राघव मेनन , Published in सारिका 1981
होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →
...[राकेश] सन्दर्भ : बलवंत गार्गी के पंजाबी और अंगरेजी में लिखे एक संस्मरण पर आधारित Paintings - Amrita Sher-Gil (Nude Self portraight) Vincent Von Gogh (Old shoes) Satish Gujral (Mural at Delhi High Court)
ख़ुदा की उस के गले में अजीब क़ुदरत हैवो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है ~ बशीर बद्र
First Published in - हमारे युग का खलनायक राजेंद्र यादव (संपादक - भारत भारद्वाज, साधना अग्रवाल), 2003 © कृष्ण बिहारी
प्रख्यात लेखक, नाट्य एवं फिल्म निर्देशक, व अवसरानुकूल अभिनेता श्री रंजीत कपूर की यह पहली प्रकाशित कहानी है जो अप्रैल 1969 में हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक पत्रिका सारिका में छपी थी| लेखक कमलेश्वर ने 1967 से तकरीबन 11 साल तक... Continue Reading →
---------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 6 ----------------------- सेवानिवृत्ति के बाद माथुर साहब अधिक समय तक अशोकनगर आते रहे. एक बार बसंत पंचमी के दिन वह वही थे. उन्हें स्मरण हुआ कि बसंत पंचमी के दिन तो महाप्राण निराला का जन्मदिन... Continue Reading →
----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 4 ----------------------- एम.ए. हिंदी करतें समय मुझे गुना कॉलेज के प्रो कांति कुमार जैन का मेसेज मिला की दों दिन बाद मुझे हिंदी विषय का शोध निबंध (dissertation) - "गिरिजा कुमार माथुर का काव्य शिल्प"... Continue Reading →
----------------------- लम्हों में ज़िन्दगी - 2 ----------------------- अशोकनगर के रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठे हुए गिरिजा कुमार माथुर साहब मुझसे अपने अतीत की स्मृतियों को साझा करने लगे| उन्होंने बताया कि पचास के दशक में वह न्यू यॉर्क में... Continue Reading →
किसी दार्शनिक ने कहा है -- 'यह मत देखो कि ज़िन्दगी में कितने लम्हे हैं… यह देखो कि लम्हों में कितनी ज़िन्दगी है | पचास बरस पहले मुझे माथुर साहब से मिलने का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा. और उन से... Continue Reading →
मुझे एक युवक याद आते हैं| उनका नाम सुभाष चंद्र बोस था। वे एक महान क्रांतिकारी बने और मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है, क्योंकि वे भारत में एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने महात्मा गांधी का विरोध किया; वे देख सकते थे... Continue Reading →
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