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#Ghayal

तुम्हें याद हो कि न याद हो …

वह भी देखेगा सुखद सपने?

थोड़ा सा … (अशोक वाजपेयी)

एक संवेदनशील और जिम्मेदार कवि अपनी कविता में जीवन में जो कुछ अच्छा है उसकी देखरेख अवश्य ही करता है और किसी भयानक दौर में उस अच्छे को बचाए रख पाने के आशावाद को भी अपनी कविता में समाहित करता... Continue Reading →

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