निर्देशक Quentin Tarantino की फ़िल्म Kill Bill के दोनों भाग, एक के तुरंत बाद दूसरा, देखने के लिए दर्शक के पास अगर लगभग 4 घंटे और 10 मिनट न हों, तो इसे तभी देखने का प्रयास करना चाहिए जब इतना... Continue Reading →
भारत के सन्दर्भ में बरसात, उसमें भी ग्रामीण भारत के सन्दर्भ में बरसात के गीतों में भारत और रूस (सोवियत संघ) के संयुक्त उपक्रम से सन 1957 में बनी फ़िल्म - परदेसी, जिसका भारतीय संस्करण ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा... Continue Reading →
परदे पर जिसे किशोरावस्था से युवा होने के काल के बीच का नायक कहा जा सके वे ऋषि कपूर पहले ही थे हिंदी सिनेमा में| उनसे पहले के जितने भी अभिनेताओं ने नायक के रूप में अपनी पारी शुरू की वे... Continue Reading →
मानव जाति का इतिहास गवाह है कि अच्छाई और बुराई एक साथ नहीं रह सकते, स्वतंत्रता और साम्राज्यवाद एक साथ नहीं रह सकते, अच्छी और बुराइयों से ग्रस्त सभ्यताओं में टकराव अवश्यंभावी है, इसे न कभी कोई टाल सका है... Continue Reading →
Hollywood की बगिया में मूलतः एक्शन स्टार Sylvester Stallone को एक कायदे का अभिनेता होने का सम्मान दिलवाने वाली फिल्मों की दो सीरीज में से एक है 5 फिल्मों वाली Rambo सीरीज, इसमें भी पहली फ़िल्म First Blood का एक अलग ही महत्त्व है| युद्ध सैनिक और... Continue Reading →
बहुत प्यार पाया बहुत प्यार खोया बहुत मुस्कराया बहुत बार रोया मगर ज़िंदगी से शिकायत नहीं की। जिसे चाहता था वही खो गया किसी और का वो कहीं हो गया मगर एक बिरवा मुझे दे गया आकाश पीड़ा का... Continue Reading →
इससे पहले कि, भूखे–नंगे, आसमान से बगावत कर बैठते, उलट जाते मठाधीशों के सिंहासन, जिल्लेसुभानी बनने वालों के ताज नोंच दिए जाते, इससे पहले कि बराबरी का हक मांगने के लिए लहू पसीने की अंतिम क्रांति उठ खड़ी होती, पोथियों–उपदेशों-बाजों... Continue Reading →
तुमने कभी देखा ओस की बूंद को फूल पे? एक छोटी सी बूँद … बहुत नाज़ुक लेकिन कितनी जीवंत! सारे रंग अपने में समेटे, फूल के आगोश में लिपटी ‘बूँद’ रात भर सपना देखती है… सुबह का, सुबह के ताजगी... Continue Reading →
1991 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के काल में देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट आ गया था और यह चार माह के लिए प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर और उनकी सरकार के कारण तो आया नहीं था, यह पहले की सरकारों की... Continue Reading →
वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र राव जी ने बेहतरीन प्रेम कहानियाँ लिखी हैं और साहित्यिक पत्रिका - निकट (अंक 45) में उनकी लिखी एक प्रेम कहानी - एक खूबसूरत मोड़ , छपी है| कहानी स्त्री मन की परतों और पुरुष मन की... Continue Reading →
"यारों के यार", लेखिका कृष्णा सोबती की एक लंबी कहानी है जो दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर के अंदरूनी माहौल को दर्शाती है। इस कहानी को कृष्णा सोबती का सरकारी दफ्तरनामा कहा जा सकता है| यह नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पद-प्रतिष्ठा की... Continue Reading →
Ginny Weds Sunny (2020), 14 Phere (2021) के बाद बहुत अरसे तक विक्रांत मैसी डार्क विषयों वाली फिल्मों में ही दिखाई देते रहे हैं और जिनमें कई में उन्होंने ऋणात्मक भूमिकाएं भी कीं उस लिहाज से एक पूरी तरह रोमांटिक... Continue Reading →
समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं... Continue Reading →
नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुयी इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म - मैं वापिस आऊँगा, के एक सिक्वेंस में 1947 में नायक (वेदांग रैना) अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ पाकिस्तान से ट्रेन में लद कर भारत पहुँचता है तो अमृतसर... Continue Reading →
किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन... Continue Reading →
वह जो बंगला है नासामनेमेडिकल कॉलेज के एकडॉक्टर का हैवहाँ जो भीड़ हैवह पागलों की हैबीमारों की हैमरीजों के साथ साथ उनके परिजन भीबीमार हो गये हैं।पागलों का इलाज करते करतेडॉक्टर भी हो गया है पागल पैसे के पीछे। (~... Continue Reading →
साभार - सत्यकुमारी , सारिका , फरवरी 1985
साभार : फिल्म संगीत (दिसंबर 1959)
...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|
...[राकेश] © First published on Passionforcinema.com (January 18, 2007 at 6.22 a.m.)
राख को भी कुरेद कर देखोअभी जलता हो कोई पल शायद ~ गुलजार दिल्ली के दिल के कुछ घाव ऐसे हैं जिन्होंने नासूर बनकर पूरे देश को प्रभावित किया| गीता और संजय चोपड़ा हत्याकांड और निर्भया कांड भी उनमें से... Continue Reading →
वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना की एक प्रसिद्ध कविता है - शिशु शिशु लोरी के शब्द नहींसंगीत समझता है,बाद में सीखेगा भाषाअभी वह अर्थ समझता है । समझता है सबकी भाषासभी के अल्ले ले ले ले,तुम्हारे वेद पुराण कुरानअभी वह व्यर्थ... Continue Reading →
© कृष्ण बिहारी पेंटिंग : Pierre Bonnard
कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करोहौसले मुश्किलों में पलते हैं ~ महफूजुर्रहमान आदिल टाइटन जैसे भारतीय स्वदेशी ब्रांड की बड़ी सफलता की कहानी फिल्म या वैब सीरीज का विषय बने यह एक शानदार पहल है| किसी प्रोडक्ट को रिर्सर्च... Continue Reading →
किसी ने ग़म नहीं समझा हमारामुक़द्दर खा गया सपना हमारा ~ आफ़रीद कुरैशी बाबा ...[राकेश] फिल्म को नीचे दिए लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है| https://play.pocketfilms.in/dr.ramu
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →
पंडित नेहरु ने अपनी जीवनी में Robert Frost की कविता के अंतिम पद्यांश को उद्घृत किया तो यह कविता भारत में ख्याति पा गयी| डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के उपरोक्त्त पद्यांश का हिन्दी में खूबसूरत... Continue Reading →
जासूसी, रहस्य रोमांच से भरी किताबें लिखने वाले सभी लेखक, अपनी कहानियों और उपन्यासों में इस दावे को अवश्य ही दर्ज करते हैं कि "कातिल कितना ही होशियार क्यों न हो, हत्या करते हुए कितनी भी सावधानी क्यों न बरते,... Continue Reading →
...[राकेश] मामला लीगल है https://cinemanthan.com/2024/03/02/maamla-legal-hai2024/
पुल पार करने सेपुल पार होता है नदी पार नहीं होतीनदी पार नहीं होती नदी में धँसे बिना नदी में धँसे बिनापुल का अर्थ भी समझ में नहीं आता नदी में धँसे बिनापुल पार करने से पुल पार नहीं होतासिर्फ़... Continue Reading →
Recent Comments