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#Jeetendra

Sunny Deol @Damini (1993)

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूतजिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है ~ नातिक़ लखनवी ये ढाई किलो का हाथ जब किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है| चिड़ियाघर में पिंजरे... Continue Reading →

Sulakshana Pandit : चेहरा है या फूल खिला है!

हिंदी सिनेमा में तीन ऐसे खुशनुमा चेहरों वाली अभिनेत्रियाँ रही हैं जिनके चेहरों पर उदासी कभी भी फ़बी नहीं और उनके उदास चेहरे देख दर्शक भी बैचेनी महसूस करने लगते हैं कि ये स्त्रियाँ हंस क्यों नहीं रहीं? क्योंकि उनकी... Continue Reading →

ये कौन चित्रकार है : बूँद जो बन गई मोती (1967)

प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किताबों से पढ़कर बच्चे नहीं समझ सकते, लाख अध्यापक अच्छा हो लेकिन अगर बच्चों ने सुबह की बेला में सूर्योदय की हल्की से गहरी होती लालिमा से नारंगी होते जाते आकाश को अपनी आँखों से नहीं... Continue Reading →

Chehre (2021) : चेहरों ने कितनों को लूटा?

  फ़िल्म – चेहरे, का विषय रोचक है और चार मुख्य चरित्रों में वरिष्ठ अभिनेताओं को देखना सुखद है और ज्यादा से ज्यादा ऐसे विषयों पर फ़िल्में बनें तो फिल्मों के स्तर में विविधता और ज्यादा गुणवत्ता आने की संभावना... Continue Reading →

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