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Shri 420 (1955)

सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा : राज कपूर, तुम न जाने किस जहां में खो गए!

बड़े बाँध बनने से, माइनिंग के कारण, बहुत बड़े उद्योग लगने के कारण हुये स्थानीय लोगों के विस्थापन को नेहरू युग में देश में अन्यत्र रह रहे लोग महसूस भी न कर पाते होंगे| तब देश के नेता ने एक... Continue Reading →

रमैय्या वस्तावैय्या (Shri 420) … राम तेरा दिल और कर्म मैले

रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया,  मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में... Continue Reading →

मेरा जूता है जापानी (Shri 420) : बिगड़े दिल फक्कड़ शहज़ादों की ठसक

“I do not want my house to be walled in on all sides and my windows to be stuffed. I want the cultures of all the lands to be blown about my house as freely as possible. But I refuse... Continue Reading →

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