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Raj Kapoor : राजू तारा कहीं भी तो नहीं खोया!

श्री 420  के एक गीत की एक पंक्ति है ” एक तारा न जाने कहाँ खो गया “। 14 दिसम्बर 1924 को जन्मे राज कपूर की भौतिक शरीर रुपी उपस्थिति तो जरुर 2 जून 1988 को धरा से विलीन हो... Continue Reading →

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

जागते रहो, पूर्वज फिल्म है जाने भी दो यारों और इस जैसी अन्य फिल्मों की। जागते रहो में जाने भी दो यारों की तरह स्पष्ट हास्य भले ही हर फ्रेम में बिखरा हुआ न हो पर जागते रहो का असर... Continue Reading →

जरा थम जा तू (Jogan 1950) : कोयल गर गाती गीतादत्त जैसा ही कूकती

प्रकृत्ति में सौंदर्य बिखरा पड़ा है और विभिन्न तरीकों से प्रकृत्ति खूबसूरती की छटा बिखेरती है। कोई एक ही विशिष्ट वस्तु सुंदरता की प्रतीक नहीं है। ऐसी विशिष्टता पर पक्षी, पशु, पेड़, फूल, झील, नदी, पहाड़, और समुद्र आदि की... Continue Reading →

जाने वाले मुड़ के (श्री 420) : राज कपूर की तकनीकी श्रेष्ठता

राज कपूर की इस सर्वश्रेष्ठ फिल्म के इस गीत के बोल लिखे थे हसरत जयपुरी ने। फिल्म में ऐसी परिस्थितियाँ बनती हैं कि नादिरा और नीमो द्वारा दी गयी पार्टी में राज कपूर, नरगिस को अपने साथ लेकर जाते हैं। वहाँ... Continue Reading →

मेरा जूता है जापानी (Shri 420) : बिगड़े दिल फक्कड़ शहज़ादों की ठसक

“I do not want my house to be walled in on all sides and my windows to be stuffed. I want the cultures of all the lands to be blown about my house as freely as possible. But I refuse... Continue Reading →

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