सीनियर इन्स्पेक्टर सुभाष ने एस पी जवाहर चौधरी से कहा,” सर, आज तो आपका सेवा में आख़िरी दिन है| आपको याद है, वो टोटके वाला केस? मैंने जब भी पूछा आपने टाल दिया पर मुझे हमेशा से लगता रहा है कि उस केस में ऐसा कुछ था, जो आपको पता था पर आपने मुझ तक से छिपाया| आज तो रहस्य खोल दीजिये|”

कौन सा केस सर? हॉल में एकत्रित हुए कई सारे पुलिस अधिकारियों ने एक साथ पूछा|

एस पी जवाहर चौधरी ने एक भरपूर नज़र सुभाष पर डाल कर गहरी सांस लेकर कहा,” 19-20 साल तो हो गए सुभाष| तुम्हारी शायद पहली ही पोस्टिंग थी| आप सभी ज़रा सोचें कि अगर सुबह आपके पास ऐसा मामला आ जाए जिसमें किसी आदमी की मौत का कारण काला जादू टोना बताया गया हो तो एक पुलिस अधिकारी के तौर पर, जिसकी जिम्मेदारियां क़ानून की किताब में लिखी धाराओं से बंधी हैं, आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी?”

उलझन में पड़े लोगों की ओर देखकर जवाहर यादों में खो गए प्रतीत होते हैं|

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सीनियर इन्स्पेक्टर जवाहर चौधरी ह्त्या की सूचना पाते ही सब इन्स्पेक्टर सुभाष कुमार और दो सिपाहियों को लेकर बताये गए पते पर पहुँचते हैं| एक बड़े से महलनुमा बंगले के पोर्च में अपनी जिप्सी से उतर कर जवाहर और सुभाष उतर कर बंगले के मुख्य दरवाजे पर जाकर कॉलबेल बजाते हैं| अन्दर से घरेलू सहायिका मुख्य दरवाजा खोलती है| बंगले में घुसते ही सामने एक शानदार सोफे पर 54-55 वर्षीय एक भद्र महिला, दिखने में ही रईसी का अनुमान देने वाली, सफ़ेद साड़ी पहने बैठी दिखाई देती है| महिला के कानों में हीरे के टॉप्स हैं, गले में सफ़ेद मोतियों की माला है, एक रुद्राक्ष की माला भी गले में पडी हुई है, और महंगी अंगूठियाँ हाथों की उँगलियों की शोभा बढ़ा रही हैं| हीरे जड़े कंगन दोनों हाथों की कलाइयों पर सजे हुए हैं, दाएं हाथ की कलाई में बेहद कीमती घड़ी भी बंधी हुयी है और बाईं कलाई पर महिला ने एक चमकदार क्रिस्टल ब्रेसलेट भी पहना हुआ है जो उसके वास्तु, और अंकशास्त्र में भरोसे को दर्शाता है| महिला के मुख पर दुःख के भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं| आँखें सूजी हुयी हैं शायद पति के आकस्मिक निधन के दुःख के कारण रोने से|

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जवाहर – आप?

मेरा नाम सुनीता है, सेठ दामोदर दास मेरे पति थे| सुबह साढे छः बजे जब कमला, हमारी घरेलू सहायिका,  मेरे पति को लेमन टी और शहद देने गई तो उसने मेरे पति को मृत पाया| इन्स्पेक्टर साहब, उनकी ह्त्या हो गई है|

जवाहर – कृपया हमें आप अपने पति के बेडरूम में ले चलिए जहां सुबह आपने उनका मृत शरीर पाया गया था|

सुनीता – आइये, मेरे साथ!

जवाहर और सुभाष सुनीता देवी के पीछे पीछे चलकर सीढियां चढ़ते हैं| आधी सीढियां चढ़ने के बाद मोड़ पर दीवार पर एक हष्टपुष्ट, कद्दावर युवा आदमी का पोर्ट्रेट लगा है| हाथों में राइफल लिए हुए व्यक्ति, एक शेर के मृत शरीर पर एक पैर टिकाये हुए खडा हुआ है|  

कमरे में प्रवेश करके जवाहर और सुभाष ने देखा कि मृतक का दुबला पतला शरीर आराम की मुद्रा में था, उसका चेहरा शान्ति से भरा हुआ था| कमरे में कहीं किसी संघर्ष के निशान नहीं थे, और न ही ऐसा लगा कि उसे जहर वगैरह कुछ दिया गया होगा| पहली नजर में यही लगा कि सोते-सोते ही किसी समय सेठ जी का इंतकाल प्राकृतिक कारणों से हो गया होगा और वे बड़ी शांति से इस दुनिया से रुखसत हो गये|

जवाहर – आपने अपने पति को उठा न पाकर अपने फैमिली डॉक्टर को बुलवाया था?

सुनीता – जी हाँ, डॉक्टर गौतम आए थे पर वे भ्रमित थे कि एकाएक मेरे पति कैसे मर सकते हैं? वे पिछले दो माह से, जब से मेरे पति बीमार पड़े, रोजाना सुबह आठ बजे आकर आकर मेरे पति का मुआयना कर जाते थे| उन्हें मेरे पति की मौत के पीछे कोई स्पष्ट शारीरिक कारण नहीं दिखाई दिया| वे अभी थोड़ी देर पहले ही गए हैं, किसी मरीज को देखने गए हैं, कुछ देर में वे वापिस आयेंगे|

जवाहर – आपको क्यों लगता है कि आपके पति की ह्त्या की गई है?

सुनीता – मेरे पति पर जादू-टोना किया जा रहा था, और आज इसी कारण मेरे पति की मौत हो गयी|

जवाहर सुनीता देवी की बातों में जादू टोने की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता था, लेकिन फिर भी उसे कहना पड़ा,” ये काले जादू के टोटके का क्या मामला है? आप कैसे कह सकती हैं कि कोई आपके पति पर काले जादू का इस्तेमाल कर रहा था और उसी कारण उनकी मृत्यु हुयी?

सुनीता – मेरे पति की मौत के पीछे और कोई कारण हो ही नहीं सकता और हमारे फैमिली डॉक्टर को भी उनके पति की मौत का अन्य कोई कारण समझ में नहीं आया| आपने इस कमरे में आते हुए सीढियां चढ़ते हुए मेरे पति का पोर्ट्रेट देखा होगा वे एक लंबे चौड़े स्वस्थ शरीर के मालिक रहे हैं और मेरी याद में तो मैंने अपने विवाह के बाद से उन्हें कभी बीमार होते हुए भी नहीं देखा पर देखिये पिछले दो माह में उनकी काया का क्या हश्र हो गया है?

जवाहर – क्या हुआ था उन्हें दो माह पहले?

सुनीता – डॉक्टर ने पेट में किसी बैक्टीरियल इन्फेक्शन की संभावना होना बताया था, और उसी समय के आसपास से जांच के बाद डॉक्टर ने उनके दिल का इलाज प्रारम्भ किया| कैसे एक स्वस्थ आदमी एकदम से इतना बीमार पड़ जायेगा?

जवाहर – दिल की बीमारी तो इस उम्र में किसी को भी हो सकती है, और ऐसे बहुत से लोगों को भी दिल की बीमारी हुयी पाई जाती है जिनमें पहले इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते थे| इसका किसी के दवारा किये जाने वाले जादू टोने से क्या संबंध है?

सुनीता – बिना किसी बात के एकाएक कोई हर बात से डरने तो नहीं लगेगा, एक ही दिन में किसी स्वस्थ आदमी का दिल सुपर फास्ट गाड़ी की रफ़्तार से धड़कने तो नहीं लगेगा? आज आप स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, लग रहे हैं, कल से ही आप दिल के मरीज तो नहीं हो जायेंगें न? क्या ऐसा संभव है कि कल से ही आप उल्टियां करने लगें और आपका दिल एकदम से इतना कमजोर हो जाए कि ज़रा सा तनाव भी बर्दाश्त न कर पाए?

माफ कीजियेगा भले ही मेरे पति की उम्र आपसे बीसेक साल ज्यादा हो पर केवल तीन महीने पहले तक वे आपसे बहुत ज्यादा स्वस्थ दिखाई देते थे|

जवाहर – किस बात से आपको ऐसा लगा कि कोई आपके पति पर काले जादू का वार कर रहा है और जिससे वे एकाएक बीमार हो गये?

सुनीता  – आप यहीं ठहरिये, मैं आपको कुछ चीजें दिखाती हूँ| मैं अभी आती हूँ|

सुनीता कक्ष से बाहर जाती है| जवाहर सुभाष की ओर देख कर कहता है, “तुम इस काले जादू जैसी बात में यकीन करते हो?”

सुभाष (हिचकिचाते हुए, थोड़ा हकलाते हुए) – सर, कुछ तो होता ही है|

जवाहर – क्या बकवास बात कर रहे हो यार| पहले ही पुलिस के पास मामलों की कमी है क्या, जो अब काले जादू के मामले भी हमें अपने सिर लेने पड़ेंगें|

सुनीता देवी ने कक्ष में प्रवेश करते हुए कहा,” देखिये यह गुड्डा देखिये|”

जवाहर – इस गुड्डे के पेट और दिल में इतनी सारी पिनें क्यों गड़ी हुयी हैं?

सुनीता – आप बताइये! और ये देखिये, ये मेरे पति का पसंदीदा स्वेटर है|

जवाहर – अरे! बिल्कुल ऐसा ही क्रिकेट की जर्सी जैसा स्वेटर तो गुड्डे ने भी पहना हुआ है? पर स्वेटर पर ये लाल धब्बे कैसे हैं? खून के धब्बों जैसे लग रहे हैं!

सुनीता – कभी मेरे पति को क्रिकेट खेलने और देखने का बहुत शौक था| करीब दो महीने पहले वे यह स्वेटर पहन कर बाहर गये थे, घर लौटे तो बहुत परेशान दिखाई दे रहे थे| पूछने पर भी कुछ बताया नहीं| स्वेटर उतार कर कुर्सी पर रखा, और नहाने चले गये, मैं उनके लिए चाय लेकर उनके कमरे में घुस ही रही थी कि वे नहाकर गाउन पहनकर बाथरूम से बाहर निकले| मैं उनके कपड़े निकालने के लिए अलमारी की तरफ बढ़ी| उन्होंने कुर्सी से उठाकर अपना स्वेटर अलमारी में रखने के लिए मुझे दिया तो स्वेटर पर खून जैसे लाल रंग के धब्बे दिखाई दिए| मैंने उनसे पूछा कि ये क्या है और उन्हें कहीं कोई चोट तो नहीं लगी| उनका चेहरा सफ़ेद पड़ गया था| वे अपने दिल पर हाथ रखकर कुर्सी का सहारा लेकर जमीन पर बैठ गये| मैंने तुरंत डॉक्टर गौतम को फोन किया| वे आधे घंटे में आ भी गये और उस दिन से ही मेरे पति गंभीर रूप से बीमार पड़ गये|

जवाहर – आपने स्वेटर धुलवाने की कोशिश नहीं की|

सुनीता– स्वेटर धुलवाया पर धब्बे नहीं मिटे|

जवाहर- और इस गुड्डे की क्या कहानी है?

सुनीता– तीन दिन पहले दुपहर के वक्त एक पैकेट हमें घर के मुख्य द्वार के बाहर पड़ा मिला| हमने चौकीदार से पूछा तो उसने कहा कि न तो कोई उसे पैकेट देकर गया और न ही उसने किसी को अंदर आते देखा| कमला ने भी अनभिज्ञता जाहिर की| पैकेट खोला तो उसमें ये गुड्डा निकला| गुड्डे को देखते ही मेरे पति ने डर के मारे तुरंत उल्टी कर दी| उस दिन से वे बहुत भयभीत हो गये थे| वे टोने टोटके की बातों और इन चीजों से बहुत भय खाते थे|

जवाहर – आपने इस गुड्डे को घर से बाहर नहीं फेंका? या इसे नष्ट करने के बारे में नहीं सोचा?

सुनीता– दरअसल मैं इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज करना चाहती थी| मैंने कमला से इसे स्टोर में अलग रखने के लिए कह दिया था| मुझे लगा कि शायद पुलिस को इसकी जरुरत पड़ेगी| फिर मेरे पति की हालत इस तरह की हो गयी कि वे कुछ भी खाते तो तुरंत उल्टी कर देते थे| उस सबमें इस ओर ध्यान देने का मौक़ा ही नहीं मिला|

सुनीता रोने लगती है|

जवाहर – मैडम, हमें बहुत दुख है कि आपके पति का देहांत ऐसी परिस्थितियों में हुआ| लेकिन पुलिस इस मामले में क्या कर सकती है? कैसे जादू टोने की जांच की जाए? क्या आपको किसी पर शक है जो ऐसा कर रहा हो?

सुनीता – मुझे पूरा विश्वास है कि किसी ने मेरे पति की जान ली है काले जादू को उनके ऊपर छोड़कर| पर मैं किस व्यक्ति पर शक करूँ, यह मुझे समझ नहीं आ रहा|

(शेष)

© …[राकेश]


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