हुसेन साहब के जलवे प्रदर्शनी का शीर्षक था - श्वेताम्बरी ! हुसेन साहब तब जॉन एलिया की नज़्म - रम्ज़ भी गुनगुना सकते थे | तुम जब आओगी तो सोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ... Continue Reading →
विश्व प्रसिद्द चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन ने तूलिका के स्थान पर कलम हाथ में थामी अपने अन्दर उभरती भावनाओं को इस बार काव्य का आकार देने के लिए| विश्व कविता दिवस पर उनकी कविता का उल्लेख प्रासंगिक है...
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