भारतीय संस्कृति ने सदा जनमानस में कविता, दर्शन और गायकी द्वारा रंग, उमंग और उल्लासमयी जीवन भरे हैं। अनेकता में एकता के नूर की यह शहदीय बूँद बंटवारे की राजनीति की एंटीडोट है। भारत की मिश्रित संस्कृति के सुनहरे आकाश पर सूफियत और प्रेम के जगमग सितारों में से एक हज़रत नजीर अकबराबादी 18वीं सदी में पुरनूर थे। उनकी रचनायें उस धवल दौर का सच्चा प्रतिबिम्ब हैं जिसमें अन्य सम्प्रदायों के उत्सवों के उल्लास के साथ होली की रंगीनियाँ भी बराबर की भागीदार हैं।

होली के रसमय और रंगमय दिन के लिए उनकी होली सम्बंधित रचनाओं में से एक नज़्म प्रस्तुत है। जिसे छाया गांगुली ने किस खूबसूरती के साथ अपनी गायिकी से सजाया है!


Discover more from Cine Manthan

Subscribe to get the latest posts sent to your email.