जहाजी इश्क नहीं आसां,
बर्फीले समुद्र में डूब ही जाना है
टाइटेनिक जहाज की असली घटना की कहानी बीसवीं सदी की एक सबसे बड़ी दुर्घटना की कहानी है लेकिन जेम्स कैमरून की फ़िल्म टाइटेनिक इस दुर्घटना का सिनेमाई रूपांतरण होने के साथ साथ, इस आपदा में एक बेहद आकर्षक और रोचक प्रेम कहानी के भी डूबने की कहानी है| इस फ़िल्म के बनने से पहले टाइटेनिक जहाज डूबने की कहानी किस्से से ज्यादा सामान्य ज्ञान के प्रश्नों से भरी कहानी ज्यादा थी| टाइटेनिक फ़िल्म ने उसे एक ऐसा अफसाना बना दिया कि काल्पनिक होते हुए भी फ़िल्म में दिखाई गई प्रेम कहानी उतनी ही सत्य और प्रभावशाली लगती है जैसी कि मुग़ल-ए-आज़म में सलीम अनारकली की प्रेम कहानी|
साइंस फिक्शन के संसार से थोडा से हट कर पिछली सदी में समुद्र में घटी एक सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी पर फ़िल्म बनाने की कल्पना जब जेम्स कैमरून के दिमाग में कौंधी होगी तो वे इस कशमकश में अवश्य ही पड़े होंगे कि जिस घटना/दुर्घटना के बारे में सारी दुनिया जानती है, उसे परदे पर ऐसे कैसे दिखाया जाए कि वह एक डॉक्यूमेंट्री तो लगे ही न बल्कि डॉक्यूड्रामा भी न लगे और एक रोचक और बाँध कर रखने वाली फीचर फ़िल्म बन कर दर्शकों को मोह ले| या तो इसे साहस, भय, रोमांच से भरपूर फ़िल्म बनाई जाए जिसमें टाइटेनिक के डूबने के दृश्यों और उस पर सवार लोगों की मुश्किलों को इस तरीके से दिखाया जाए कि दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाएँ, या तो और भी कुछ जोड़ा जाए| आठ दशकों से ज्यादा साल पहले डूबे जहाज के डूबने की कहानी को परदे पर दुबारा रचने में मॉडर्न तकनीक की बहुत ज्यादा जरुरत पड़नी थी, यह तो भली भांति पता था और यह भी ज्ञात ही था कि इसे परदे पर महागाथा बनाने के प्रयास में यह उस वक्त दुनिया की सबसे महंगी फ़िल्म होने वाली थी|
स्पेस टूरिज्म के साथ जैसा रोमांच वर्तमान दौर में जुड़ा है टाइटेनिक बनानेवालों के दावों ने लगभग वैसा ही माहौल इसकी सवारी करने की इच्छा को पूरा करने वाले समर्थ लोगों के सामने रचा होगा|
दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री जहाज,आधुनिकतम तकनीक से लैस, राजाओं महाराजाओं जैसे एश्वर्या के साधनों से सुसज्जित फर्स्ट क्लास केबिन वाला शिप इस दावे के साथ पानी में उतरा कि यह शिप कभी डूब नहीं सकता! मानव का अहंकार अपने चरम पर था इन दावों के पीछे| चार दिन टाइटेनिक समुद्र का सीना चीरकर अपने अस्तित्व पर गुमान करते हुए अपने सवारों को कुछ अद्भुत पा जाने के भावों से भर कर उन्हें एक विशेष स्थिति में रखकर यात्रा करता रहा| और फिर एक रात, 14 अप्रैल 2012 की रात, 11 बजकर 40 मिनट, जब टाइटेनिक इतनी तेज गति में था कि सामने नज़र आ रहे हिमखंड को देखकर मुड़ नहीं सकता था, हिमखंड से जा टकराया…और 2200 से अधिक इंसानों को ले जा रहा दैत्याकार शिप अपने बारे में किये गए दावों पर खरा नहीं उतरा| बाद की जांचों ने सुरक्षा मानकों से समझौता, एक्सीडेंट के बाद विभिन्न स्तर के यात्रियों में अंतर करने, गरीब कामगारों को मरने के लिए छोड़ देने जैसी अनियमितताओं की बातें सामने आने लगीं| 1000 से ज्यादा यात्री और शिप के कर्मचारी जहाज के साथ ही डूब गए और समुद्र के बर्फीले पानी में कूद गए लोगों में से केवल 700 यात्रियों को बचाया जा सका|
जेम्स कैमरून के सामने यात्रा के चार दिन, एक्सीडेंट और डूबने के 2-3 घंटे और जीवित बचे 700 लोगों के वृतांत में से क्या फ़िल्म में दिखाया जाए, यह प्रश्न रहा होगा|
कैमरून ने शिप पर एक दुनिया बसा दी, और यह दुनिया जमीन पर रहने वाली दुनिया की प्रतिलिपि जैसी ही थी| यहाँ बेहद अमीर, ठीक ठाक अमीर, मध्य वर्गीय और गरीब यात्रियों के लिए शिप पर अलग श्रेणियां थीं, और अलग अलग फ्लोर्स थे, उनका आपस में मिलना मुश्किल रखा गया था| 2200 लोगों पर केन्द्रित कोई कथा नहीं बनती अतः केंद्र में तो चंद चरित्र ही रखने पड़ेंगे जो मानव जीवन के विभिन्न भावों को प्रतिनिधित्व दे सकें|
जेम्स कैमरून की टाइटेनिक की कल्पना न होती तो जोया अख्तर को अपनी फ़िल्म दिल धडकने दो के बहुत से दृश्य न मिलते|
फ़िल्म के शुरू में ही जब टाइटेनिक शिपके दर्शन होते हैं तो पहले क्षण से ही दर्शक को महसूस होने लगता है कि वह किसी विशेष यात्रा पर आ गया है| शिप पर चढ़ते चरित्रों उनके आर्थिक स्तरों और उनके व्यवहार की झलकियाँ मिलनी शुरू हो जाती हैं| और फिर कैमरा सामने लेकर आता है बड़ा सा हैट लगाए नवयुवती के साइड प्रोफाइल को और उसका चेहरा दिखाते हुए जब उसके साथ की स्त्री उसका नाम लेती है तो नाम में क्या रखा है का सिद्धांत गड़बड़ लगने लगता है, ऐसे खिले हुए चेहरे का नाम किसी फूल के नाम का पर्यायवाची ही हो सकता है|
Rose (Kate Winslet) लडकी का नाम है| लडकी अमीर दिखाई देती है लेकिन इसमें भी हाथी के दांत वाला भाव है क्योंकि उसकी माँ उसका विवाह एक बेहद अमीर युवक Cal (Billy Zane) से जबरदस्ती करवा रही है जिसे Rose एक MCP समझती है, और इस रिश्ते से बेहद नाखुश है| उसके धनी मंगेतर के व्यवहार से अहंकार और बाकी दुनिया को तुच्छ समझने का भाव टपकता रहता है|
चार दिन में रोमियो जूलियट जैसी प्रेमकथा का मंचन शिप पर हो ही सकता है| अतः शिप के मंच पर उदय होता है ऊर्जा से भरपूर नौजवान Jack (Leonardo DiCaprio) का| भिन्न आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आये Rose और Jack की प्यार में पड़ने की कहानी, उनका Cal की जकड़न भरी निगाहों से बचकर एक दूसरे के साथ आनंद और आनंद ही बटोरने के प्रयास फ़िल्म में असम्भव को संभव कर देते है| एक बड़ी दुर्घटना की ओर बढ़ रहे शिप पर भी इतनी इंटेंस लव स्टोरी पनप सकती है यह दर्शक की कल्पना में फ़िल्म देखना शुरू करने से पहले बिलकुल भी नहीं होता|
फ़िल्म अपने दो समान्तर संसार स्थापित कर देती है, एक तरह Rose और Jack की प्रेमकहानी वाला संसार है और दूसरा दुर्घटना वाला रोमांच भरा और इन दोनों संसारों को आपस में इस खूबसूरती से जेम्स कैमरून ने मिश्रित किया है कि फ़िल्म देखकर बाहर निकले किसी दर्शक को यह आभास भी नहीं होता कि यह प्रेमकहानी वाला भाग तो कल्पित ही होगा| इस प्रेमकहानी में इतनी सिनेमाई शक्ति है कि टाइटेनिक की पूरी कहानी जानने वाला दर्शक भी अपनी भावनाओं का निवेश इस प्रेमकहानी के दर्शन में कर देता है| क्या युवा प्रेमी बचेंगे, क्या वे बचा लिए जायेंगे, क्या दोनों लडकी के अमीर मंगेतर से लडकी का पिंड छुडवा कर जीवन भर साथ रह पायेंगे|
फ़िल्म इसका जवाब समुद्र के बर्फीले पानी में लकड़ी के एक बोर्ड पर लड़की को चढाते हुए लड़के के बोर्ड के साथ साथ तैरते हुए कहते संवादों के माध्यम से देती है|
भावनाओं के आवेग के बीच चारों ओर सन्नाटा छाना किसे कहते हैं, इसे दर्शक फ़िल्म के इन क्षणों को देखने के बाद महसूस करता है|
झुर्रियों वाले लेकिन एक बेहद आकर्षक चेहरे वाली वृद्ध स्त्री की नीली आँखों में घुसते जाते कैमरे से युवा भूतकाल और भूतकाल से वापिस वर्तमान वृद्धावस्था में आने की जो यात्रा है वह तीन घंटे से ज्यादा समय के लिए एक कल्पना, तकनीक, स्पेशल इफेक्ट्स और बेहतरीन अभिनय की दुनिया में दर्शक को ले जाकर सम्मोहित कर देती है|
शिप की ट्रेजडी के साथ एक प्रेमकथा के ऐसे अंत से भी दर्शक दुखी होकर बाहर आता है तो उसकी बोलने की इच्छा नहीं होती| दुःख उसके अन्दर समा जाता है| कई दिन उसे युवा प्रेमियों के संसार से निकलने में लग सकते हैं| शिप पर उनके किशोर और युवा होने के बीच जैसी ऊर्जा से भरपूर लीला को देख उनके संसार में दर्शक का मन रम जाता है और जैसे शिप के यात्रियों को आने वाले समय का भान नहीं है उसी तरह दर्शक भी सब कुछ जानते हुए भी इनकी प्रेमकथा और इनके खेलों में निवेशित हो जाता है कि फ़िल्म है शायद निर्देशक ने कुछ अलग कहानी सोच रखी हो|
जेम्स कैमरून प्रेमकहानियों और सामाजिक फिल्मों के लिए तो जाने जाते नहीं और इसलिए टाइटेनिक की महत्ता बहुत ज्यादा है कि उन्होंने इस फ़िल्म के अन्दर एक बेहद शक्तिशाली प्रेमकथा आधारित फ़िल्म भी दिखाई| त्रासदी वाले भाग तो उनकी तकनीकी विशेषज्ञता के कारण अपेक्षित ही थे उनसे कि बेहतरीन होंगे लेकिन उन्होंने जो प्रेमकथा दिखाई उसके लिए वे हर तरह की सराहना के अधिकारी हैं|
फ़िल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक फ़िल्म में घट रही घटनाओं का असर बढाता रहता है, और Celine Dion का गाया थीम गीत – My Heart Will Go On फ़िल्म में दुखांत प्रेम कथा के असर को कई गुना बढ़ा देता है|
…[राकेश]
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