- ग्राम चिकिसालय 2026 : डॉक्टर को कर्तव्य याद दिलाती श्रंखला
- लेखक, निर्देशक से बड़ा होता है : गोविन्द निहलानी
- पुरस्कार तो दोनों किस्म की फिल्मों में मिले हैं : शबाना आज़मी
- राजेंद्र यादव, लोठार लुत्से और शानी की बातचीत !
- 1959 के सिनेप्रेमियों के रोचक प्रश्न !
- सुगम संगीत
- भारतीय संगीत की बाधित राहें : नौशाद
- फिल्मों में नृत्य – अभिनेत्री संध्या की दृष्टि में
- संगीतरहित फ़िल्में : पंकज मलिक के विचार !
- तलत महमूद का एक संस्मरण (1959)
- रोज़ / गैंग्रीन ( अज्ञेय ) : अप्रेम से रसहीन होता जाता जीवन!
- हीर राँझा (1970) : पद्यात्मक संवादों से सजी फ़िल्म
- Heer Raanjha (1970) : A Unique film in the verse
- Raakh (2026):
- शिशु , संगीत और माँ
- क्या टूटा है भीतर भीतर (कृष्ण बिहारी)
- Maa Behen (2026)
- A Titan Story!
- महाश्वेता : एक सांवली नायिका की कथा
- Dr. Ramu : जूनून का मतलब तो बहुत खोकर कुछ पाना है
- Sunny Deol @Damini (1993)
- Miles to go Before I Sleep (Robert Frost)
- तुम्हें याद हो कि न याद हो …
- अभिनय अभिनेताओं के लिए ही आरक्षित रहना चाहिए !
- सुरेन्द्र मोहन पाठक क्या वाकई गलती कर बैठे?
- Maamla Legal hai (Season 2) : केस कमजोर है !
- पुल पार करना खाई, नदी, समंदर पार करना ही होता है !
- जीवन और मृत्यु !
- लवर्स (निर्मल वर्मा) : दोस्ती में एक अंतर्मुखी का प्रेम प्रस्ताव
- जाने वो कैसे लोग थे (Pyaasa 1957)
- नो बॉस नो … (कृष्ण बिहारी)
- 15 अगस्त के बाद (शैलेन्द्र) : दृष्टा जन-कवि
- महेंद्र रज्जन : कहीं खो चुके लेखक का लापता साहित्य
- चैन से हमको कभी (प्राण जाए पर वचन न जाए 1974)
- दूसरी दुनिया (निर्मल वर्मा) : गरीबी, ठण्ड और अकेलापन
- ओशो वाया प्रीतीश नंदी (1985)
- रुक जा रात ठहर जा रे चंदा (दिल एक मंदिर 1963)
- “स्वराज भवन + आनंद भवन” @ इलाहाबाद
- एक बार ज़रा फिर कह दो (बिन बदल बरसात 1963)
- Kevin Carter : फोटोग्राफर की आत्महत्या !
- मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)
- अन्ना कारेनिना : क्या तुमने कभी सोचा!
- अंधायुग, अलकाजी, तुगलक : राम गोपाल बजाज
- भारत में ब्रितानी राज के लिए सबसे खतरनाक भारतीय
- चंद्रशेखर आज़ाद : पंडित नेहरु की दृष्टि से
- ओशो को सद्गुरु ने बिलकुल पढ़ा नहीं है!
- शतरंज के खिलाड़ी और प्रेमचंद की कहानियों पर बनी अन्य फ़िल्में
- शतरंज के खिलाड़ी – सत्यजित रे का रवैया
- शतरंज के खिलाड़ी : प्रेमचंद बनाम सत्यजित रॉय
- मीना कुमारी : चालीस मील लम्बी मौत
- कविराज शैलेन्द्र का पढ़ाकूपन
- जनकवि दुष्यंत के अंतिम पल …
- साम्प्रदायिकता और सत्ता …(महादेवी वर्मा)
- कुंदनलाल सहगल … फिल्मों में पदार्पण
- लालबहादुर शास्त्री… एक संस्मरण ( हेमवती नंदन बहुगुणा)
- रेणु … संस्मरण (जयप्रकाश नारायण)
- एक टुकड़ा सुख का (रंजीत कपूर)
- लाल कवेलुओं की छत : याद न जाए बीते दिनों की
- Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग
- लड़ाकुओं के युद्ध
- चित्रकार, अभिनेत्री और नग्नता!
- विलियम ब्लेक, कहिये तो
- मैंने देखा उसे…
- लता मंगेशकर : स्मरण
- राजेंद्र यादव को जानना और अपनाना
- बात मनुज की ही कविता होगी…
- मेरी जिंदगी के दिन …
- नींद – रंजीत कपूर (नाट्य व फिल्म निर्देशक, लेखक)
- गिरिजा कुमार माथुर : निराला प्रसंग
- गिरिजा कुमार माथुर : “छाया मत छूना मन” – प्रसंग
- गिरिजा कुमार माथुर : न्यू यॉर्क की पहली यात्रा
- गिरिजा कुमार माथुर : यादों का सरमाया (डॉ. गोपाल किशोर सक्सेना)
- ओशो : नेताजी सुभाषचंद्र बोस और महात्मा गांधी
- Osho : The day he left his body!
- मीना कुमारी की दौड़ !
- Anupama(1966): एक स्त्री और एक पिता की मूर्तियों की गढ़न
- अनागत : जाने गए निश्चित अंत का भय
- “उस रात की वर्षा में” : इच्छापूर्ति की शतरंज
- Mrs.Deshpande : वह है कातिलाना !
- The Great Shamsuddin Family
- JwarBhata(1944): दलीप कुमार की पहली फ़िल्म की समीक्षा
- और क्या अहद-ए-वफ़ा होते हैं (सनी 1984) : धर्मेन्द्र फैक्टर
- धर्मेन्द्र : परदे पर स्त्री तिरस्कार का सामना
- Maharani 4 : रानी भारती की मूर्ति का भंजन !
- Baramulla (2025): अगर रूहें न होतीं तो क्या बात होती!
- इंदिरा गांधी की वसीयत
- तुम्हारा इंतज़ार है तुम पुकार लो : Khamoshi(1969)
- नूरानांग दिवस और बाबा जसवंत की अदृश्य पहरेदारी
- Dharmendra : Sholay(1975) – सफलता के कारवां का सबसे कम भाग्यशाली अभिनेता
- संजीव कुमार : अभिनय कला की बारीकी के उस्ताद
- Doctor G (2022) : पुरुष स्पर्श का घुल जाना
- Sulakshana Pandit : चेहरा है या फूल खिला है!
- Uff Ye Siyappa (2025) : संवाद रहित हंगामा
- Taj Mahal : Osho
- सरदार पटेल : हम पर हिंदुस्तान की जिम्मेदारी आई है (नवम्बर 1947)
- राम – रावण : ओशो
- मीडिया ऋणात्मक क्यों ? (डा. ए.पी.जे अब्दुल कलाम)
- देह विशेष की क़ीमत कुछ भी नहीं!
- Osho’s world of jokes -1
- सहज विश्राम – ओशो + टैगोर
June 4, 2014 at 5:09 AM
Liked Your write up about Qamar Jalalabadi.My best wishes.
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