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Jagjit Singh

Mr Singh Mrs Mehta (2010): Nudity or Nakedness?

विवाहेत्तर संबंधों के कैनवास पर उभरते, बनते, बिगड़ते और फिर से कोई नया आकार लेते चित्रों की गाथा कह सकते हैं निर्देशक प्रवेश भारद्वाज की पहली फिल्म को। कभी सधे हुये ढ़ंग से भरे हुये रंग दिखायी देते हैं इस... Continue Reading →

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Raavan (1984) : रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़

तेरे इश्क की एक बूँद इसमें मिल गयी थी इसलिये मैंने उम्र की सारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम) एक तो इश्क वह है जो किसी से कोई दूसरा करता है। जिसे यह इश्क मिलता है वह परिवर्तित तो... Continue Reading →

ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है (Aaj-1990):संगीतकार जगजीत सिंह

जीवन में यदि कुछ स्थायी है तो वह है निरंतर होने वाला परिवर्तन। हर पल कुछ नया हो रहा है। खुशी को स्थायी भाव बनाना चाहता है मनुष्य और दुख को जल्दी से जाने वाला भाव। पर समय कभी एक... Continue Reading →

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी, बचपन और वो जगजीत सिंह: कौन भूला है यहाँ कोई न भूलेगा यहाँ

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलते हैं (बशीर बद्र) बीसवी सदी के सातवें और आठवें दशक में जन्मने वाली पीढ़ियों के भारतीयों के लिये जगजीत सिंह वही सितारे थे जो उनके साथ... Continue Reading →

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