार मनोज कुमार के दूर के रिश्ते के भाई धीरज कुमार को हिंदी सिने-संसार में एक अभिनेता के रूप में याद करना चाहें तो थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है| सिने दर्शक उन्हें जानते पहचानते... Continue Reading →

Shailendra A Love Lyric in Print : A Daughter Remembers

असमय मात्र 43 साल की आयु में मृत्यु हो जाने से या उनके द्वारा रचे गए उच्च गुणवत्ता के गीतों की उपस्थिति से, कारण जो भी रहा हो, गीतकार शैलेन्द्र को हिंदी फिल्मों के संगीत के रसिक लोग फ़िल्म बरसात... Continue Reading →

मल्लिकार्जुन मंसूर

पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर (1910-1992) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के जयपुर-अतरौली घराने के प्रमुख प्रतिनिधियों में से एक थे| पंडित जी की गायकी ने ख्याल गायन शैली की गहरी समझ, जटिल तानों, और भावनात्मक प्रस्तुति के साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में अपनी... Continue Reading →

निर्मला देवी -ओशो-गोविंदा -शास्त्रीय संगीत

पुस्तकें पढने के साथ संगीत सुनना भी ओशो की पसंदीदा रुचियों में से एक रहा| बचपन में कई साल उन्होंने स्वंय बांसुरीवादन किया, लेकिन अपने एक प्रिय मित्र के नदी में डूब जाने के बाद उन्होंने बांसुरी को भी नदी... Continue Reading →

Call of The Valley (1967) : एक चरवाहे की दैनन्दिनी

© ...[राकेश]

राज कपूर : श्रेष्ठ फ़िल्मी गीतों के निर्देशक

राज कपूर की फिल्मों के गीत विशाल जनसमूह के ह्रदय को छूने वाले गीत रहे हैं| महासागर जैसे उनके संगीत संसार से 2-3 झलकियाँ भी देख ली जाएँ तो उनकी फिल्मों के संगीत संसार से परिचित होने के लिए वे ही... Continue Reading →

भीगा भीगा मौसम आया

हिंदी सिनेमा में नायक-नायिका की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेताओं की प्रसिद्द जोड़ियों में मिठुन चक्रवर्ती और रंजीता कौर की जोड़ी भी रही है, जिन्होंने अपने फिल्मी जीवन के शुरुआती दौर में बहुत सी फ़िल्में एक साथ कीं| यह कहना भी... Continue Reading →

जाने वाले सिपाही से पूछो (उसने कहा था 1960) – गीतकार शैलेन्द्र या मख़दूम?

बिमल रॉय निर्मित और मोनी भट्टाचार्जी निर्देशित फ़िल्म - उसने कहा था, हिंदी के लेखक चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' की एकमात्र उपलब्ध कहानी - उसने कहा था, पर आधारित है| सलिल चौधरी के मधुर एवं आकर्षक संगीत से सजी इस फ़िल्म... Continue Reading →

ऐसा समां न होता – ज़मीन आसमान (1984)

फिल्म ज़मीन आसमान (1984) में संजय दत्त और अनीता राज पर फिल्माया गीत "ऐसा समां न होता, कुछ भी यहाँ न होता, मेरे हमराही जो तुम न होते" से है, अस्सी के दशक में पंचम द्वारा संगीतबद्ध उन बेहतरीन गीतों... Continue Reading →

होली की बहारें

भारतीय संस्कृति ने सदा जनमानस में कविता, दर्शन और गायकी द्वारा रंग, उमंग और उल्लासमयी जीवन भरे हैं। अनेकता में एकता के नूर की यह शहदीय बूँद बंटवारे की राजनीति की एंटीडोट है। भारत की मिश्रित संस्कृति के सुनहरे आकाश... Continue Reading →

बेग़म अख्तर : मेहर बाबा के दरबार में

7 अक्तूबर 1914 को जन्मीं अख्तरी बाई फैजाबादी 13 वर्ष की आयु की ही थीं जब एक कामांध धनपशु ने उन्हें यौनहिंसा का शिकार बनाया| उस दुर्घटना के फलस्वरूप उत्पन्न कन्या को बहुत सालों तक अख्तरी बाई की छोटी बहन... Continue Reading →

उस्ताद “बाबा” अलाउद्दीन खान : ओशो

प. रविशंकर ने अपने गुरु की बेटी से विवाह किया|वह तो और भी अपरंपरागत हो गया। इसका मतलब यह है कि वर्षों तक उन्‍होंने इस बात को अपने गुरु से छिपाया। जैसे ही गुरु को इस बात का पता चला वैसे... Continue Reading →

Guide(1965) : कुछ गीत और विजय आनंद (1)

कवि शैलेन्द्र सा महान गीतकार हो, सचिन देव बर्मन जैसा महान संगीतकार, जिसके गीतों की मिठास की प्रतियोगिता में उँगलियों पर गिने जा सकने वाले संगीतकार ही रहे हैं, साथ हो, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, जैसे महानतम गायक और एक एक गीत से फ़िल्म के संगीत... Continue Reading →

जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली (1971): गीत

वी. शांताराम निस्संदेह दृश्यात्मक कल्पना के बेहद उच्च कोटि के सिनेमाई शिल्पी थे| वी.शांताराम की फ़िल्में, अभिनय और संवाद के लिए नहीं बल्कि उनके द्वारा प्रस्तुत दृश्यात्मक कल्पनाओं के लिए हमेशा सराही जायेंगी| एक आम दर्शक या फ़िल्म समीक्षक उनकी फिल्मों पर... Continue Reading →

पंख होते तो उड़ आती रे : सेहरा (1963)

वी. शांताराम, हिन्दी और मराठी सिनेमा के बहुत बड़े निर्माता, निर्देशक, प्रसिद्द फ़िल्म निर्माण कम्पनी - राजकमल कलामंदिर के स्थापक ही नहीं बल्कि सिनेमा में भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करने वाले अद्भुत कल्पनाशीलता के स्वामी निर्देशक और आपदा में नई विधियां खोज... Continue Reading →

ये कौन चित्रकार है : बूँद जो बन गई मोती (1967)

प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किताबों से पढ़कर बच्चे नहीं समझ सकते, लाख अध्यापक अच्छा हो लेकिन अगर बच्चों ने सुबह की बेला में सूर्योदय की हल्की से गहरी होती लालिमा से नारंगी होते जाते आकाश को अपनी आँखों से नहीं... Continue Reading →

आयी ऋतु सावन की : (Alaap 1977)

आई ऋतु सावन की पिया मोरा जाये रे आई ऋतु सावन की। बैरन बिजुरी चमकन लागी बदरी ताना मारे रे, ऐसे में कोई जाए पिया, ऐसे में कोई जाए पिया. तू रूठो क्यों जाये रे, आई ऋतु सावन की। तुम... Continue Reading →

मिले दो बदन : Blackmail 1973

विजय आनंद ने एक निर्देशक के तौर पर अद्भुत गीतों को सिनेमा के परदे पर जन्माया है| विजय आनंद ने शुरू की नौ फ़िल्मों में से एक तीसरी मंजिल को छोड़कर शेष 8 फ़िल्में देव आनंद को नायक बनाकर ही बनाई थीं| तीसरी मंजिल भी निर्माता नासिर हुसैन और निर्देशक विजय... Continue Reading →

मुझे जां न कहो : (अनुभव 1972)

मेरी जां, मुझे जां न कहो मेरी जाँ बरसात की एक रात का गीत है| बरसात के मौसम में अलग अलग सुबह, दिन, शाम और रात की बरसात, बरसात से सम्बंधित किसी न किसी फ़िल्मी गीत की याद दिलाती ही है|... Continue Reading →

वफ़ा जो न की तो (मुकद्दर का सिकंदर 1978)

सिनेमा के परदे पर अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी का अर्थ ही परदे पर बिजली का करेंट दौड़ना रहा है| एक समय था जब अमिताभ बच्चन अपने चरित्रों में कॉमेडी की भरपूर डोज़ दर्शकों को दिया करते थे और उस दौर की फिल्मों में अगर रेखा उनकी... Continue Reading →

मंजिलें अपनी जगह हैं (शराबी 1984)

किशोर कुमार ने एक शानदार आवाज के धनी अभिनेता अमिताभ बच्चन के लिए गाने गाना फ़िल्म संजोग (1971) में गाये गीत - रूप ये तेरा किसने बनाया, से आरम्भ कर दिया था| लेकिन इस जोड़ी को पहली प्रसिद्धि मिली बॉम्बे टू गोवा के ऊर्जा भरे गीत - देखा न... Continue Reading →

बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया (Omkara 2006)

अच्छा फ़िल्मी गीत लिखना क्रिकेट की भाषा में ऐसा है कि ऐसा बल्लेबाज हो जो हर तरह की गेंद पर टीम की आवश्यकता के अनुसार रन बना सके| फ़िल्मी गीत महज कविता नहीं होती, और न वह कविता की तरह... Continue Reading →

फ़िल्मी गीतों के लेखन का स्तर

किसी को फिल्मों में गीतकार बनना हो तो वह शैलेन्द्र के ऊपर दिए गीत - हम तुझसे मोहब्बत करके सनम, जैसे गीत सुन कर प्रेरणा ले पायेगा, अपना शब्दकोश, भाव-कोश, और पद्य-संरचना की गुणवत्ता बढ़ा पायेगा या ऐसा वह अमिताभ... Continue Reading →

मेरे पास आओ (ये गुलिस्तां हमारा 1972)

मूलतः अभिनय के लिए जाने जाते डैनी की गायन प्रतिभा को भी सराहना मिलती रही है| फिल्म- काला सोना, में आशा भोसले संग गाया उनका गीत "सुन सुन कसम से" खासा चर्चित रहा है, इसे डैनी ने पर्दे पर खुद... Continue Reading →

Rebellious Gulzar : Thok de Killi (Raavan)

...[Rakesh]

लता मंगेशकर एवं भगत सिंह

https://www.youtube.com/watch?v=BUK8fS1C_vM

DevAnand@101 : लता मंगेशकर गीत देव आनंद के लिए

लता मंगेशकर ने गायन में अपनी एक अधूरी रह गई इच्छा के बारे में कहा था कि वे दिलीप कुमार के लिए गीत नहीं गा पायीं और यह संभव भी नहीं था क्योंकि कई अन्य अभिनेताओं की तरह दिलीप कुमार... Continue Reading →

अंखियों के झरोखों से मैंने देखा जो सांवरे…

राजश्री प्रोडक्शन हाउस के अंतर्गत निर्माता ताराचंद बड़जात्या द्वारा निर्मित एवं हिरेन नाग द्वारा निर्देशित फ़िल्म, अंखियों के झरोखों से, मोटे तौर पर  Erich Segal के 1970 में प्रकाशित बहुचर्चित लघु उपन्यास Love Story, जिस पर हॉलीवुड में इसी नाम... Continue Reading →

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