Search

Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

Month

April 2026

15 अगस्त के बाद (शैलेन्द्र) : दृष्टा जन-कवि

यह एक अविश्वसनीय सा तथ्य है कि कवि शैलेन्द्र ने 1948 में, ब्रितानी राज से स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद ही निम्न प्रस्तुत कविता लिख दी थी| यह आज़ाद भारत के हर दशक की कविता लगती है और आज... Continue Reading →

महेंद्र रज्जन : कहीं खो चुके लेखक का लापता साहित्य

कई साल पहले हम कुछ साथी एक पब्लिक लाइब्रेरी में जाकर किताबें देखने लगे तो देखा वहां उपस्थित हिंदी साहित्य में गद्य की अधिकतर किताबें पढ़ ली हैं और काव्य व निबंधों की किताबें ही बची हैं| अलमारी को एक... Continue Reading →

चैन से हमको कभी (प्राण जाए पर वचन न जाए 1974)

अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ परकब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते ~ जौन एलिया जौन एलिया के उपरोक्त्त शेर में इस गीत की नायिका की दिल की हालत छिपी हुयी है| यह... Continue Reading →

दूसरी दुनिया (निर्मल वर्मा) : गरीबी, ठण्ड और अकेलापन

"It's no good trying to get rid of your own aloneness. You've got to stick to it all your life." — D.H. Lawrence ...[राकेश]

ओशो वाया प्रीतीश नंदी (1985)

Courtesy : Illustrated Weekly of India, 29 September 1985

Blog at WordPress.com.

Up ↑