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Cinema, Theatre, Music & Literature

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February 2025

अलबर्ट कामू द्वारा अपने शिक्षक को लिखा आभार पत्र

विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक, अल्जीरिया में जन्में और फ़्रांस में वास करने वाले अलबर्ट कामू (7 November 1913 – 4 January 1960) को 1957 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला तो उन्होंने अपने शिक्षक रहे Louis Germain का आभार व्यक्त करने के लिए उन्हें एक खुला पत्र लिखा, क्योंकि... Continue Reading →

एक अभिनेता की डायरी

तकरीबन  19 बरस की उम्र रही होगी जब मेरी शादी हो गयी| मेरी पत्नी की उम्र उस वक्त 17 थी| आजादी के पूर्व के भारत में बड़े होते हुए मैं ब्रितानी संस्कृति से बहुत प्रभावित हो चला था| मैं बढ़िया... Continue Reading →

माँ – अदभुत रूप

काशी दशाश्वमेघ घाट पर अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं, उन्ही में से एक छोटा- सा मंदिर गंगा में अधडूबा सा है, नौका-विहार करते समय एक मल्लाह  ने मुझे उस भग्न अध डूबे मंदिर की कहानी सुनाई| ************************************************************************************************************ एक बूढ़ी विधवा थी,... Continue Reading →

कैसे हो द्वारकाधीश?… पूछती है राधा

स्वर्ग में विचरण करते हुएअचानक एक दूसरे के सामने आ गए विचलित से कृष्ण, प्रसन्नचित सी राधा… कृष्ण सकपकाए,राधा मुस्काई… इससे पहले कृष्ण कुछ कहतेराधा बोल उठी… कैसे हो द्वारकाधीश? जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह के बुलाती थी उसके... Continue Reading →

Tonight I Can Write …Pablo Neruda

Pablo Neruda द्वारा 1924 में लिखे कविता संग्रह [Veinte poemas de amor y una cancion desesperada] का अंगरेजी अनुवाद W. S. Merwin ने 1969 में Twenty Love Poems and a Song of Despair के रूप में किया| उसी अंगरेजी अनुवाद... Continue Reading →

नरेश कुमार ‘शाद’ : परिचय एवं शायरी

हर शब्द का अर्थ ज़रूर होता है, फिर शब्द अगर शब्दों के जादूगरों की कलम की पैदाइश हों तो  तो क्या कहिये! यूँ सभी श्रद्धेय हैं पर आधुनिक युग के ये हजरात – जैसे साहिर लुधियानवी साहिब, कृष्ण बिहारी नूर... Continue Reading →

अभी कई बातें …(Sándor Weöres)

अभी तो कहने को कई बातें शेष हैं, घटनाएं जिन्हें हमने जिया, बातें जो हमने सीखीं, वस्तुएं जिन्हें हमने देखा, और मुलाकातें जो कई बार हुईं और वे मुलाकातें जो हुईं सिर्फ एक ही बार होकर रह गयीं, हर फूल... Continue Reading →

नेकेड लंच : ब्लो डैडी!

Phenomenal Woman : Maya Angelou

अद्भुत स्त्री ---------------------- सुन्दर स्त्रियाँ उत्सुक रहती हैं   जानने के लिए कि कहाँ छिपे हैं मेरे चुम्बकीय व्यक्तित्व के रहस्य? खूबसूरती की उनकी परिभाषा की समझ से मैं किसी भी हिसाब से खूबसूरत नहीं हूँ न ही मैं फैशन मॉडल्स... Continue Reading →

And Still I Rise : Maya Angelou

तुम मुझे पराजित हुआसाबित कर सकते हो स्वयं गढ़े इतिहास के पन्नों मेंअपनी कड़वाहट और तोड़ मरोड़ कर परोसे गए झूठों के जरियेतुम मुझे धूल -धूसरित कर सकते होपर मैं तब भी धूल की तरह ही उठ जाउंगी| क्या मेरी... Continue Reading →

कम्युनिज्म : सआदत हसन मंटो

वह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया| एक ने ट्रक के सामान पर नज़र डालते हुए कहा, ” देखो यार, कितने मजे से... Continue Reading →

सूरज बडजात्या की फ़िल्में और रामायण

''होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन! कह महाशक्ति राम के वदन में हुईं लीन।" [ "राम की शक्तिपूजा" - निराला] सूरज बडजात्या के किरदारों या उनकी कहानी की बात है तो सूरज की प्रेरणा का स्रोत रामायण और राम चरित मानस की कहानी और पात्र रहे हैं।... Continue Reading →

आख़िरी ख़त(1966): दुष्यंत,शंकुतला और भरत मुंबई में

दुष्यंत पर्वतीय अंचल में घूमते-घूमते पहुँच गया| वहां जंगल में उसे सुन्दर, मासूम, और अल्हड़ता से भरपूर जीवन जीती शकुन्तला दिखाई दी| घर में पितृहीन, सौतेली माँ के कटु वचनों से आहत रहती 17-18 साल की गरीब लड़की, जिसके अन्दर... Continue Reading →

Cinema Cinema (1979) : हिंदी सिनेमा का इतिहास

भारतीय जनमानस में फिल्मों का स्थान बेहद महत्वपूर्ण एवं विशेष रहा है, काल कोई भी हो| एक विकासशील या गरीबी से संघर्ष करते देश में गाँवों, कस्बों, छोटे शहरों या मझौले शहरों एवं पूर्व के बड़े शहरों (जैसे दिल्ली ,... Continue Reading →

Welcome To Sajjanpur (2008) : सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य

श्याम बेनेगल की फ़िल्म - Welcome To Sajjanpur (2008) मात्र एक कॉमेडी फ़िल्म न होकर सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य है और एक अच्छे व्यंग्य की तरह सामाजिक विसंगतियों पर हास्य-व्यंग्य के माध्यम से चुटीली चोट करती है| इस फ़िल्म में कथा-पटकथा लेखक अशोक मिश्रा की लेखनी... Continue Reading →

श्याम बेनेगल का भारतीय परिवेश से भरा सिनेमा

श्याम बेनेगल का सिनेमा वर्तमान के "Make in India" नारे पर विशुद्ध रूप से खरा उतरता है| श्याम बेनेगल की विविधता से भरी फिल्मोग्राफी इतनी संपन्न है कि भारत के सामजिक-राजनीतिक इतिहास को देखने, जानने और समझने के लिए दर्शक की... Continue Reading →

The Karate Kid (2010): मार्शल आर्ट गुरु-शिष्य परंपरा

भारतीय मिथक के किस्सों में खोजें तो बहुत से उदाहरण (श्रीराम -ब्रह्मास्त्र, अश्वत्थामा - द्रौपदी पुत्र एवं उत्तरा गर्भ, परशुराम-कर्ण शस्त्र विद्या प्रसंग आदि) मिल जायेंगे जहां युद्ध कला या शस्त्र विद्या के दुरूपयोग से तबाही मची| इसलिए इसके लिये हर काल में कुछ नियम कायदे बनाए गए और... Continue Reading →

Who am I (1998)

जैकी चैन के मनोरंजक सिने संसार में प्रवेश करने का कार्य इस फ़िल्म के माध्यम से पूरा किया जा सकता है| इस फ़िल्म में कई फिल्मों को देखने का आनंद प्राप्त होता है| इसमें स्पाई फिल्मों की रहस्यमय दुनिया है, साजिशें... Continue Reading →

Khosla Ka Ghosla (2006) : भू-माफिया से ठगी

18-19 साल का अरसा बड़ा होता है एक फ़िल्म के पुराने पड़ जाने, और विषय के बासी हो जाने के लिए, लेकिन अपने बहुत से गुणों के कारण दिबाकर बनर्जी की अभी तक की सबसे अच्छी फ़िल्म खोसला का घोसला ने अपना जादू... Continue Reading →

अमिताभ बच्चन-यश चोपड़ा: अभिनेता-निर्देशक गठबंधन

अभिनेता अमिताभ बच्चन और निर्देशक यश चोपड़ा की जोड़ी ने हिंदी फिल्मों के लिए एक बहुत ही उपयोगी संयोजन प्रस्तुत किया है| 1975 से 1981 के बीच इस जोड़ी ने जिन पांच फिल्मों दीवार, कभी कभी, त्रिशूल, काला पत्थर और सिलसिला में काम किया और इन पाँचों फिल्मों में अमिताभ ने नायक... Continue Reading →

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