महाराज, प्रणाम, एक शंका का समाधान कीजिये| क्या कोई अमर हो सकता है मृत्युलोक में? नहीं नहीं ! मृत्युंजय कोई नहीं है धरा पर, कभी भी नहीं हुआ, कभी हो नहीं सकता| जो जन्मा है वह मरेगा अवश्य| जन्म और... Continue Reading →
प्रतीत तो ऐसा ही होता हैरचनाकार को कि उसके द्वारा ही रचा जा रहा हैपर क्या रचने वाला वास्तव में रचनाकार का “मैं” ही होता है?तब,कभी एक बाल मन,कभी एक किशोर मन,कभी एक युवा मन,कभी एक प्रौढ़ मन,और एक... Continue Reading →
Don’t Go Far Off (Pablo Neruda) हिन्दी अनुवाद :- …[राकेश] Painting : Vincent Von Gogh
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