विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक, अल्जीरिया में जन्में और फ़्रांस में वास करने वाले अलबर्ट कामू (7 November 1913 – 4 January 1960) को 1957 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला तो उन्होंने अपने शिक्षक रहे Louis Germain का आभार व्यक्त करने के लिए उन्हें एक खुला पत्र लिखा, क्योंकि उनके अनुसार ये उनके शिक्षक ही थे जिन्होने कामू के अंदर छिपी लेखकीय प्रतिभा को पहचाना और प्रोत्साहित किया और इसी कारण वे बाद में विश्व भर में सम्मान पाने वाले उपन्यासों और निबन्धों की रचना कर सके|
उल्लेखनीय है कि कामू जब शैशवावस्था में ही थे तभी उनके पिता प्रथम विश्व युद्ध में मारे जा चुके थे और उनकी माँ आंशिक रूप से बधिर और अशिक्षित थीं|
प्रस्तुत है कामू दवारा अपने शिक्षक को 19 November 1957 को लिखे पत्र का हिन्दी अनुवाद :-
Dear Monsieur Germain,
इन दिनों मेरे गिर्द बहुत कुछ घटा और मैं इससे उत्पन्न हलचलों को शांत होने का इंतजार करने के बाद अब मुझे लगता है कि बहुत हद तक अब सामान्य स्थिति आ गयी है तो मैं आज अपने हृदय की गहराइयों से आपके प्रति आभार प्रकट करने की उत्कट इच्छा के आवेग के आपको लिख रहा हूँ| मुझे हाल ही में एक महान पुरस्कार से सम्मानित किया गया है| मैंने न तो इस पुरस्कार की कभी कामना की थी और न ही मैं अपने को इसके योग्य पाता हूँ|
जब मैंने अपने लिए इस बड़े पुरस्कार को दिए दिए जाने की घोषणा सुनी तो मेरे अन्दर अपनी माँ के बाद मुझे आपके प्रति कृतज्ञता का भाव उमड़ आया| आपके बिना, आपके प्रोत्साहन भरे और स्नेहमयी सहारे के बिना और आपके दवारा मुझे उदारतापूर्वक दी गई शिक्षा के बिना मुझ जैसा गरीब बच्चा आज यह सब नहीं पा सकने की हालत में कदापि नहीं पहुँच सकता था|
मैं इस सम्मान पर बहुत ज्यादा ध्यान केन्द्रित नहीं करना चाहता लेकिन इसने मुझे यह अवसर तो दिया ही है कि मैं अपने ह्रदय में आपके स्थान के बारे में अपने भाव आपसे साझा कर सकूं| आप मेरे लिए हमेशा से ही बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं और आज भी हैं| मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपने जो प्रयास स्कूल में पढ़ रहे एक छोटे बालक को शिक्षा और ज्ञान ग्रहण करने के मार्ग पर सुचारू रूप से चलाने के लिए किये थे और जिस कार्य में आपने अपना पूरा उदार हृदय उड़ेल दिया था, उन सब प्रयासों के प्रति आपका यह शिष्य आज भी आपका आभारी है और सदैव रहेगा|
आपके प्रति कृतज्ञ भावों से भरे ह्रदय से मैं आपको गले लगाना चाहता हूँ|
अलबर्ट कामू
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