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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

चल अकेला, चल अकेला … मुकेश

जोड़ी तोर डाक शुने केऊ ना एशे तोबे एकला चोलो रे। तोबे एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो, एकला चोलो रे। (रविन्द्रनाथ टैगोर) चल अकेला, चल अकेला, चल अकेलातेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको... Continue Reading →

Panchayat (2025) Season 4 : प्रहलाद

उपन्यास में एक सहूलियत होती है कि लेखक घटनाओं को विस्तार दे सकता है, इधर उधर की व्याख्या या वर्णन कर जो दर्शाना है उसे ज्यादा गहराई और विस्तार से पाठक को समझा सकता है| एक कहानी जैसी कहानी तो... Continue Reading →

Gulzar@91 : सबने देखी है शब्दों से फैलती खुशबू

बंदिनी में सचिन देव बर्मन के साथ एक बेहद खूबसूरत गीत (मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे) से फ़िल्मी गीत लिखने की शुरुआत करने वाले गुलज़ार पिछले 62 वर्षों से निरंतर संगीत निर्देशकों और फ़िल्म निर्देशकों... Continue Reading →

Music Teacher (2019) : देवदास सिंड्रोम

निर्देशक सार्थक दासगुप्ता की फ़िल्म - Music Teacher के पास, एक कहानी है, जिसे उन्होंने स्वंय ही लिखा है, और उसके भावों को विस्तार और गहराई से दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अच्छे अभिनेता, शानदार कैमरा निर्देशक एवं स्वंय का... Continue Reading →

कृष्ण — (नज़ीर अकबराबादी)

~ (नज़ीर अकबराबादी)

कृष्ण कन्हाई… (हसरत मोहानी)

Ref. Hazrat Maulana Hasrat Mohani, Poem 2 (2 October 1923; Dīvān 8)

एक सिरे से दूसरे सिरे तक – 1984 सिख विरोधी हिंसा

कुछ कहानियां पाठक को सन्नाटे के बियाबान में ले जाकर छोड़ देती हैं, जहाँ से उसे अपनी क्षमता के अनुसार इसके प्रभाव से बाहर आने में सफलता मिल पाती है| हिंसा के बारे में हरेक के किसी न किसी किस्म... Continue Reading →

Chetna (1970) : सिनेमेटोग्राफर कौन?

लेखक निर्देशक बाबू राम इशारा की बहुचर्चित व कुख्यात फ़िल्म चेतना में कैमरे के विशिष्ट प्रयोग किये गए, जिन्होंने दर्शकों के सम्मुख भ्रम उत्पन्न किये, सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने भी भ्रम को सच मान इसे "A" श्रेणी में सर्टिफाइड... Continue Reading →

Panchayat (2025) Season 4 : राजनीति की पेचीदा गलियाँ

पंचायत के सीज़न 4 का मुख्य शरीर ग्राम प्रधान के चुनाव के इर्दगिर्द पसरी राजनीति से बना है और बाकी उप-कथाएं इधर उधर पैर पसारती हैं| इस बार राजनीति के अखाड़े में ग्राम प्रधान के चुनाव में यूं तो आमने... Continue Reading →

‘पीयूष मिश्रा’,’दीपक तिजोरी’,आशुतोष गोवारिकर’ – ‘मैंने प्यार किया’

उपरोक्त उद्धरण पीयूष मिश्र के आत्मकथात्मक उपन्यास - तुम्हारी औकात क्या है, से लिए गए हैं| वे अपने कई साक्षात्कारों में भी सूरज बड़जात्या द्वारा निर्देशित "मैंने प्यार किया" की बाबत बता चुके हैं कि राजकुमार बड़जात्या मुंबई से दिल्ली... Continue Reading →

पेड़ -आसमान -धरती

चन्द्रशेखर आजाद : क्रान्ति दूत

प्रसंग सन्दर्भ   - क्रांतिकारी आन्दोलन आधारित साहित्य (यशपाल) https://www.youtube.com/watch?v=bdszG4EwgdE

शैलेन्द्र : गीतकार की अमीरी-गरीबी, तीसरी कसम और मृत्यु

मजरुह सुल्तानपुरी को 1994 में दादा साहेब फालके पुरस्कार दिया गया तो उनकी आयु उस वक्त तकरीबन 75 साल की थी और फिल्मों में गीत लिखते हुए उन्हें लगभग 50 साल हो चुके थे| इस अवसर पर दूरदर्शन को साक्षात्कार... Continue Reading →

Rehana Sultan : सिनेमा से पहले, परदे के पीछे

~ © HK Verma हिन्दी अनुवाद - ...[राकेश] [श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद] HK Verma, an alumnus of FTII, is a renowned cinematographer who, earlier in his career, collaborated with celebrated cinematographer KK Mahajan on many great films by Mani... Continue Reading →

Special Ops (1-1.5-2) : हिम्मत है तो मुमकिन है!

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिलहम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया जिगर मुरादाबादी का उपरोक्त शेर रॉ अधिकारी हिम्मत सिंह के चरित्र पर बखूबी फबता है| हिम्मत सिंह की शख्सियत मिथकीय गुणों वाली है| उनके गुण, उनका... Continue Reading →

राजेश खन्ना : नूरजहाँ और एक प्रेम कहानी

राजेश खन्ना ने बहारों के सपने (1967) से लेकर अनुरोध (1977) के बीच के दस सालों में तकरीबन दो दर्जन हिन्दी फिल्मों में हिन्दी सिनेमा के बेहद अच्छे रोमांटिक दृश्य सिनेमा के परदे पर जीवंत किये, वे संवाद से भरे... Continue Reading →

धीरज कुमार – का करूँ सजनी आये न बालम

अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, लेखक एवं गीतकार मनोज कुमार के दूर के रिश्ते के भाई धीरज कुमार को हिंदी सिने-संसार में एक अभिनेता के रूप में याद करना चाहें तो थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है| सिने दर्शक उन्हें जानते पहचानते... Continue Reading →

IITs से दशकों पुराने भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान

भारत में ब्रितानी राज के दौर में द्वितीय विश्व युद्ध के समय वायसरॉय की एक्जीक्यूटिव काउन्सिल में शिक्षा समिति के एक सदस्य थे श्री एन आर सरकार| 1945 में श्री सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें आईआईटी की अवधारणा... Continue Reading →

दो औरतें : हिंदी साहित्य में हंगामा मचाने वाली कहानी

पिछली सदी के आख़िरी दशक के मध्य में आबू धाबी में हिन्दी अध्यापन के माध्यम से जीविकोपार्जन करते और लगातार लेखन के माध्यम से जीवन को रचनात्मक सृजन की ऊर्जा से सींचते कृष्ण बिहारी छुट्टियों में भारत आये तो दिल्ली... Continue Reading →

कसौटी ‘सच्चे मित्र’ की

उस दिन संत सिद्धार्थ आये तो हाथ जोड़कर उपस्थित जनों के अभिवादन का उत्तर दिया और अपने स्थान पर शांत बैठ कर सभी की ओर देखने लगे| वे बहुत देर तक मौन रहे| उनके मौन दृष्टिपात की तीव्रता लोगों से सहन... Continue Reading →

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