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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Musafir Cafe (2026) : विवाह और प्रेम की गलियों में भटकते लोग!

Ginny Weds Sunny (2020), 14 Phere (2021) के बाद बहुत अरसे तक विक्रांत मैसी डार्क विषयों वाली फिल्मों में ही दिखाई देते रहे हैं और जिनमें कई में उन्होंने ऋणात्मक भूमिकाएं भी कीं उस लिहाज से एक पूरी तरह रोमांटिक... Continue Reading →

मैं वापस आऊंगा (2026): क्या फ़िल्म ने गलत दिखाया?

नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित हुयी इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म - मैं वापिस आऊँगा, के एक सिक्वेंस में 1947 में नायक (वेदांग रैना) अपने परिवार के पुरुष सदस्यों के साथ पाकिस्तान से ट्रेन में लद कर भारत पहुँचता है तो अमृतसर... Continue Reading →

Maa Behen (2026)

कौन बदन से आगे देखे औरत कोसब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में ~ हमीदा शाहीन अभिनेत्री रेखा ने एक उद्योगपति से सहसा विवाह कर लिया और कुछ समय के बाद उस उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली तो उद्योगपति... Continue Reading →

Maamla Legal hai (Season 2) : केस कमजोर है !

...[राकेश] मामला लीगल है https://cinemanthan.com/2024/03/02/maamla-legal-hai2024/

Baramulla (2025): अगर रूहें न होतीं तो क्या बात होती!

Uff Ye Siyappa (2025) : संवाद रहित हंगामा

ओटीटी मंचों पर देखने लायक कोई हल्की फुल्की फिल्म खोजी जा रही हो या ऐसी कोई फिल्म एकाएक सामने आ जाए तो ऐसी फिल्मों के वर्ग में लेखक, निर्देशक और निर्माता लव रंजन का नाम अपनी विश्वसनीयता कायम कर चुका... Continue Reading →

The Ba***ds of Bollywood (2025) : A Satirical Model

नवोदित निर्देशक के तौर पर आर्यन खान ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है| उनकी वेब सीरीज की सामग्री को देखा जाए तो भाषा के स्तर पर वह कुछ वर्षों पूर्व AIB के एक कुख्यात कार्यक्रम जैसी है, जिसे अंततः... Continue Reading →

Saiyaara (2025) : मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

दुखांत न भी हों लेकिन दुःख भरे मार्गों से गुजरने वाली प्रेम कहानियों पर आधारित महत्वपूर्ण हिन्दी फ़िल्में हर दशक में 2-3 के औसत से बनती ही आ रही हैं| कभी लता मंगेशकर के आयेगा आने वाला गीत (महल) को... Continue Reading →

Maareesan(2025): Thrill के बोझ तले दबा Romanticism

हृषिकेश मुकर्जी द्वारा निर्देशित बावर्ची और बुड्ढा मिल गया जैसी फिल्मों को देखें तो दोनों में एक केन्द्रीय चरित्र है, जिसके बारे में उसके संपर्क में आने वाले अन्य चरित्र संदेह में रहते हैं कि जैसा यह व्यक्ति उनको दिखाई... Continue Reading →

Music Teacher (2019) : देवदास सिंड्रोम

निर्देशक सार्थक दासगुप्ता की फ़िल्म - Music Teacher के पास, एक कहानी है, जिसे उन्होंने स्वंय ही लिखा है, और उसके भावों को विस्तार और गहराई से दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अच्छे अभिनेता, शानदार कैमरा निर्देशक एवं स्वंय का... Continue Reading →

Special Ops (1-1.5-2) : हिम्मत है तो मुमकिन है!

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिलहम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया जिगर मुरादाबादी का उपरोक्त शेर रॉ अधिकारी हिम्मत सिंह के चरित्र पर बखूबी फबता है| हिम्मत सिंह की शख्सियत मिथकीय गुणों वाली है| उनके गुण, उनका... Continue Reading →

अमर सिंह चमकीला (2024) : मिसिंग लिंक्स

किसी फिल्मकार से कहा जाए कि ये जो वर्तमान के भोजपुरी गीतों में अश्लीलता की बातें चल रही है उनमें से किसी जीवित, सक्रिय और प्रसिद्द गायक - गायिका पर एक बायोपिक बना दो तो उसके पसीने छूट जायेंगे क्योंकि श्लील और... Continue Reading →

Meiyazhagan (2024) : भोलेपन में है वफ़ा की खुशबू

आज फिर शुरू हुआ जीवन आज मैंने एक छोटी-सी सरल-सी कविता पढ़ी आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया आज एक छोटी-सी बच्ची आई, किलक मेरे कन्धे चढ़ी आज मैंने... Continue Reading →

Panic Room (2002)

David Fincher  की फ़िल्म - Panic Room, दर्ऊशक को लगातार तनाव में रखने वाला थ्रिलर है, जो एक स्त्री चरित्र के साहस, मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखकर उसकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक दृढ निश्चय कि वह अपनी... Continue Reading →

Gone Girl (2014)

David Fincher की यह फ़िल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर के रूप में फ़िल्म शानदार है| फ़िल्म निर्माण के दौरान अभिनेतागण निर्देशक के हाथ की कठपुतलियां होते हैं तो यह फ़िल्म दर्शाती है कि फ़िल्म बनकर प्रदर्शित होने के बाद, एक बहुत अच्छी... Continue Reading →

The Killer (2023)

The Killer को David Fincher द्वारा Organized Crime के संसार पर प्रस्तुत एक श्वेत पत्र माना जा सकता है| एक तो फ़िल्म अपराध के इस संसार को एक सफल कॉर्पोरेट की तरह संगठित एवं संयोजित रूप से कार्यान्वित दिखाती है,... Continue Reading →

Merry Christmas (2024) : पिंजरे के पंछी तेरा दर्द न जाने कोय

  ...[राकेश]

Maamla Legal Hai(2024) : हंसने की अदालत जारी है

....[राकेश]

Animal(2023) : Alpha Male & Swanand Kirkire

हिंदी फिल्मों में ही ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जहां किसी चरित्र का चित्रण समाज के लिए घातक लगेगा लेकिन फ़िल्में आती हैं चली जाती हैं, समाज अपनी मंथर गति से बदलाव देख,समझ, स्वीकार करके बढ़ता रहता है| आखिरकार तो सिनेमा... Continue Reading →

Animal (2023) : जूता चाट दृश्य ::  Javed Akhtar

https://youtu.be/p071YCW3h8M?si=Z7CoEsiKhne_Yc74 https://youtu.be/TMKnnykdZXc?si=3rx3jjVD_9m4OcLH   https://youtu.be/YBOo4Vy0IKY?si=cfNUizmTeP6maBpd                        ...[राकेश]

Jaane Jaan (2023): Stratagem of a silent lover!

                      ...[राकेश]  

Kho Gaye Hum Kahan (2023) : नई पीढ़ी का तिलिस्म

एक रोचक युवेत्तर फ़िल्म के लिए निर्देशक अर्जुन वारायण सिंह बधाई के पात्र हैं| यह और भी सुखद है देखना कि यह उनकी पहली ही फ़ीचर फ़िल्म है| आगाज़ तो उनका शानदार हुआ है|                     ...[राकेश]    

Three of Us (2022): त्रिकाल की पहेलियाँ

इस फ़िल्म को हृषिकेश मुकर्जी की आनंद (Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल) पारिवारिक मित्र के घर बैठक का दृश्य शैफाली शाह के बेहतरीन अभिनय वाली लघु फ़िल्म Juice (Juice (2017) : क्वथनांक से बस एक डिग्री कम)... Continue Reading →

Mimi (2021) : शिशु के साथ ही नहीं जन्मती माँ…

दुनिया की निगाह में एक युवा स्त्री तभी माँ के रूप में दिखाई देती है जब वह एक नवजात शिशु के साथ एक फ्रेम में साथ दिखाई दे| मानसिक तौर पर जब स्त्री तैयार हो जाती है मातृत्व की ओर... Continue Reading →

Feels like Ishq (2021) : तीन रोचक तीन उबाऊ

Netflix पर प्रदर्शित 6 प्रेम कहानियों पर आधारित फिल्मों की वैब श्रंखला में तीन फ़िल्में, क्रमश: The Interview, Star Host, और Quaranteen Crush ही ऐसी हैं जिनके चरित्र जमीन पर पैर टिकाये लगते हैं जो विश्वसनीय लगते हैं और जो... Continue Reading →

 हंगामा है क्यों बरपा (Ray 2021) : आदतन चोर के घर आदतन चोर

सत्यजीत रे की चार कहानियों से प्रेरित चार फिल्मों के संग्रह में अभिषेक चौबे द्वारा निर्देशित “हंगामा है क्यों बरपा” ही एकमात्र आकर्षक फ़िल्म है जो रे की फिल्मों की टोन के साथ सुर मिला पायी है, बाकी तीनों फिल्मों... Continue Reading →

Haseen Dillruba (2021) : दिल्ली की ‘रानी’ के शोले ज्वालापुर में

  पिछली सदी के सत्तर के दशक में बी आर चोपड़ा ने एक बेहतरीन मर्डर मिस्ट्री बनाई थी – धुंध, जिसमें अपने पति के खून का आरोप है रानी (जीनत अमान) पर| २०१३ में फ़िल्म आई क्वीन, जिसकी दिल्ली वासी... Continue Reading →

Skater Girl (2021) : अवसर और परिवर्तन

दक्षता, किसी भी क्षेत्र में हासिल की जाये, मुक्ति प्रदान करती ही करती है, नयी संभावनाओं के द्वार खोलती है, उड़ान भरने के लिए प्रेरित करती है| परिवर्तन लाने के लिए अवसर का होना भी आवश्यक है| अगर जेसिका (Amy... Continue Reading →

Tribhanga (2021): Tedhi Medhi Crazy

इंसान सिर्फ आनंद दायक वस्तुओं या घटनाओं में ही अटक कर नहीं रह जाता, बहुत बार तो जीवन में घटित ऋणात्मक भी जीवन को ऐसे घेरे में बाँध लेता है कि पीड़ित व्यक्ति बाकी सारी उम्र सिर्फ उस ऋणात्मक घटना... Continue Reading →

Pagglait (2021) : आस्तिक की तेहरवीं, संध्या की मुक्ति

...[राकेश]

राम प्रसाद की तेहरवीं (2019) : कोई किसी का नहीं, ये झूठे नाते हैं नातों का क्या

सीमा भार्गव (अब पाहवा) ने “बड़की” के चरित्र में जिस क्रांतिकारी धारावाहिक “हम लोग” में काम किया, उसके पीछे भारत के हिन्दी के एक बहुत बड़े लेखक मनोहर श्याम जोशी की विद्वता, समाज शास्त्र और विशेषकर भारतीय समाज की विशद... Continue Reading →

Ankahi [Ajeeb Daastaans (2021)] : दिल ठहरा जहाज का पंछी

                                    ...[राकेश]

Geeli Pucchi [Ajeeb Daastaans (2021)] : अपनी परेशानियों और पूर्वाग्रहों से ग्रस्त लोगों की स्वहित साधने की बारीक चालें

लघु फ़िल्म Juice (2017) के बाद निर्देशक - लेखक नीरज घायवान दर्शकों को सोचने विचारने के लिए प्रेरित करती हुई एक और स्त्री केन्द्रित फ़िल्म – गीली पुच्ची, लेकर आये हैं| ...[राकेश] ©

‘Is love enough, SIR (2018)’ : संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान की नींव पर निर्मित होता प्रेम

अमीर घराने की लड़की का घरेलू सहायक, ड्राइवर, चौकीदार आदि लड़के के साथ प्रेम दर्शाती फ़िल्में दिखाई दे जाएंगी| राजे रजवाड़ों के काल में राजा या राजकुमार का दासी संग प्रेम भी किस्से कहानियों का हिस्सा रहा है| राजा द्वारा... Continue Reading →

Sacred Games (2018,2019) : खोजा परमाणु बम, निकला गुरुजी!

श्रंखला के दूसरे सीज़न में उपस्थित कमजोरियों में सबसे बड़ी कमजोरी हर षड्यंत्र का सूत्रधार गुरुजी को दिखाना ही है| कथा का सारा वज़न इस कोण पर गिर जाता है| दुनिया में बहुत से षड्यंत्रकारी सिद्धान्त चलते रहते हैं| इनमें... Continue Reading →

Sacred Games (2018,2019) : क्या श्रंखला सिख संप्रदाय का अपमान करती है?

सिख धर्म का अपमान करना तो श्रंखला के लेखकों, निर्देशकों और प्रस्तोता का आशय  बिलकुल भी नहीं रहा होगा पर उन्होने अतार्किक गलती अवश्य की या उनसे ऐसी अतार्किक गलती अवश्य ही हुयी या हो गई| इस पर आने से... Continue Reading →

Sacred Games (2018,2019) : दर्शक के भ्रम की आंच पर पकता खेल

किसी भी फ़िल्म में बड़े और महत्वपूर्ण चरित्रों को पा जाने वाले अभिनेताओं में अपने आप एक ऊर्जा भर जाती है और हर काबिल अभिनेता उसका लाभ उठाता है| पर अकसर ही कम महत्व वाले या छोटे काल के लिए... Continue Reading →

Juice (2017) : क्वथनांक से बस एक डिग्री कम

लघु फ़िल्म “जूस” अच्छे निर्देशन और अच्छे अभिनय से सजी हुई है| घरेलू माहौल में पार्टी के दौरान कमरों के सीमित स्पेस में असरदार तरीके से फ़िल्म को फिल्माया गया है| चरित्रों की क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं को बहुत कुशलता से... Continue Reading →

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