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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

ओशो द्वारा लिखा 54 साल पुराना पत्र

प्रिय, मौन आशीर्वाद है, लेकिन यह मौन तुम्हारे द्वारा रचा नहीं जा सकता| क्योंकि तुम तो स्वयं में शोर ही हो| इसलिए तुम कैसे मौन रच सकते हो? लेकिन तुम मौन का भ्रम अवश्य ही रच सकते हो| और मौन... Continue Reading →

जंग नहीं : अटल बिहारी वाजपेयी

विश्व शांति के हम साधक हैं,जंग न होने देंगे!कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी,खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,आसमान फिर कभी न अंगारे उगलेगा,एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी,युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे।जंग न... Continue Reading →

गाए – इस्माइल मेरठी

इस्माइल मेरठी = मोहम्मद इस्माइल Pic - Cow Painting by Nandlal Bose

दो सत्य – ईश्वर और मृत्यु !

दो सत्य बातें कभी भूलनी नहीं चाहियें अगर तुम मुक्ति के लिए उत्सुक हो एक है मृत्यु और दूसरा है ईश्वर! मृत्यु की सच्चाई : इस संसार में हर वस्तु अपनी मृत्यु की ओर अग्रसर है| जिसका भी आरम्भ है उसका... Continue Reading →

भीगा भीगा मौसम आया

हिंदी सिनेमा में नायक-नायिका की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेताओं की प्रसिद्द जोड़ियों में मिठुन चक्रवर्ती और रंजीता कौर की जोड़ी भी रही है, जिन्होंने अपने फिल्मी जीवन के शुरुआती दौर में बहुत सी फ़िल्में एक साथ कीं| यह कहना भी... Continue Reading →

राजनेतागण : न काहू से दोस्ती न काहू से बैर

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्य तिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, अभिनेता राज बब्बर ने लिखा - [भारत को शुरुआत के 3-4 दशकों में ही 3-4 लड़ाईयां लड़नी पड़ी - आंतरिक उथल... Continue Reading →

भारत में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग का आगाज़

भारत में कंप्यूटर साइंस की नींव 1950 के दशक में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता में रखी गई थी, जहाँ 1956 में पहला डिजिटल कंप्यूटर HEC-2M स्थापित किया गया। इसके बाद, TIFRAC (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ऑटोमैटिक कैलकुलेटर) 1960... Continue Reading →

लफड़ा सदन – न बन पाने वाली फ़िल्म के लॉन्च की कथा

अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखता हूँ तो अवसरों भरे उन कुछ दिनों पर निगाहें ठहरती हैं जो  संयोग, सौहार्द और सिनेमाई उम्मीदों से भरे हुए रहे हैं| जैसे 2 अक्टूबर 1976 का चमकीला दिन! उस दिन बॉम्बे के फ़िल्म... Continue Reading →

नसीम बानो : मंटो की निगाह और लेखनी से

सआदत हसन मंटो ने 'गंजे फ़रिश्ते' शीर्षक से एक किताब लिखी थी जिसमें उनके द्वारा हिंदी सिनेमा में बिठाये वक्त के दौरान संपर्क में आये फ़िल्मी दुनिया के लोगों के बारे में संस्मरण थे| कुछ साल पहले पेंग्विन, इण्डिया ने... Continue Reading →

हिंदी – अबू धाबी में न्यायालय की तीसरी भाषा बन ही गई

यशपाल और कम्यूनिज़्म : ओशो

मेरे एक कम्यूनिस्ट मित्र थे- वे वास्तव में बड़े बौद्धिक थे| उन्होंने बहुत सारी किताबें लिखीं, सौ के आसपास, और सारी की सारी कम्यूनिस्ट थीम से भरी हुई, पर अपरोक्ष रूप से ही, वे उपन्यासों के माध्यम से यह करते... Continue Reading →

रंगीले बाबू : दुःख और वेदना पर अट्ठाहस लगाता मानव

बाबू रसिकलाल को मैं उस वक्त से जानता हूं, जब वे लॉ कॉलेज में पढ़ते थे। मेरे सामने ही वकील हुए और आनन-फानन चमके। देखते-देखते बंगला बन गया, जमीन खरीद ली और शहर के रईसों में शुमार में शुमार होने... Continue Reading →

छैनू, श्याम आ गया है !

छैनू के भरोसे पतुनिया के लोगों ने श्याम के एक डेरे पर आक्रमण कर दिया और मार-काट मचाकर कई पुरुषों की ह्त्या कर, स्त्रियों को धमकी दे गए - श्याम को बता देना कि छैनू आया था, बहुत गर्मी है... Continue Reading →

Operation Sindoor : बाल ठाकरे होते तो !

भारत की अतिलोकप्रिय फ़िल्म "शोले" में गब्बर सिंह द्वारा उनके परिवार पर आतंकी हमले के कुछ अरसा बाद बदले की भावना से पीड़ित व परिजनों के सामूहिक क़त्ल के दुःख से कुंठित ठाकुर बलदेव सिंह अपनी सर्द आवाज़ में कहते... Continue Reading →

Operation Sindoor : भारत की विजय या हार !

ऑपरेशन सिन्दूर : भारत कहाँ जीता कहाँ हारा और जहाँ हारा वहां क्यों हारा ? यह एक महत्वपूर्ण स्थिति है| ----------------भारतीय सेना द्वारा सटीक लक्ष्यभेदी पराक्रम दिखाने के बावजूद भारत कहाँ पिछड़ा?भारत कुछ मायनों में पिछड़ गया यह स्पष्ट ही... Continue Reading →

1965 भारत-पाक युद्ध : FTII, ऋत्विक घटक का इस्तीफ़ा, शत्रुघ्न सिन्हा की खिचड़ी

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान FTII (तब FII) में बेहद कठिन परिस्थितियों में आपसी संबंध पनपने का दौर: एक संस्मरण (HK Verma) [नोट : यह लेख श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद है| HK Verma,... Continue Reading →

महात्मा गांधी : कायरता और हिंसा के बीच चुनाव!

मैं एक पूरी जाति को नष्ट करने का जोखिम उठाने की अपेक्षा हजार बार हिंसा का जोखिम उठाने को तैयार हूँ। हिंसा ही विकल्प : मैं यह मानता हूं कि जहां कायरता और हिंसा के बीच ही चुनाव करना हो,... Continue Reading →

‘कारगिल’ और भारत-पाक शांति प्रयास

पिछली सदी में नब्बे के दशक के अंत में जब भारत और पाकिस्तान अपने अपने परमाणु अभियानों क्रमश: “शक्ति” और “गौरी” की आँच से तप रहे थे तो ग़ालिब के दो सदी बाद मनाये जाने वाले जयंती समारोह “अंदाज-ए.बयां” की मार्फत मशहूर... Continue Reading →

वतन पर खतरे के समय फ़िल्म उद्योग के कर्त्तव्य

सन 1962 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु की वैश्विक शांति में आस्था पर चोट करते हुए उनके पंचशील के सिद्धांत को ठुकराते हुए पड़ोसी चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया| अंगरेजी हुकूमत से आज़ादी मिले डेढ़ दशक... Continue Reading →

अशोक और कलिंग युद्ध

एक ही काल, समय और स्थान पर उपस्थित सभी मानवों के ऊपर एक ही बात का असर एक जैसा नहीं होता| एक ही कृत्य में सम्मिलित सभी कर्मियों का योगदान एक समान नहीं होता, बाहर से भले ही एक जैसा... Continue Reading →

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