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Cinema, Theatre, Music & Literature

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Cinema

Dushman 1972 : अपराध, दंड और प्रायश्चित

ताजिराते हिन्द की दफा 304 के लिए एक अनोखी सजा सुनाकर दुश्मन फ़िल्म में जज महोदय (रहमान) गैर- इरादतन अपराध कर जाने वाले व्यक्ति को सुधरने का अवसर देते हैं| किसी सामान्य व्यक्ति से गैर-इरादतन कोई अपराध हो जाए, इसमें... Continue Reading →

जब्बर सिंह (मेरा गाँव मेरा देश 1971)

हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसा कोई दूसरा अभिनेता नहीं है जो अपनी अभिनय पारी की शुरुआत से ही नायक और खलनायक की भूमिकाएं एक साथ निभाता रहा हो और दोनों में दर्शकों का चहेता बन गया हो| पहले नायक... Continue Reading →

वफ़ा जो न की तो (मुकद्दर का सिकंदर 1978)

सिनेमा के परदे पर अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी का अर्थ ही परदे पर बिजली का करेंट दौड़ना रहा है| एक समय था जब अमिताभ बच्चन अपने चरित्रों में कॉमेडी की भरपूर डोज़ दर्शकों को दिया करते थे और उस दौर की फिल्मों में अगर रेखा उनकी... Continue Reading →

बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया (Omkara 2006)

अच्छा फ़िल्मी गीत लिखना क्रिकेट की भाषा में ऐसा है कि ऐसा बल्लेबाज हो जो हर तरह की गेंद पर टीम की आवश्यकता के अनुसार रन बना सके| फ़िल्मी गीत महज कविता नहीं होती, और न वह कविता की तरह... Continue Reading →

Prem Parbat (1973): मिथक या सत्य

फिल्में जो समय के साथ उपलब्ध नहीं रह पातीं, उनके साथ लोगों की कल्पनाएँ जुड़ती चली जाती हैं और जैसे लोग एक ही घटना को अपनी ओर से कुछ लीपापोती के साथ प्रस्तुत करके उसका प्रारूप ही बदल देते हैं... Continue Reading →

स्मिता पाटिल को अचानक लगते थप्पड़ (भूमिका)

कई साल पहले जब फ़ारुक शेख टीवी शो - जीना इसी का नाम है, को प्रस्तुत करते थे तब श्याम बेनेगल वाली क़िस्त में सेट पर आये अमरीश पुरी ने श्याम बेनेगल की फ़िल्म - भूमिका, के बारे में कहा... Continue Reading →

Girls Will Be Girls (2024): बड़ी होती लड़की!

बड़ी होती किशोर लड़की के जीवन पर केन्द्रित यह फ़िल्म उस किशोरी के भ्रमित जीवन की भांति दर्शक को भी भ्रमित कर जाती है| कभी यह बड़ी प्रभावशाली लगने लगती है और कुछ ही क्षणों में दर्शाए हिस्सों की कमियां,... Continue Reading →

Meiyazhagan (2024) : भोलेपन में है वफ़ा की खुशबू

आज फिर शुरू हुआ जीवन आज मैंने एक छोटी-सी सरल-सी कविता पढ़ी आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया आज एक छोटी-सी बच्ची आई, किलक मेरे कन्धे चढ़ी आज मैंने... Continue Reading →

Agni (2024) : आग ये किस ने लगाई?

अपने जलने का हमेशा से तमाशाई हूँ आग ये किस ने लगाई मुझे मालूम नहीं (~ मोहम्मद आज़म) एक अग्निशामक, दमकलकर्मी, अग्नियोद्धा या फायरमैन को नायक बनाकर उनके खतरनाक कार्य को बारीकी से दिखाने के लिए फ़िल्म - अग्नि, सराहनीय... Continue Reading →

Kooki (2024) : कानूनी छ्लात्कार

कूकी, फ़िल्म की 16 वर्षीय नायिका (रितिषा खौंड) का नाम भी है और फ़िल्म का शीर्षक भी| गैंग रेप की शिकार नायिका के बलात्कारियों को पुलिस पकड़ लेती है, अदालत सजा भी दे देती है लेकिन कूकी को इससे राहत... Continue Reading →

Aye Zindagi (2022) : दुःख अपने पराये

दुःख ऐसा भाव है मनुष्य के जीवन में कि इसमें कुछ कहावतें एकदम सटीक बैठती हैं पर उपदेश कुशल बहुतेरे जाके पाँव न फटे बिवाई सो क्या जाने पीर पराई किसी दूसरे पर जब दुःख का साया पड़ता है तो... Continue Reading →

Sharda(1957): प्रेमिका सुहागन प्रेमी के पिता की

कल्पना कीजिये कि एक युवक की प्रेमिका परिस्थितिवश उसकी माँ बन जाये तो क्या हो? ऐसे रिश्ते से उपजे जटिल समीकरण को सुलझाने के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण और हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक एल वी... Continue Reading →

Kamli(2022) : क़ैद में है स्त्री

पाकिस्तानी फ़िल्म "कमली" तीन मुख्य स्त्री चरित्रों और कुछ अन्य स्त्री चरित्रों, और उनके इर्द गिर्द कुछ पुरुषों की मेहमान भूमिकाओं जैसी उपस्थितियों को समेटे हुए स्त्री जगत को दर्शाती है| तीनों मुख्य स्त्री चरित्र अपनी अपनी कैद में हैं|... Continue Reading →

अगम (2022): अध्यात्म की खोज वाया बनारस

संस्कृत भाषा से आये शब्द - अगम, के कई अर्थ हैं -> अनादि, अनंत, निस्सीम, अथाह, बहुत गहरा, समझ की सीमा से बाहर, जहां तक पहुँच न हो, आदि इत्यादि | हिंदी फिल्मों ने अध्यात्म पर हिन्दू दर्शन को समेटने... Continue Reading →

फिर कभी (2008)

निर्देशक वी के प्रकाश द्वारा निर्देशित फ़िल्म - फिर कभी को यूटीवी ने सीधे डीवीडी और डी टी एच पर प्रदर्शित किया था| जिन सालों में वयस्क प्रेम कहानियों पर जोगेर्स पार्क जैसी फ़िल्में बन रही थीं| यह उस दिशा से अलग किस्म की... Continue Reading →

Zid (1976) : लापता फ़िल्म

1976 में प्रदर्शित हुयी फ़िल्म - ज़िद, के अभी 50 साल भी पूरे नहीं हुए लेकिन निर्देशक विजय द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म बहुत सालों से लापता है| चूंकि इसकी डीवीडी और शायद वीसीडी भी कभी प्रदर्शित नहीं हुयी तो वीएचएस... Continue Reading →

DevAnand@101 : लता मंगेशकर गीत देव आनंद के लिए

लता मंगेशकर ने गायन में अपनी एक अधूरी रह गई इच्छा के बारे में कहा था कि वे दिलीप कुमार के लिए गीत नहीं गा पायीं और यह संभव भी नहीं था क्योंकि कई अन्य अभिनेताओं की तरह दिलीप कुमार... Continue Reading →

देव आनंद के आंसू

रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों में देव साब को देखने की बात ही कुछ है| पचास के दशक के तीन सबसे बड़े नायकों में से एक देव आनंद अपनी फिल्मों में कोशिश करते थे कि उन्हें परदे पर रोने के सीन न करने पड़ें| शायद उन्हें... Continue Reading →

अंखियों के झरोखों से मैंने देखा जो सांवरे…

राजश्री प्रोडक्शन हाउस के अंतर्गत निर्माता ताराचंद बड़जात्या द्वारा निर्मित एवं हिरेन नाग द्वारा निर्देशित फ़िल्म, अंखियों के झरोखों से, मोटे तौर पर  Erich Segal के 1970 में प्रकाशित बहुचर्चित लघु उपन्यास Love Story, जिस पर हॉलीवुड में इसी नाम... Continue Reading →

Hip Hip Hurray (1984)

प्रकाश झा की इस फ़िल्म हिप हिप हुर्रे में गुलज़ार स्क्रीनप्ले और संवाद+गीत लेखक के रूप में जुड़े हुए हैं सो बहुत हद तक यह गुलज़ार की भी फ़िल्म है| गुलज़ार की परिचय में जीतेंद्र के चरित्र को अपने योग्य नौकरी मिलने तक के काल में अपने... Continue Reading →

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