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#MadanMohan

हीर राँझा (1970) : पद्यात्मक संवादों से सजी फ़िल्म

...[राकेश] © यह पोस्ट (January 18, 2007 , 6.22 a.m.) को अंगरेजी में लिखे अपने ही लेख पर आधारित है|

Heer Raanjha (1970) : A Unique film in the verse

              ...[राकेश] © First published on Passionforcinema.com (January 18, 2007 at 6.22 a.m.)

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

Gulzar@91 : सबने देखी है शब्दों से फैलती खुशबू

बंदिनी में सचिन देव बर्मन के साथ एक बेहद खूबसूरत गीत (मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे) से फ़िल्मी गीत लिखने की शुरुआत करने वाले गुलज़ार पिछले 62 वर्षों से निरंतर संगीत निर्देशकों और फ़िल्म निर्देशकों... Continue Reading →

निर्मला देवी -ओशो-गोविंदा -शास्त्रीय संगीत

पुस्तकें पढने के साथ संगीत सुनना भी ओशो की पसंदीदा रुचियों में से एक रहा| बचपन में कई साल उन्होंने स्वंय बांसुरीवादन किया, लेकिन अपने एक प्रिय मित्र के नदी में डूब जाने के बाद उन्होंने बांसुरी को भी नदी... Continue Reading →

रेजांग ला की लड़ाई (18 नवंबर 1962) = हक़ीक़त (1964)

परसेप्शन बहुत बड़ी बात है| 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया तो भारत उसका सैन्य मुकाबला करने के लिए उसके स्तर पर तैयार नहीं था| अंग्रेजों द्वारा कंगाली की कगार पर छोड़ दिया गया देश विकास के मार्ग... Continue Reading →

Veer Zaara : Manoj Bajpeyee

मनमोहन देसाई की सुपरहिट फ़िल्म अमर-अकबर-एंथनी में एक दृश्य है जिसमें इन्स्पेक्टर अमर (विनोद खन्ना), एंथनी (अमिताभ बच्चन) को उसके मोहल्ले से पीट पाट कर लाकर हवालात में बंद कर देता है और हवालात से चोट खाया एंथनी, बाहर अपनी... Continue Reading →

Koshish (1972) : संवेदना उकेरती मौन प्रेमकथा

...[राकेश] ©

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