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Dillagi (1978) : होलीमय संगीत के पांच सुरीले रंग

होली केवल मनुष्यों द्वारा जन्माया गया उत्सव ही नहीं है बल्कि प्रकृति भी इस समय धरती पर रंग बिरंगे रूप में छटा बिखेरने लगती है, ऋतुओं में भी बसंत अपने पूरे यौवन पर आ जाता है| होली जीवन में लचीलेपन... Continue Reading →

Gulzar@91 : सबने देखी है शब्दों से फैलती खुशबू

बंदिनी में सचिन देव बर्मन के साथ एक बेहद खूबसूरत गीत (मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे) से फ़िल्मी गीत लिखने की शुरुआत करने वाले गुलज़ार पिछले 62 वर्षों से निरंतर संगीत निर्देशकों और फ़िल्म निर्देशकों... Continue Reading →

धीरज कुमार – का करूँ सजनी आये न बालम

अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, लेखक एवं गीतकार मनोज कुमार के दूर के रिश्ते के भाई धीरज कुमार को हिंदी सिने-संसार में एक अभिनेता के रूप में याद करना चाहें तो थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है| सिने दर्शक उन्हें जानते पहचानते... Continue Reading →

Kaash (1987)

दुःख को देखना, और उसके अस्तित्व को स्वीकारना, जीवन को थोड़े ही पलों के लिए सही पर, परिवर्तित कर ही जाता है, व्यक्ति ठिठक कर कुछ सोचने विचारने के लिए मजबूर हो जाता है| जैसे गाडी के ब्रेक्स उसकी गति... Continue Reading →

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