तुममें कहीं "कुछ" है कि तुम्हें उगता सूरज, मेमने, गिलहरियाँ, कभी-कभी का मौसम, जंगली फूल-पत्तियां , टहनियां - भली लगती हैं... (रघुवीर सहाय) इस "कुछ" को परिभाषित करना दुष्कर कार्य है| हरेक के लिए है| हमेशा रहा है| इंटरनेट के अस्तित्व में... Continue Reading →
इस फ़िल्म को हृषिकेश मुकर्जी की आनंद (Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल) पारिवारिक मित्र के घर बैठक का दृश्य शैफाली शाह के बेहतरीन अभिनय वाली लघु फ़िल्म Juice (Juice (2017) : क्वथनांक से बस एक डिग्री कम)... Continue Reading →
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