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Cinema, Theatre, Music & Literature

Category

Literature

सहज विश्राम – ओशो + टैगोर

हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलतेअब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते (~इक़बाल अज़ीम) आधुनिक युग में जीवन की आपाधापी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि मेट्रो या बड़े नगरों की बात नहीं वरन छोटे शहरों, कस्बों... Continue Reading →

वह भी देखेगा सुखद सपने?

मेरी राम कहानी…

© कृष्ण बिहारी

एक यक्ष प्रश्न है …

सावित्री मंदिर … पुष्कर

नेताजी सर्वधर्मसमभाव वाले

 © Krishna Bihari

विनोद कुमार शुक्ल  के घर जो न जा पाएंगे

छोटी मगर गहरे भाव और अर्थ अपने में समाहित की हुयी कविता का उदाहरण देखना हो तो प्रसिद्ध लेखक विनोद कुमार शुक्ल की कविता “जो मेरे घर नहीं आयेंगें” तुरंत सामने आ जाती है| उनकी कविता दृश्यात्मक होते-होते एक अन्य दिशा पकड़... Continue Reading →

M F Husain : The White

हुसेन साहब के जलवे प्रदर्शनी का शीर्षक था - श्वेताम्बरी ! हुसेन साहब तब जॉन एलिया की नज़्म - रम्ज़ भी गुनगुना सकते थे | तुम जब आओगी तो सोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ... Continue Reading →

गरीब बीड़ी और इसके धनी भाई बहन और विज्ञापन जगत

"धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है" जैसी वैधानिक चेतावनी उपभोक्ता के दिमाग में प्रविष्ट कराई जाए ऐसी प्रथा पहले नहीं होती थी| बीड़ी, तंबाकू को तेंदू पत्ते में लपेटकर बनाई जाती है, और यह भारत में एक लोकप्रिय तंबाकू उत्पाद... Continue Reading →

कुमार गन्धर्व : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

कुमार गन्धर्व का गायन सुनते हुए ... (सर्वेश्वरदयाल सक्सेना) https://youtu.be/fls_YUpVbvs?si=_24Cccm7-bf9Ltly

कृष्ण — (नज़ीर अकबराबादी)

~ (नज़ीर अकबराबादी)

कृष्ण कन्हाई… (हसरत मोहानी)

Ref. Hazrat Maulana Hasrat Mohani, Poem 2 (2 October 1923; Dīvān 8)

एक सिरे से दूसरे सिरे तक – 1984 सिख विरोधी हिंसा

कुछ कहानियां पाठक को सन्नाटे के बियाबान में ले जाकर छोड़ देती हैं, जहाँ से उसे अपनी क्षमता के अनुसार इसके प्रभाव से बाहर आने में सफलता मिल पाती है| हिंसा के बारे में हरेक के किसी न किसी किस्म... Continue Reading →

पेड़ -आसमान -धरती

चन्द्रशेखर आजाद : क्रान्ति दूत

प्रसंग सन्दर्भ   - क्रांतिकारी आन्दोलन आधारित साहित्य (यशपाल) https://www.youtube.com/watch?v=bdszG4EwgdE

शैलेन्द्र : गीतकार की अमीरी-गरीबी, तीसरी कसम और मृत्यु

मजरुह सुल्तानपुरी को 1994 में दादा साहेब फालके पुरस्कार दिया गया तो उनकी आयु उस वक्त तकरीबन 75 साल की थी और फिल्मों में गीत लिखते हुए उन्हें लगभग 50 साल हो चुके थे| इस अवसर पर दूरदर्शन को साक्षात्कार... Continue Reading →

IITs से दशकों पुराने भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान

भारत में ब्रितानी राज के दौर में द्वितीय विश्व युद्ध के समय वायसरॉय की एक्जीक्यूटिव काउन्सिल में शिक्षा समिति के एक सदस्य थे श्री एन आर सरकार| 1945 में श्री सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें आईआईटी की अवधारणा... Continue Reading →

दो औरतें : हिंदी साहित्य में हंगामा मचाने वाली कहानी

पिछली सदी के आख़िरी दशक के मध्य में आबू धाबी में हिन्दी अध्यापन के माध्यम से जीविकोपार्जन करते और लगातार लेखन के माध्यम से जीवन को रचनात्मक सृजन की ऊर्जा से सींचते कृष्ण बिहारी छुट्टियों में भारत आये तो दिल्ली... Continue Reading →

कसौटी ‘सच्चे मित्र’ की

उस दिन संत सिद्धार्थ आये तो हाथ जोड़कर उपस्थित जनों के अभिवादन का उत्तर दिया और अपने स्थान पर शांत बैठ कर सभी की ओर देखने लगे| वे बहुत देर तक मौन रहे| उनके मौन दृष्टिपात की तीव्रता लोगों से सहन... Continue Reading →

Shailendra A Love Lyric in Print : A Daughter Remembers

असमय मात्र 43 साल की आयु में मृत्यु हो जाने से या उनके द्वारा रचे गए उच्च गुणवत्ता के गीतों की उपस्थिति से, कारण जो भी रहा हो, गीतकार शैलेन्द्र को हिंदी फिल्मों के संगीत के रसिक लोग फ़िल्म बरसात... Continue Reading →

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