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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

Category

Hindi

Mandi (1983)

हिंदी सिनेमा में तवायफों के जीवन को हमेशा ही बहुत ग्लैमराइज़ किया गया था| श्याम बेनेगल ने हिंदी सिनेमा के उस तरीके से उलट 1983 में मंडी बनाकर प्रदर्शित कर दी और इसे देखना तवायफों का जीवन श्याम बेनेगल की... Continue Reading →

Panic Room (2002)

David Fincher  की फ़िल्म - Panic Room, दर्ऊशक को लगातार तनाव में रखने वाला थ्रिलर है, जो एक स्त्री चरित्र के साहस, मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखकर उसकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक दृढ निश्चय कि वह अपनी... Continue Reading →

Gone Girl (2014)

David Fincher की यह फ़िल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर के रूप में फ़िल्म शानदार है| फ़िल्म निर्माण के दौरान अभिनेतागण निर्देशक के हाथ की कठपुतलियां होते हैं तो यह फ़िल्म दर्शाती है कि फ़िल्म बनकर प्रदर्शित होने के बाद, एक बहुत अच्छी... Continue Reading →

The Killer (2023)

The Killer को David Fincher द्वारा Organized Crime के संसार पर प्रस्तुत एक श्वेत पत्र माना जा सकता है| एक तो फ़िल्म अपराध के इस संसार को एक सफल कॉर्पोरेट की तरह संगठित एवं संयोजित रूप से कार्यान्वित दिखाती है,... Continue Reading →

चाय के बहाने (चिंटूजी 2009)

अंतरे जैसे मुखड़े से शुरू होकर गीत में तीन अंतरे और हों तो यह तो स्पष्ट ही है कि 2009 में प्रदर्शित फ़िल्म - चिंटूजी में इस गीत का अस्तित्व ऐसे ही समय काटने के लिए नहीं है, बल्कि गीत... Continue Reading →

36 Ghante (1974)

थ्रिलर फ़िल्म की सफलता इस बात में है कि परदे पर घटित हर बीतते पल दर्शक को असमंजस में डाले रखे कि आगे क्या होगा या अगर दर्शक कुछ चाह रहा है किन्हीं चरित्रों की तरफ से तो वैसा घटित... Continue Reading →

Khoj (1989)

रामसे परिवार के केशु रामसे द्वारा निर्देशित खोज एक ब्रिटिश फ़िल्म पर आधारित है| मूल ब्रितानी फ़िल्म पर बहुत सी भारतीय भाषाओं में फ़िल्में बनी| रामसे ब्रदर्स फ़िल्म निर्माण फैक्ट्री की यह इकलौती फ़िल्म होगी जिसमें भूत या चुड़ैल का मुखौटा नहीं... Continue Reading →

यश चोपड़ा की फ़िल्मी शरारतें

...[राकेश]

Ittefaq (1969)

जिस मर्डर मिस्ट्री थ्रिलर को यश चोपड़ा ने बस यूँ ही वक्त के बाद अगली बड़ी फ़िल्म बनाने की तैयारियों के बीच छोटी सी अवधि में सीमित साधनों के साथ बना लिया था वह पिछले 5 दशकों से ज्यादा समय... Continue Reading →

1971 (2007)

बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के कारण छिड़े भारत-पाक युद्ध (1971) के दौरान भारतीय सेना ने न केवल रिकॉर्ड समय में इस युद्ध को जीता बल्कि दुनिया के किसी भी अन्य देश से ज्यादा बड़ा कारनामा दिखाते हुए पाकिस्तान की सेना से आत्मसमर्पण करवा कर लगभग 90000 युद्धबंदियों... Continue Reading →

Shiva (1990)

1990 का साल समाप्त होते होते चुपके से दक्षिण भारत से हिंदी सिनेमा में एक आगंतुक का आना हो गया| ये सज्जन साथ लाये थे एक साल पहले तेलगु में अपनी ही बनाई पहली फ़िल्म को दुबारा से हिंदी में बनाकर|... Continue Reading →

Kaash (1987)

दुःख को देखना, और उसके अस्तित्व को स्वीकारना, जीवन को थोड़े ही पलों के लिए सही पर, परिवर्तित कर ही जाता है, व्यक्ति ठिठक कर कुछ सोचने विचारने के लिए मजबूर हो जाता है| जैसे गाडी के ब्रेक्स उसकी गति... Continue Reading →

Sarfarosh (1999)

जॉन मैथ्यू मेथन, ने फ़िल्म निर्देशक के रूप में अपनी पहली ही फ़िल्म - सरफ़रोश, से ऐसी चमक दिखाई कि उनसे बहुत बड़ी बड़ी अपेक्षाएं सिने प्रेमियों को बंध गयीं थीं| सरफ़रोश की पटकथा पर उन्होंने छः सात साल जम कर काम किया था... Continue Reading →

डाकिया डाक लाया : गुलज़ार का लिखा ख़त लाया

गुलज़ार साब के गीत ऐसे होते हैं जो श्रोता और पाठक की भावनाओं को अपने साथ अपनी इच्छित दिशा में ले जा सकते हैं| गुलज़ार भावनाओं के ट्रैफिक के नियंत्रक कवि हैं| बहुत सी फ़िल्में ऐसी हैं जिनसे वे केवल एक गीतकार... Continue Reading →

The Kerala Story (2024) : औचित्य!

पार्थो घोष ने 1993 में एक फ़िल्म बनाई थी -दलाल, जिसका विलेन जगन्नाथ त्रिपाठी (राज बब्बर) गर्व से कहता था कि वह चमड़ी बेचकर दमड़ी कमाता है| वह स्त्रियों को वेश्यावृत्ति में धकेलकर उनके माध्यम से पैसे कमाता था| जगन्नाथ,... Continue Reading →

Amitabh Bachchan :Director Hrishikesh Mukerjee (2)

(4) मिली (1975): यहां हृषिदा ने अमिताभ को एक और जटिल किरदार- शेखर, निभाने को दिया। वह अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अकेला रहने को मजबूर है और वह किसी से मिलना नहीं चाहता। वह कोई दुष्ट व्यक्ति नहीं है लेकिन जहां तक ​​बाहरी दुनिया का... Continue Reading →

Amitabh Bachchan + Director Hrishikesh Mukerjee (1)

हृषिदा के साथ अमिताभ बच्चन का जुड़ाव बहुत ही सफल और फलदायी रहा है| अमिताभ को जो एक अच्छा कलाकार होने का सम्मान, उनके पैन इण्डिया सुपर स्टार होने से इतर मिला उसमें सबसे बड़ी भूमिका हृषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्मों में निभाई गई भूमिकाओं... Continue Reading →

Tulsi (2008) : इरफ़ान खान की लत, लाचारी और आंसू

इरफ़ान खान ने अपने फ़िल्मी जीवन में तरह तरह की भूमिकाएं निभाईं हैं जिनकी खूब चर्चाएँ होती रही हैं| लेकिन उनकी एक फ़िल्म - तुलसी की मुश्किल से ही चर्चा होती है जबकि इरफ़ान ने इसके एक सीक्वेंस में अपने... Continue Reading →

Veer Zaara : Manoj Bajpeyee

मनमोहन देसाई की सुपरहिट फ़िल्म अमर-अकबर-एंथनी में एक दृश्य है जिसमें इन्स्पेक्टर अमर (विनोद खन्ना), एंथनी (अमिताभ बच्चन) को उसके मोहल्ले से पीट पाट कर लाकर हवालात में बंद कर देता है और हवालात से चोट खाया एंथनी, बाहर अपनी... Continue Reading →

Titanic (1997)

जहाजी इश्क नहीं आसां, बर्फीले समुद्र में डूब ही जाना है टाइटेनिक जहाज की असली घटना की कहानी बीसवीं सदी की एक सबसे बड़ी दुर्घटना की कहानी है लेकिन जेम्स कैमरून की फ़िल्म टाइटेनिक इस दुर्घटना का सिनेमाई रूपांतरण होने... Continue Reading →

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