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Cinema, Theatre, Music & Literature

Category

Hindi

भारत में ब्रितानी राज के लिए सबसे खतरनाक भारतीय

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन (1900-1947) में ब्रिटिश सरकार ने जिन भारतीय नेताओं/क्रांतिकारियों को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा माना, उनकी सूची, ब्रिटिश दस्तावेजों (India Office Records - IOR, Intelligence Bureau - IB रिपोर्ट्स, Viceroy के पत्र, Cellular Jail रिकॉर्ड्स, Rowlatt... Continue Reading →

चंद्रशेखर आज़ाद : पंडित नेहरु की दृष्टि से

पंडित नेहरु की आत्मकथा (मेरी कहानी/ MY Story) में छपे वर्णन से स्पष्ट है कि हालांकि पंडित नेहरु ने अपनी आत्मकथा 1934-35 में लिखी और 1936 में छपवाई, जब तक कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद दोनों की प्रसिद्धि आकाश छू... Continue Reading →

ओशो को सद्गुरु ने बिलकुल पढ़ा नहीं है!

खजुराहो पर जैसा ओशो ने अपने प्रवचनों पर कहा, वैसा उनसे पहले कभी किसी ने नहीं कहा था| खजुराहो के मंदिरों के अध्यात्मिक महत्त्व को ओशो ने ही सबसे पहले रेखांकित किया| उन्होंने ही इस बात पर प्रकाश डाला कि... Continue Reading →

शतरंज के खिलाड़ी और प्रेमचंद की कहानियों पर बनी अन्य फ़िल्में

चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर बनी फिल्मों पर उनके सुपुत्र अमृतराय के विचार सारिका, 1980 संलग्न चित्र में प्रेमचंद मुंबई में फ़िल्मी अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हुए

शतरंज के खिलाड़ी – सत्यजित रे का रवैया

खोट रे के रवैये में दीखता है - नेत्र सिंह रावत सारिका, मई 1978

शतरंज के खिलाड़ी : प्रेमचंद बनाम सत्यजित रॉय

© राजेन्द्र यादव प्रेमचंद की कहानी ज्यादा ईमानदार थी| - राजेंद्र यादव

मीना कुमारी : चालीस मील लम्बी मौत

मीना कुमारी की डायरी (14) , सारिका, मार्च 1975 प्रस्तुति - © गुलज़ार

कविराज शैलेन्द्र का पढ़ाकूपन

प्रेम कपूर ( सारिका 1966)

जनकवि दुष्यंत के अंतिम पल …

लेखक - राजेश्वरी त्यागी (धर्मपत्नी दुष्यंत कुमार) साभार : दुष्यंत के जाने पर दोस्तों की यादें (संपादक - कमलेश्वर)

साम्प्रदायिकता और सत्ता …(महादेवी वर्मा)

महादेवी वर्मा का साक्षात्कार , साक्षात्कारकर्ता - उमाकांत मालवीय Published in Sarika , November 1981

कुंदनलाल सहगल … फिल्मों में पदार्पण

राघव मेनन , Published in सारिका 1981

लालबहादुर शास्त्री… एक संस्मरण ( हेमवती नंदन बहुगुणा)

Published in Sarika, 1981

रेणु … संस्मरण (जयप्रकाश नारायण)

Published in Sarika (April 1979)

लाल कवेलुओं की छत : याद न जाए बीते दिनों की

...[राकेश]

Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग

होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →

लड़ाकुओं के युद्ध

विलियम ब्लेक, कहिये तो

मैंने देखा उसे…

लता मंगेशकर : स्मरण

ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है ~ बशीर बद्र

राजेंद्र यादव को जानना और अपनाना

First Published in - हमारे युग का खलनायक राजेंद्र यादव (संपादक - भारत भारद्वाज, साधना अग्रवाल), 2003 © कृष्ण बिहारी

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