हिंदी साहित्य में दलित जीवन के वर्णन को प्रमुखता से जगह दिलवाने वाले, जूठन जैसी अति-प्रसिद्द आत्मकथा के लेखक, वर्तमान हिंदी साहित्य के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर ओमप्रकाश वाल्मीकि की कर्मकांड पर प्रहार करती एक कविता जब भी चाहा छूनामंदिर के गर्भ-गृह मेंकिसी पत्थर... Continue Reading →
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