अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

जिगर मुरादाबादी का उपरोक्त शेर रॉ अधिकारी हिम्मत सिंह के चरित्र पर बखूबी फबता है| हिम्मत सिंह की शख्सियत मिथकीय गुणों वाली है| उनके गुण, उनका स्वभाव, उनकी बुद्धिमत्ता, उनका धैर्य, उनका लचीला पन और उनकी तात्कालिकता, इस स्तर के हैं कि हिम्मत सिंह अगर वाकई देश की ख़ुफ़िया एजेंसी में कार्यरत हों तो देश के नागरिक पूरे भरोसे से जी सकते हैं कि देश की सुरक्षा एकदम सही हाथों में है| देश का तंत्र जितना सड़ चुका है, जितनी लालफीताशाही है, उस कठिनाई के सामने जिस तरीके से हिम्मत सिंह अचल खड़े रहते हैं उसके लिए ही अमजद नजमी की एक ग़ज़ल का एक शेर मौजूं बैठता है|

हज़ार राह में आया करें नशेब-ओ-फ़राज़
मज़ा तो जब है कि टूटे न हिम्मत-ए-तग-ओ-ताज़
(~अमजद नजमी)

राह में कितनी मुश्किलें आ जाएँ, हिम्मत सिंह हिमालय की तरह अविचलित खड़े रहते हैं और सर्वाधिक परेशानी के दौर में भी आत्मविश्वास से लबरेज हो बड़े धैर्य से शांत दिमाग से निर्णय लेकर समुचित सक्रियता दर्शाते हैं| ऐसा कुछ नहीं है जो उन्हें उनके कर्तव्य पथ से हटा सके| वे हरदम सिर्फ संभव राह की खोज में रहते हैं|

हिम्मत सिंह के सारे व्यक्तित्व और गुणों के 30-40 % गुणों वाले प्रबंधक भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों में हों तो भारत आतंकवाद, और अपराध की बीमारियोंसे बहुत हद तक मुक्त हो जाए|

राजकुमार और नाना पाटेकर अभिनीत एक बेहद सफल फ़िल्म है – तिरंगा, उसमें ब्रिगेडियर सूर्य प्रताप सिंह बने राजकुमार तुरंत एक्शन लेने को तैयार अपने युवा साथी (नाना पाटेकर) से कहा करते हैं,” हमारा उसूल है, पहले बात, फिर लात“| हिम्मत सिंह का दर्शन भी बिलकुल वैसा ही है कि जब तक बात से काम चल जाए तब तक लात को पेवेलियन में आराम करने दो, मैदाने जंग में खेलने न भेजो|

Special Ops के ढांचे की रीढ़ हिम्मत सिंह का किरदार है, और शो को अच्छा या औसत, ज्यादा या कम आकर्षण वाला शो बनाने की 75% जिम्मेदारी भी इसी चरित्र के कन्धों पर है और इस नाते यह दायित्व हिम्मत सिंह को निभाने वाले अभिनेता के.के. मेनन के ऊपर है|

के.के.मेनन ने हिम्मत सिंह को केवल निभाया ही नहीं है बल्कि एक एवरेस्ट जैसी उंचाई वाला सिनेमाई किरदार भारतीय सिनेमा के सामने ला खड़ा किया है, जिसने ओ टी टी पर हाल के वर्षों में ऐसे स्वभाव वाली जासूसी थ्रिलर श्रंखलाओं के नायकों के सामने बहुत बड़ी समस्याएं खडी कर दी हैं, न केवल के के मेनन ने बाकी सारे अभिनेताओं के ऐसी श्रंखलाओं में नायकीय चरित्रों में किये अभिनय को पीछे छोड़ दिया है बल्कि उनके सामने बेहतरीन अभिनय का बहुत ऊँचा स्तर सामने रख दिया है| Specal Ops 1.5 में युवा हिम्मत सिंह के रूप में बहुत अच्छे प्रोस्थेटिक मेकअप की कमी को उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से इतना ढक दिया है कि सिनेमा के जनक और धुरंधर शोधार्थी लोग ही चेहरे पर लगी परतों की थाह ले पायेंगे और उन्हें भी यह तथ्य इसलिए विचलित नहीं करता क्योंकि के .के. मेनन अपने अभिनय की खूबसूरती के सम्मोहन से दर्शक को हटने ही नहीं देते |

ख़ुफ़िया तंत्र के एक बेहद शार्प प्रबंधक के सारे गुणों को परदे पर अत्याधिक सटीक अभिनय से विस्तार देने के अलावा के.के मेनन ने हिम्मत सिंह के मानवीय गुणों को जो गरिमामयी सिनेमाई उपस्थिति प्रदान की है, उसने इस श्रंखला को बहुत ऊँचे स्तर का बना दिया है| हिम्मत सिंह के मानवीय रिश्तों में भावनाओं को के.के मेनन ने इस तरह निभाया है कि हिम्मत सिंह की भावनाओं के बहाव के साथ दर्शक बहता चला जाता है| हिम्मत सिंह प्रसन्न हैं तो दर्शक की मुस्कान उसके कानों तक खिंची रहती है, जीवन के दुःख से दुखी हिम्मत सिंह के भीगी आँखें दर्शक की आँखें भी भिगाती जाती हैं, हिम्मत सिंह की परेशानियों में हिम्मत सिंह से ज्यादा खिन्नता दर्शक के अन्दर पनपने लगती है, यही किसी बहुत बड़े चरित्र का जब सिनेमा के परदे पर जन्म होता है तब दर्शकों के साथ हुआ करता है| वर्तमान युग में एक विचित्र नाम लगते हिम्मत सिंह को कालजयी दर्जा मिल चुका है|

हिम्मत सिंह की लगातार खतरों से जूझती अपनी टीम के प्रति अभिभावक जैसी भावनाएं तो दर्शकों को प्रभावित करती ही हैं, हिम्मत सिंह से तीन चरित्रों के रिश्ते जिस रूप में दर्शकों के सामने आते हैं वह हिम्मत सिंह के मानवीय रूप को गहराई दे जाते हैं| उनसे अपने निजी संबंधों के सम्मान हेतु हिम्मत सिंह सारे प्रोटोकॉल्स को दरकिनार कर उनके सुरक्षा और निजता की देखभाल करते हैं| जोखिम भरे ऑपरेशन से पहले उन्हें चेताना कि उन्हें अपनी टीम के सभी सदस्य जीवित चाहियें, उन्हें एक आदर्श नेतृत्व वाला प्रबंधक बनाते हैं| मृत हो गए टीम के सदस्य की मृत काया को सारे खतरे उठाकर भी भारत वापिस लाने का प्रबंध करना हिम्मत सिंह के चरित्र को बहुत मजबूती से दर्शकों के बीच स्थापित कर देता है|

एक हैं दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर अब्बास (विनय पाठक) का चरित्र, जो धीरे-धीरे हिम्मत सिंह के बेहद करीब आ जाता है और यहाँ तक कि हिम्मत सिंह की भाव भंगिमाओं से ही बात समझ जाता है| हिम्मत सिंह अब्बास के लिए केवल एक वरिष्ठ पद का अधिकारी ही नहीं रह जाता वह हिम्मत सिंह के प्रति बहुत सम्मान की भावना रखता है, और उसे अक्सर तब गहरी ठेस लगती है जब जब हिम्मत सिंह अपने निजी जीवन पर खतरे की बातें अनर्गल समझ उसे इन सबके बारे में सूचित नहीं करते| विनय पाठक और के.के मेनन के बीच उच्च स्तरीय अभिनय का एक जबरदस्त सामंजस्य बैठ गया है| दोनों कदमताल करते दिखाई देते हैं जहाँ प्रतियोगिता नहीं वरन एक साथ ऊँचे स्तर पर खेलना दिखाई देता है|

हिम्मत सिंह की भावनाओं के समुद्र में ज्वार भाटा लाने वाला एक ही चरित्र है, परी का, जो उनकी बेटी है| हिम्मत सिंह और परी के बीच परदे पर वास्तविक पिता-पुत्री जैसा रिश्ता बसा दिखाई देता है, जिसके लिए के.के मेनन और रेवती पिल्लई दोनों ही कलाकार हर संभव तारीफ़ के अधिकारी हैं| इस रिश्ते के कारण हिम्मत सिंह के जीवन में आये भय को दर्शक जब महसूस करके देखता है और ऐसी घड़ियों में देखता है जब हिम्मत सिंह अपने कर्तव्य पथ पर सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं, तो हिम्मत सिंह की तरह दर्शक भी दो पाटों के बीच पिसने लगता है, न वह हिम्मत सिंह के निजी जीवन में हानि देखना चाहता है न उसे हिम्मत सिंह के कर्तव्य के रास्ते पर चलने पर हार चाहिए| पिता-पुत्री के आपसी रिश्ते में आये दुःख की घड़ियों को जैसे यह श्रंखला (और के.के.मेनन एवं रेवती पिल्लई) दर्शाती है वैसा भावनाओं पर आधारित बहुत सी फिल्में नहीं कर पातीं|

निजी दुःख और मसलों से निकल कर पुनः कर्तव्य पथ पर आने में बस एक पलक झपकने जितना समय हिम्मत सिंह लेते हैं और के. के. मेनन ने भावनाओं के इस ऑन ऑफ़ मोड़ को बखूबी प्रदर्शित किया है|

हिम्मत सिंह जिसे नज़रंदाज़ न कर सकें, ऐसा एक चरित्र Special Ops 2 में श्रीनिवास (प्रकाश राज) के रूप में सामने आता है| प्रकाश राज को देख ऐसा ही लगता है कि एकाएक इस श्रंखला में प्रवेश करने वाले चरित्र के लिए वे इस श्रंखला के पहले और डेढ़ सीज़न के समय से ही तैयार थे कि जब भी अवसर मिलेगा वे मैदान पर जाकर अपने अभिनय का जलवा दिखा देंगे| के.के.मेनन और प्रकाश राज के बीच के दृश्य, जो संख्या में बहत कम हैं, परदे पर चमक और गर्जना के साथ होने वाली पहाड़ों की मूसलाधार बारिश जैसे हैं| प्रकाश राज के चरित्र को हिम्मत सिंह अपने एक जानदार संवाद के जरिये जीवंत कर देते हैं, जब अब्बास के पूछने पर वे कहते हैं,” हम सबका बाप है“|

के.के.मेनन ने अभी तक सिनेमा के परदे पर गालियाँ देने से परहेज ही किया है और मनोज बाजपेयी, विजय राज के साथ किसी संयुक्त साक्षात्कार में उन दोनों द्वारा धाराप्रवाह गालियाँ देने की क्षमता दर्शाने के उलट के.के.मेनन बहुत असहज थे जिससे निश्चित ज्ञात होता था कि उन्होंने वास्तविक जीवन में गालियों से दूरी बना कर रखी है| इस श्रंखला में के.के.मेनन अपने लगाए प्रतिबन्ध को हटाकर कई बार अवसर के अनुसार गालियों का सहारा लेते हैं|

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अमेरिका की शक्ति का सही आंकलन किया जाए तो उसकी वास्तविक शक्ति तो जो होगी सो होगी लेकिन उसकी शक्ति की विराट छवि बनाने में हॉलीवुड सिनेमा का बहुत बड़ा हाथ है| हॉलीवुड ने अमेरिका को धरती का रक्षक ही नहीं बना दिया बल्कि सारी दुनिया में सबसे शक्तिशाली होने का सुयोग्य पात्र भी बना दिया है| यह अलग बात है कि असल जीवन में सर्वशक्तिमान की छवि वाले देश को अपने यहाँ आतंकी आक्रमण करने के जिम्मेदार लादेन को ढूँढने और मारने में 10-11 साल का समय लग गया जबकि हॉलीवुड इसको अपने हाथ में लेता तो सिनेमा में लादेन 2002 तक 1 ही साल में ढूंढ कर मार दिया जाता|

Special Ops श्रंखला भारत के लिए वही छवि निर्माण करने के पथ का आरम्भ करती है जिसे अमेरिका के लिए हॉलीवुड दशकों से करता आ रहा है| ऐसी श्रंखलायें या फ़िल्में अगर नियमित अंतराल पर बनती रहें तो भारतीयों का अपनी एजेंसियों पर और बाकी देशों का भारत की शक्ति के प्रति विश्वास बढेगा| ऐसे सिनेमाई कार्यक्रम सॉफ्ट पॉवर में बढ़ोत्तरी करते हैं यह सिद्ध हुआ है बार बार|

Special Ops श्रंखला की प्रोडक्शन वेल्यूज हॉलीवुड सरीखी उन्नत अवस्था में हैं, और यह एक विशाल फलक वाली श्रंखला है, जिसमें एक उच्च स्तरीय स्पाई, एक्शन थ्रिलर के सारे गुण मौजूद हैं और जो दुनिया के किसी देश के सिनेमा को टक्कर दे सकती है|

चरित्रों के अनुकूल अभिनेताओं के चयन में श्रेष्ठता यह श्रंखला दिखाती है|

नीरज पांडे ने विश्व स्तरीय श्रंखला बना कर दिखा दी है जिसके लिए वे प्रशंसा और साधुवाद के पात्र हैं| उनकी निर्देशकीय कल्पना की साख इस श्रंखला से बहुत बढ़ी है|

कुछ स्पष्ट कमियों को दुरुस्त किया जाता तो और बेहतर समां बंधता| इस नए व दूसरे सीज़न में कमियां पहले और डेढ़ सीज़न के मुकाबले थोड़ी ज्यादा हैं|

…[राकेश]

(Text) © CineManthan & Rakesh


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