किशोर कुमार के बहुत से शानदार गीत संगीत रसिकों के सामने खुलकर नहीं आ सके| कभी फिल्म के फाइनल कट से बाहर हो गए, कभी फिल्म बन कर पूरी हो गयी लेकिन प्रदर्शित नहीं हो पाई, कभी फिल्म पूरी बन ही नहीं पायी| ऐसा भी हुआ कि फिल्म इतने कम बजट वाली रही कि कुछ सालों बाद उसका वीडियो अस्तित्व ही समाप्त हो गया| ऐसी ही किसी समस्या से ग्रसित एक फिल्म थी – प्यार की मंजिल (1981) जिसे डी.एस.आज़ाद ने निर्देशित किया और इसमें दीपक पाराशर, ज़रीना वाहब, आशा सचदेव, शक्ति कपूर ने अभिनय किया| कहीं कहीं शशि कपूर का नाम भी इसकी कास्ट में सम्मिलित दिखाई देता है, वे अतिथि कलाकार के रूप में उपस्थित रहे होंगे|
संगीतकार ऊषा खन्ना ने इसका संगीत रचा था और उनके नाम एक आकर्षक सा रिकॉर्ड भी इस फिल्म के संबंध में जुड़ा हुआ है| एक डुएट (भक्तों की पुकार सुन)| उन्होंने संगीतकार रवि और रविन्द्र जैन से गवा लिया| आशा भोसले, सुरेश वाडकर, और ऊषा मंगेशकर के गाये युगल गीतों के समूह में एक एकल गीत किशोर कुमार ने गाया है और क्या शानदार गीत उन्होंने प्रस्तुत किया है|
किशोर कुमार अपनी गायिकी के कोष में अपनी विभिन्न प्रकार की आवाजों को संजोकर रखते थे और गीत के मर्म को पहचान सटीक आवाज निकाल कर उस गीत को गाते थे| गीत में कितना करारापन, कितनी मिठास, कितनी खुशी, कितना दुःख, कितना हल्कापन, कितना भारीपन, और गीत में भावों का असर बढाने के लिए फाल्सेटो की कितनी डोज़ डालनी है या कब योडलिंग की हद तक जाना है, यह सब गीत की प्रकृति के अनुसार तय करते थे, इसमें संगीतकार से ज्यादा उनकी स्वयं की भूमिका बड़ी होती थी|
फिल्म- प्यार की मंजिल के इस गीत – तेरे जैसा कोई देखा फिर तेरी याद आ गयी में किशोर कुमार ने अपनी आवाज़ के प्रसिद्द बेस को ही नियंत्रित रूप में उपयोग में नहीं लिया बल्कि फाल्सेटो के स्पर्श को भी सटीकता से प्रबंधित किया है| इस गीत की प्रकृति ऐसी है कि इसमें तलत महमूद वाले प्रसिद्द कंपन वाली गायिकी भी फबती लेकिन किशोर कुमार कंपन की बस उतनी मात्रा उपयोग में लेते हैं जिसे साधना केवल उनकी ही आवाज के लिए संभव था|
चूंकि फिल्म – प्यार की मंजिल, का प्रिंट उपलब्ध नहीं है अतः इस गीत के क्रेडिट में घपला कर दिया गया है| इसके साउंड ट्रैक रिकॉर्ड में यह गीत इन्दीवर के खाते में रहा लेकिन कुछ संगीत वाली साइट्स ऐसी भी हैं जो इस गीत के गीतकार के रूप में साजन देहलवी का नाम दर्ज करती हैं, जिन्होंने फिल्म में दो गीत लिखे हैं| स्टाइल से यह इन्दीवर का ही लिखा गीत लगता है|
तेरे जैसा कोई देखा फिर तेरी याद आ गयी
मेरी तन्हाई तेरी ये जुदाई
मेरे दिल को फिर रुला गयी
कुछ ऐसे भी रिश्ते हैं जो तोड़े से न टूटे
कुछ ऐसे भी बंधन हैं जो मर के भी न टूटे
जब तक साँस चलेगी ये रिश्ते साथ चलेंगे
तेरे जैसा सुन्दर सपना मेरा टूट न जाए
तेरी यादों का ये सहारा मुझ से रूठ न जाए
सिवा तेरी यादों के कोई और नहीं है प्यारा
तारे तेरे नैन बिछाकर मुझको तरसाते हैं
फूलों की लाली में मुझे तेरे होंठ नज़र आते हैं
यूं तनहा छोड़ गयी तू जीवन भर तड़पाने को
तेरे जैसा कोई देखा फिर तेरी याद आ गयी
प्रेम में पहले प्यार की महिमा बड़ी समझी जाती है और बहुत हद तक यह सही भी है| पहले प्रेम की परिणति सफल संबंध में न हो तो व्यक्ति अपनी पहली प्रेमिका को बेस बनाकर ही जीवन में अन्य प्रेम की ओर जा सकता है| व्यक्ति की अगली प्रेमिका या तो उसकी पहली प्रेमिका की पूरक होगी या उससे बढ़कर या उसकी स्थानापन्न| दूसरी प्रेमिका ऐसी हो कि पहली के अभाव की टीस उसके जीवन से कम कर दे या हटा दे, और जब तक ऐसा नहीं होता तब तक व्यक्ति पहले प्रेम की यादों के पुंज से व्यथित रहेगा ही रहेगा|
गीत ऐसी ही स्थिति को बयान कर रहा है कि नायक को अपनी प्रेमिका जैसी कोई दिखाई दी या मिली और उसे अपनी प्रेमिका की याद आ गयी| और अब उसे उस प्रेम की यादें सता रही हैं| और उसके वर्तमान पर उसके जीवन के भूतकाल की छाया मंडराने लगी है| इस संक्रमण काल के भावों को किशोर कुमार ने प्रभावशाली तरीके से अपने गायन से उभारा है|
ऊषा खन्ना के हिस्से में किशोर कुमार के लिए इतना शानदार गीत रचने का रचनाकर्म आया है|
जिस तरह से आजकल नई फिल्मों में या धारावहिकों में पुराने गीतों के उपयोग चलन बढ़ता जा रहा है उसमें हाल में प्रदर्शित हुयी श्रंखला – मुसाफिर कैफ़े, के मसूरी वाले भाग में नायक (विक्रांत मैसी) को इस गीत को सुनते दिखाना एकदम सटीक रहता पर शायद सीरीज बनाने वाले इस गीत से परिचित न रहे होंगे|
…[राकेश]
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