धर्मवीर भारती जी की कालजयी रचना अंधायुग में एक प्रसंग है जहाँ गांधारी कृष्ण को शाप देती है। गांधारी : तो सुनो कृष्णप्रभू हो या परात्पर होकुछ भी होसारा तुम्हारा वंशइसी तरह पागल कुत्तों की तरहएक दूसरे को फाड़ खायेगातुम खुद उनका विनाश करके... Continue Reading →