Ginny Weds Sunny (2020), 14 Phere (2021) के बाद बहुत अरसे तक विक्रांत मैसी डार्क विषयों वाली फिल्मों में ही दिखाई देते रहे हैं और जिनमें कई में उन्होंने ऋणात्मक भूमिकाएं भी कीं उस लिहाज से एक पूरी तरह रोमांटिक... Continue Reading →
नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुयी इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म - मैं वापिस आऊँगा, के एक सिक्वेंस में 1947 में नायक (वेदांग रैना) अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ पाकिस्तान से ट्रेन में लद कर भारत पहुँचता है तो अमृतसर... Continue Reading →
कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →
...[राकेश] मामला लीगल है https://cinemanthan.com/2024/03/02/maamla-legal-hai2024/
ओटीटी मंचों पर देखने लायक कोई हल्की फुल्की फिल्म खोजी जा रही हो या ऐसी कोई फिल्म एकाएक सामने आ जाए तो ऐसी फिल्मों के वर्ग में लेखक, निर्देशक और निर्माता लव रंजन का नाम अपनी विश्वसनीयता कायम कर चुका... Continue Reading →
नवोदित निर्देशक के तौर पर आर्यन खान ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है| उनकी वेब सीरीज की सामग्री को देखा जाए तो भाषा के स्तर पर वह कुछ वर्षों पूर्व AIB के एक कुख्यात कार्यक्रम जैसी है, जिसे अंततः... Continue Reading →
दुखांत न भी हों लेकिन दुःख भरे मार्गों से गुजरने वाली प्रेम कहानियों पर आधारित महत्वपूर्ण हिन्दी फ़िल्में हर दशक में 2-3 के औसत से बनती ही आ रही हैं| कभी लता मंगेशकर के आयेगा आने वाला गीत (महल) को... Continue Reading →
हृषिकेश मुकर्जी द्वारा निर्देशित बावर्ची और बुड्ढा मिल गया जैसी फिल्मों को देखें तो दोनों में एक केन्द्रीय चरित्र है, जिसके बारे में उसके संपर्क में आने वाले अन्य चरित्र संदेह में रहते हैं कि जैसा यह व्यक्ति उनको दिखाई... Continue Reading →
निर्देशक सार्थक दासगुप्ता की फ़िल्म - Music Teacher के पास, एक कहानी है, जिसे उन्होंने स्वंय ही लिखा है, और उसके भावों को विस्तार और गहराई से दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अच्छे अभिनेता, शानदार कैमरा निर्देशक एवं स्वंय का... Continue Reading →
अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिलहम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया जिगर मुरादाबादी का उपरोक्त शेर रॉ अधिकारी हिम्मत सिंह के चरित्र पर बखूबी फबता है| हिम्मत सिंह की शख्सियत मिथकीय गुणों वाली है| उनके गुण, उनका... Continue Reading →
किसी फिल्मकार से कहा जाए कि ये जो वर्तमान के भोजपुरी गीतों में अश्लीलता की बातें चल रही है उनमें से किसी जीवित, सक्रिय और प्रसिद्द गायक - गायिका पर एक बायोपिक बना दो तो उसके पसीने छूट जायेंगे क्योंकि श्लील और... Continue Reading →
आज फिर शुरू हुआ जीवन आज मैंने एक छोटी-सी सरल-सी कविता पढ़ी आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया आज एक छोटी-सी बच्ची आई, किलक मेरे कन्धे चढ़ी आज मैंने... Continue Reading →
David Fincher की फ़िल्म - Panic Room, दर्ऊशक को लगातार तनाव में रखने वाला थ्रिलर है, जो एक स्त्री चरित्र के साहस, मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखकर उसकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक दृढ निश्चय कि वह अपनी... Continue Reading →
David Fincher की यह फ़िल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर के रूप में फ़िल्म शानदार है| फ़िल्म निर्माण के दौरान अभिनेतागण निर्देशक के हाथ की कठपुतलियां होते हैं तो यह फ़िल्म दर्शाती है कि फ़िल्म बनकर प्रदर्शित होने के बाद, एक बहुत अच्छी... Continue Reading →
The Killer को David Fincher द्वारा Organized Crime के संसार पर प्रस्तुत एक श्वेत पत्र माना जा सकता है| एक तो फ़िल्म अपराध के इस संसार को एक सफल कॉर्पोरेट की तरह संगठित एवं संयोजित रूप से कार्यान्वित दिखाती है,... Continue Reading →
हिंदी फिल्मों में ही ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जहां किसी चरित्र का चित्रण समाज के लिए घातक लगेगा लेकिन फ़िल्में आती हैं चली जाती हैं, समाज अपनी मंथर गति से बदलाव देख,समझ, स्वीकार करके बढ़ता रहता है| आखिरकार तो सिनेमा... Continue Reading →
एक रोचक युवेत्तर फ़िल्म के लिए निर्देशक अर्जुन वारायण सिंह बधाई के पात्र हैं| यह और भी सुखद है देखना कि यह उनकी पहली ही फ़ीचर फ़िल्म है| आगाज़ तो उनका शानदार हुआ है| ...[राकेश]
दुनिया की निगाह में एक युवा स्त्री तभी माँ के रूप में दिखाई देती है जब वह एक नवजात शिशु के साथ एक फ्रेम में साथ दिखाई दे| मानसिक तौर पर जब स्त्री तैयार हो जाती है मातृत्व की ओर... Continue Reading →
पिछली सदी के सत्तर के दशक में बी आर चोपड़ा ने एक बेहतरीन मर्डर मिस्ट्री बनाई थी – धुंध, जिसमें अपने पति के खून का आरोप है रानी (जीनत अमान) पर| २०१३ में फ़िल्म आई क्वीन, जिसकी दिल्ली वासी... Continue Reading →
दक्षता, किसी भी क्षेत्र में हासिल की जाये, मुक्ति प्रदान करती ही करती है, नयी संभावनाओं के द्वार खोलती है, उड़ान भरने के लिए प्रेरित करती है| परिवर्तन लाने के लिए अवसर का होना भी आवश्यक है| अगर जेसिका (Amy... Continue Reading →
इंसान सिर्फ आनंद दायक वस्तुओं या घटनाओं में ही अटक कर नहीं रह जाता, बहुत बार तो जीवन में घटित ऋणात्मक भी जीवन को ऐसे घेरे में बाँध लेता है कि पीड़ित व्यक्ति बाकी सारी उम्र सिर्फ उस ऋणात्मक घटना... Continue Reading →
सीमा भार्गव (अब पाहवा) ने “बड़की” के चरित्र में जिस क्रांतिकारी धारावाहिक “हम लोग” में काम किया, उसके पीछे भारत के हिन्दी के एक बहुत बड़े लेखक मनोहर श्याम जोशी की विद्वता, समाज शास्त्र और विशेषकर भारतीय समाज की विशद... Continue Reading →
लघु फ़िल्म Juice (2017) के बाद निर्देशक - लेखक नीरज घायवान दर्शकों को सोचने विचारने के लिए प्रेरित करती हुई एक और स्त्री केन्द्रित फ़िल्म – गीली पुच्ची, लेकर आये हैं| ...[राकेश] ©
अमीर घराने की लड़की का घरेलू सहायक, ड्राइवर, चौकीदार आदि लड़के के साथ प्रेम दर्शाती फ़िल्में दिखाई दे जाएंगी| राजे रजवाड़ों के काल में राजा या राजकुमार का दासी संग प्रेम भी किस्से कहानियों का हिस्सा रहा है| राजा द्वारा... Continue Reading →
श्रंखला के दूसरे सीज़न में उपस्थित कमजोरियों में सबसे बड़ी कमजोरी हर षड्यंत्र का सूत्रधार गुरुजी को दिखाना ही है| कथा का सारा वज़न इस कोण पर गिर जाता है| दुनिया में बहुत से षड्यंत्रकारी सिद्धान्त चलते रहते हैं| इनमें... Continue Reading →
सिख धर्म का अपमान करना तो श्रंखला के लेखकों, निर्देशकों और प्रस्तोता का आशय बिलकुल भी नहीं रहा होगा पर उन्होने अतार्किक गलती अवश्य की या उनसे ऐसी अतार्किक गलती अवश्य ही हुयी या हो गई| इस पर आने से... Continue Reading →
किसी भी फ़िल्म में बड़े और महत्वपूर्ण चरित्रों को पा जाने वाले अभिनेताओं में अपने आप एक ऊर्जा भर जाती है और हर काबिल अभिनेता उसका लाभ उठाता है| पर अकसर ही कम महत्व वाले या छोटे काल के लिए... Continue Reading →
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