इस बात का बड़ा भारी शोर सुना जा रहा है कि पढ़ने वाले नौजवान(विद्यार्थी) राजनीतिक या पोलिटिकल कामों में हिस्सा न लें। पंजाब सरकार की राय बिल्कुल ही न्यारी है। विद्यार्थी से कालेज में दाखिल होने से पहले इस आशय की शर्त... Continue Reading →
श्री संपादक जी,माडर्न रिव्यू, आपने अपने सम्मानित पत्र के दिसंबर, १९२९ के अंक में एक टिप्पणी “इंकलाब जिन्दाबाद” शीर्षक से लिखी है और इस नारे को निरर्थक ठहराने की चेष्टा की है। आप सरीखे परिपक्व विचारक तथा अनुभवी और यशस्वी... Continue Reading →
प्रिय भाई, मुझे दंड सुना दिया गया है और फ़ांसी का आदेश हुआ है। इन कोठरियों में मेरे अतिरिक्त फ़ांसी की प्रतीक्षा करने वाले बहुत से अपराधी हैं। ये लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि किसी तरह फ़ांसी से... Continue Reading →
सारे दिन उदास रहने के बादशाम भी अगर उदासी में गुजर जायेऔर हर पलअपनी खामोशी मेंठहर जायेतो लगता है किज़िंदगी का सबसे संवेदनशील हिस्साबगैर छटपटाए मर गया हैया फिरज़िंदगी की नस-नस मेंतेज ज़हर भर गया है। मैं नहीं जानता मेरे... Continue Reading →
विश्व प्रसिद्द चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने तूलिका के स्थान पर कलम हाथ में थामी अपने अन्दर उभरती भावनाओं को इस बार काव्य का आकार देने के लिए| विश्व कविता दिवस पर उनकी कविता का उल्लेख प्रासंगिक है...
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन जी ने एक कविता लिखी थी – वात्स्यायन जी की बहुत सी लघु कवितायेँ बड़े और गहरे प्रभाव वाली हैं| उनके रचनात्मक वर्षों में उनकी कविताओं, और अन्य विधाओं के लेखन पर पर्याप्त चर्चाएँ होती ही होंगी, समीक्षाएं और... Continue Reading →
कहानी आधारित प्रसिद्द त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका - निकट, ने बीते साल 2024 का अपना अंतिम अंक प्रसिद्द साहित्यकार 'प्रियंवद' के रचनाकर्म पर आधारित किया है| हिंदी साहित्य पढने वालों में से बहुतों ने शायद प्रियंवद का रचा पढ़ा न हो... Continue Reading →
बॉलीवुड की चमक फीकी पड़ती जा रही है, इसकी जगह एक कठोर वास्तविकता ने ले ली है कि यह एक ऐसे संकट से घिर गया है जो इसने खुद ही पैदा किया है। अत्यधिक बजट में चौंका देने वाला सबसे... Continue Reading →
प्रतीत तो ऐसा ही होता हैरचनाकार को कि उसके द्वारा ही रचा जा रहा हैपर क्या रचने वाला वास्तव में रचनाकार का “मैं” ही होता है?तब,कभी एक बाल मन,कभी एक किशोर मन,कभी एक युवा मन,कभी एक प्रौढ़ मन,और एक... Continue Reading →
7 अक्तूबर 1914 को जन्मीं अख्तरी बाई फैजाबादी 13 वर्ष की आयु की ही थीं जब एक कामांध धनपशु ने उन्हें यौनहिंसा का शिकार बनाया| उस दुर्घटना के फलस्वरूप उत्पन्न कन्या को बहुत सालों तक अख्तरी बाई की छोटी बहन... Continue Reading →
चिड़चिड़ा बूढ़ा आदमी (Cranky Old Man) ---------------------------------------------- नर्स, तुम मेरी ओर देखती हो... तुम क्या देखती हो? मेरी तरफ़ देख कर तुम क्या सोचती हो? क्या मैं तुम्हें एक चिड़चिड़ा बूढ़ा आदमी दिखाई देता हूँ? जो बहुत समझदार नहीं है,... Continue Reading →
यूँ ही एक शाम मैं अपने मेट्रोपॉलिटन शहर की भीड़ भरी सड़कों पर पार्टी मनाने के लिए अपनी एक सहेली के साथ निकल पड़ी! वे बड़ी संख्या में आए और हमारे शरीर का उत्पीड़न करने लगे, लेकिन अपनी सुरक्षा की... Continue Reading →
सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं, नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया। एक बात पूछूँ-- (उत्तर दोगे?) तब कैसे सीखा डसना... विष कहाँ पाया?
कविता – असाध्य वीणा, विचार, कल्पना, और भाषा तीनों के स्तर पर एक अनूठी कविता है| कविता बेहद खूबसूरत विम्ब रचते हुए आगे बढ़ती है और पाठक को सम्मोहित करके अपने खूबसूरत संसार में खींच ले जाती है और जब तक... Continue Reading →
इससे पहले कि मैं कविता शुरु करुँमैं अपने साथ ले जाना चाहता हूँ तुमकोमौन के क्षण में,उन सब लोगों के सम्मान मेंजो मारे गये वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मेंऔर पेंटागन मेंपिछले सितम्बर की 11 तारीख को। मैं गुज़ारिश करता हूँ तुमसेमौन... Continue Reading →
भारत के गौरव गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर, एक मानवतावादी, प्रकृतिविद, कवि, चित्रकार, संगीतकार, लेखक, शिक्षाविद, और भारतीय संस्कृति एवम कला के ध्वजवाहक रहे हैं, वे देशों की सीमाओं को पार कर गये हैं और पिछले सौ सालों से भी ज्यादा समय से... Continue Reading →
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