उस दिन संत सिद्धार्थ आये तो हाथ जोड़कर उपस्थित जनों के अभिवादन का उत्तर दिया और अपने स्थान पर शांत बैठ कर सभी की ओर देखने लगे| वे बहुत देर तक मौन रहे| उनके मौन दृष्टिपात की तीव्रता लोगों से सहन... Continue Reading →
एक ही काल, समय और स्थान पर उपस्थित सभी मानवों के ऊपर एक ही बात का असर एक जैसा नहीं होता| एक ही कृत्य में सम्मिलित सभी कर्मियों का योगदान एक समान नहीं होता, बाहर से भले ही एक जैसा... Continue Reading →
विश्व प्रसिद्द चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने तूलिका के स्थान पर कलम हाथ में थामी अपने अन्दर उभरती भावनाओं को इस बार काव्य का आकार देने के लिए| विश्व कविता दिवस पर उनकी कविता का उल्लेख प्रासंगिक है...
शिव कोई पुरोहित नहीं है। शिव तीर्थंकर हैं। शिव अवतार हैं। शिव क्रांतिद्रष्टा है, पैगम्बर है। वे जो भी कहेंगे, वह आग है। अगर तुम जलने को तैयार हो, तो ही उनके पास आना; अगर तुम मिटने को तैयार हो, तो ही उनके निमंत्रण को स्वीकार करना। क्योंकि तुम मिटोगे तो ही नये का जन्म होगा। तुम्हारी राख पर ही नये जीवन की शुरुआत है।
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