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क्या गुलाब नग्न होता है? (पाब्लो नेरुदा)

रंगीले बाबू : दुःख और वेदना पर अट्ठाहस लगाता मानव

बाबू रसिकलाल को मैं उस वक्त से जानता हूं, जब वे लॉ कॉलेज में पढ़ते थे। मेरे सामने ही वकील हुए और आनन-फानन चमके। देखते-देखते बंगला बन गया, जमीन खरीद ली और शहर के रईसों में शुमार में शुमार होने... Continue Reading →

दूर न जाना, प्रिये! … (Pablo Neruda)

Don’t Go Far Off (Pablo Neruda) हिन्दी अनुवाद :-   …[राकेश] Painting : Vincent Von Gogh

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