रामसे परिवार के केशु रामसे द्वारा निर्देशित खोज एक ब्रिटिश फ़िल्म पर आधारित है| मूल ब्रितानी फ़िल्म पर बहुत सी भारतीय भाषाओं में फ़िल्में बनी|

रामसे ब्रदर्स फ़िल्म निर्माण फैक्ट्री की यह इकलौती फ़िल्म होगी जिसमें भूत या चुड़ैल का मुखौटा नहीं है, वीरान हवेली नहीं है और वे तमाम टोटके नहीं हैं जो वे अपनी फिल्मों में 1972 में “दो गज जमीन के नीचे” के काल से अपनाते रहे| खोज सामान्य शहरी चरित्रों की फ़िल्म है, जिसमें रहस्य तो बाकायदा है और यह रहस्य है क्या, कैसे उसका पर्दाफ़ाश होगा, कब होगा, इसका रोमांच भी फ़िल्म में भरा हुआ है|

लवर बॉय की भूमिकाओं से अपनी फ़िल्मी नायकीय पारी शुरू करने वाले ऋषि कपूर, प्रेमरोग के बाद नायिका प्रधान फिल्मों में बड़ी आसानी से नायक के रूप में ढलकर इन फिल्मों में भी अपना वजूद कायम रखे रहे| नगीना और चांदनी जैसी दो सुपर हिट फिल्मों के बीच उनकी खोज आई और चली गयी, लोगों ने सिनेमाघरों में इसका खास नोटिस लिया हो ऐसा लगता नहीं लेकिन होम विडियो में ये खूब देखी जाने वाली फ़िल्म बन गयी|

ऋषि कपूर का चरित्र काठमांडू जैसी जगह जाए तो दर्शक पहाड़ों और वादियों में एक दो प्रेम गीतों की प्रतीक्षा और अपेक्षा करेंगे पर ऋषि कपूर का चरित्र तो अगले ही रोज़ वहां के पुलिस थाने में हैरान परेशान खड़ा दिखाई देता है शिकायत लिखवाने कि उसके साथ वहां घूमने आई उसकी पत्नी गायब हो गयी है|

एक पति द्वारा अपनी गायब हुयी पत्नी की खोज शुरू हो जाती है और उसकी सहायता के लिए इन्स्पेक्टर (नसीरुद्दीन शाह) भी एक भारतीय पर्यटक की पत्नी को ढूँढने लग जाता है|

खोज चल ही रही है कि फ़िल्म में प्रवेश होता है सफ़ेद चोगा पहने के पादरी (डैनी) की| पादरी एक स्त्री (किमी काटकर) को साथ लेकर आता है और इन्स्पेक्टर और ऋषि कपूर के चरित्र से कहता है कि लीजिये जिसे आप लोग गली गली ढूंढ रहे थे वह तो कल भटकती हुयी किसी तरह मेरे पास पहुँच गयीं थीं| आज ही इन्होंने अपना और आपका विवरण दिया|

स्त्री देखते ही ऋषि कपूर से लिपट जाती है पर ऋषि कपूर उससे दूर जाते हैं और उससे पूछते हैं कि तुम कौन हो?

इन्स्पेक्टर से कहते हैं कि ये स्त्री मेरी पत्नी नहीं है|

अब इन्स्पेक्टर और दर्शक के सामने उलझनें आ जाती हैं| –

  1. डैनी हैं परदे पर तो दर्शक को लगता है ये पादरी चरित्र ही तो कोई खेल नहीं कर रहा?
  2. ऋषि कपूर क्यों अपनी पत्नी को नहीं पहचान पा रहा? क्या उसे कोई मानसिक बीमारी है जिससे वह अपनी याददाश्त भूल गया है?

मामला बड़ा पेचीदा बन जाता है| क्या कोई ऋषि कपूर की दौलत के पीछे है?

ऋषि कपूर की बेटी बोर्डिंग में पढ़ती है, सो संतान को तो अपनी माँ को पहचान ही लेना चाहिए सो इन्स्पेक्टर साहब सबको लेकर वहां पहुँचते हैं|

परन्तु मामला और जटिल हो जाता है|

सच के लिए ऋषि कपूरनसीरुद्दीन शाह, और डैनी एवं किमी काटकर के चरित्रों के पक्षों को देखना और उनका विश्लेषण करना जरुरी है|

कोई तो है इनमें से जो झूठ और लगातार झूठ बोल रहा है|

सच्चा कौन है और उसका सच कैसे जीतेगा?

इसी सच की खोज पर यह फ़िल्म बनी है|

रहस्य रोमांच की फिल्मों के दर्शकों को एक बार देखने पर मनोरंजन देने की क्षमता फ़िल्म में है|


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