सुभाष, डॉक्टर गौतम और कमला को लेकर थाने पहुँचता है और जवाहर को सूचित करता है|
जवाहर : ऐसा करो पहले डॉक्टर गौतम को अन्दर बुलाओ, पहले उनसे ही बात कर लेते हैं|
सुभाष और डॉक्टर गौतम जवाहर के कक्ष में प्रवेश करते हैं|
जवाहर – आइये बैठिये डॉक्टर साहब| आपको क्या लगता है, सेठ दामोदर की मौत कैसे हुयी होगी?
डाक्टर – हार्ट फेल होने की संभावना सबसे ज्यादा है| लगता है सुबह सवेरे नींद में ही उन्हें मैसिव हार्ट अटैक आया होगा और वे परलोक सिधार गये|
जवाहर – क्या वे लंबे समय से दिल की बीमारी से पीड़ित थे?
डाक्टर – नहीं, कुछ महीने पहले तक तो वे एकदम स्वस्थ थे| फिर कुछ हुआ, पता नहीं क्या, कि वे लगातार बीमार रहने लगे, उनका दिल घबराने लगा, बीपी भी अनियमित रहने लगा| कई कई रोज लगातार उल्टियां करते थे|
जवाहर – क्या हुआ होगा?
डाक्टर – बहुत टेस्ट करवाए पर कुछ खास पता नहीं चल पाया| उनके जैसी हालत से उनके टेस्ट्स मैच नहीं करते थे| टेस्ट्स किसी प्रकार की कोई इमरजेंसी नहीं दर्शा रहे थे| एंजियोग्राफी की आवश्यकता नहीं लगी थी पहले, अतः दवाइयों से उनकी हालत सुधारने की कोशिशें की जा रही थीं|
जवाहर- आपने उनके लिए कुछ दवाइयां भी निर्धारित कीं|
डाक्टर- जी हाँ, बीपी नियंत्रित रखने के लिए एक गोली थी, कुछ दिन पेट में बैक्टीरियल संक्रमण रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स भी दीं| उनके ब्लड टेस्ट में कोलेस्ट्रोल और ट्राई-ग्लिसराइड बढे हुए थे सो उसकी भी दवाइयां चल रही थीं| पिछले दो हफ़्तों से सीने में चुभन बताते थे, बेचैनी की शिकायत करते थे सो उन्हें आपातकालीन स्थिति के लिए एक दवा भी सुझा रखी थी| पर लगता है नींद में ही सेठ जी चल बसे और उन्हें गोली खाने का मौक़ा ही नहीं मिला|
जवाहर – आप उनकी मेडिकल कंडीशन और उन्हें दी गई सभी दवाइयों के डिटेल्स लिखवा दीजियेगा| आपके प्रेस्क्रिप्शंस और उनके टेस्ट्स की रिपोर्ट्स आदि तो तो सेठ जी के घर से मिल ही जायेंगे| ये बताइये ऐसा क्या उन्हें हुआ होगा कि उनकी पत्नी के अनुसार उनका शरीर दो माह में ही सूख कर आधा रह गया था?
डाक्टर – उन्होंने पूछने पर भी कुछ बताया नहीं पर मुझे ऐसा लगा कि मानसिक रूप से उन्हें किसी बात का बहुत बड़ा सदमा लगा था और वे अंदुरनी स्तर पर किसी बहुत बड़े बोझ से लड़ रहे थे| उल्टियां खाली किसी शारीरिक संक्रमण के कारण ही नहीं होती थीं बल्कि कई बार उनका जी अपने आप के अस्तित्व से या अपनी सोची किसी बात पर इतना ज्यादा उकता जाता था कि वे घबराहट में उल्टी कर बैठते थे| मनोचिकित्सक से मिलने की बात को उन्होंने टाल दिया था कि बस कुछ स्ट्रेस है, कुछ समय में ठीक हो जाएगा| अब लगता है उनके अंदुरनी संघर्ष ने कुछ ही हफ़्तों में उनके दिल को बेहद कमजोर कर दिया था और ऐसे में हार्ट अटैक कोई बहुत आश्चर्यजनक बात नहीं है|
जवाहर – ओके डाक्टर| आपके यहाँ आने का कष्ट करने के लिए बहुत शुक्रिया| कभी किसी बात पर आपकी जरुरत पड़ी तो आपसे संपर्क करूँगा|
डॉक्टर गौतम जाता है और सुभाष कमला को अन्दर बुला लेता है|
जवाहर – बैठो कमला, ढंग से सोच कर बताओ सुबह क्या हुआ?
कमला- साहब जब मैं रोज की तरह सुबह साहब को लेमन टी देने गई तो आवाज लगाने के बाद भी साहब बिस्तर से नहीं उठे| मुझे उनका निश्चल शरीर देखकर भय लगा| मैंने जाकर मेमसाहब से कहा कि साहब उठ नहीं रहे| मेमसाहब आयीं और उन्होंने साहब को उठाना चाहा तो पाया कि साहब तो मर चुके थे| मेमसाहब रोने लगीं और कहने लगीं कमला काले जादू ने साहब को मार डाला| मुझे दो दिन पहले घर में आए गुड्डे की याद आ गयी और मैं बहुत डर गयी| बाद में मेमसाहब ने पुलिस को फोन किया, मुझे लगा मैं वहाँ थोड़ा भी रुकी तो बेहोश हो जाऊंगीं और मैं साहब के कमरे से निकलकर नीचे किचन में आ गई|
जवाहर- दो दिन पहले तुमने उठाया था गुड्डे वाला पैकेट दरवाजे के पास से?
कमला- जी हाँ, पर उस समय मेमसाहब भी ड्राइंग रूम में मेरे साथ ही थीं|
जवाहर – अच्छा तुम तो काफी साल से उस घर में काम करती रही हो, सेठ जी और उनकी पत्नी के मध्य कैसे संबंध थे? कभी उनके बीच झगड़े होते थे? हाल में कोई झगडा हुआ?
कमला- झगडा होते तो नहीं देखा| पर साहब और मेमसाहब अपने अलग-अलग कमरों में ही रहते थे| इतने सालों में एक बार भी साहब को मेमसाहब के निजी कमरे में जाते नहीं देखा| मेमसाहब, साहब से तर्क नहीं करती थीं| साहब तो बहुत रौबीले किस्म के आदमी थे| ये तो बीमारी ने इतनी तेजी से उनका सारा तेज छीन लिया वरना उनके सामने कोई भी बोलता नहीं था, मेमसाहब भी चुप ही रहती थीं| उनका रिश्ता थोड़ा अजीब था, एक चुप्पी भी रहती थी दोनों के बीच और एक संबंध भी बना रहता था|
ऐसा लगता था कुछ है जिस पर दोनों ही बात नहीं करना चाहते पर दोनों जानते थे जिसके बारे में|
जवाहर – अच्छा कमला, दोनों का सामाजिक जीवन कैसा था/ मतलब बाहर के लोगों से मेलमिलाप, कोई मित्र आदि? लोग आते थे उनसे मिलने? ये दोनों कभी साथ में बाहर जाते थे?
कमला- साहब घर पर किसी को नहीं बुलाते थे| पांच साल पहले खूब पार्टी देते थे, अब बिल्कुल बन्द थीं पार्टियां| साहब तो बीमार होने से पहले कई कई दिन बाहर रहते थे पर मेमसाहब तो बिरला ही घर से निकलती थीं| साहब और मेमसाहब को साथ बाहर जाते तो कभी देखा नहीं|
जवाहर – किसी अन्य स्त्री को लेकर साहब और मेमसाहब के बीच कोई झगडा हुआ हो कभी या कहा सुनी हुयी हो?
कमला – मेरे सामने तो कभी नहीं हुयी| वे दोनों आपस में बहुत कम बात करते थे|
जवाहर – कितना कम!
कमला – कभी कभी तो एक हफ्ते में एक बार| एक दो मिनट से ज्यादा लम्बी बातचीत कभी होते नहीं देखी उनके बीच|
जवाहर – तुम्हारी मेमसाहब ने ही कभी सेठ जी के जीवन में किसी और स्त्री के होने का जिक्र तुमसे किया हो? या कभी इस बारे में कोई आशंका व्यक्त की हो?
कमला- जी नहीं, मुझसे तो ऐसी कोई बात कभी नहीं की मेमसाहब ने|
जवाहर – साहब या मेमसाहब की कोई विशेष आदत जो तुम्हे याद आती हो?
कमला – साहब कैसी आदत?
जवाहर – कैसी भी जो तुम रोज देखती हो उन्हें करते हुए?
कमला- ऐसा तो कुछ ध्यान में नहीं आता| मेमसाहब तो ज्यादातर किताबें ही पढ़ती रहती हैं अपने कमरे में या ड्राइंगरुम में बैठ कर, कभी कभी कुछ लिखती रहती हैं एक कॉपी में|
जवाहर – और साहब, क्या वे भी कुछ लिखते थे कभी?
कमला- बिना बुलाये उनके कमरे में जाना नहीं होता था, सो उनके बारे में ज्यादा नहीं पता|
जवाहर – अच्छा डाक्टर गौतम के अलावा, सेठ जी या मेमसाहब से मिलने पिछले दो तीन हफ़्तों में कोई बाहर का आदमी या औरत आया घर में?
कमला- एक महीने पहले साहब ने अपने वकील को बुलाया था| वे पिछले हफ्ते भी आए थे| परसों भी उन्हें बुलवाया था पर फिर साहब की तबियत बिगड़ गयी तो उन्हें आने के लिए मना किया| और तो किसी को नहीं बुलवाया, वकील साहब तो पहले भी आते रहते थे|
जवाहर – क्या नाम है वकील साहब का|
कमला – भटनागर हैं कोई, पूरा नाम तो मुझे नहीं पता| वे चाय नहीं पीते कॉफी पीते हैं सो उनका आना याद रहता है| क्योंकि साहब और मेसाहब दोनों में से कोई भी कॉफी नहीं पीता और घर में बस वकील साहब के आने पर ही कॉफी बनती है|
जवाहर – अच्छा ठीक है कमला, कुछ ऐसा याद आए जो तुम्हे अजीब लगा हो पिछले तीन चार या पांच छह महीनों में तो हमें बताना| अब तुम जाओ|
कमला बाहर चली जाती है|
सुभाष – सर, क्या किया जाए अब?
जवाहर – डाक्टर और कमला की बातों से इतना तो पता चलता है कि कुछ तो कहीं ऐसा है जो सामान्य नहीं है| सबसे पहला काम ये करो कि सेठ जी के घर पर सादे कपड़ों में दो चौकन्ने सिपाही तैनात कर दो, बारह-बारह घंटे की पारी लगा दो उनकी| घर में आने वाले हर आदमी पर नजर रखनी है उन्हें और अगर सुनीता देवी बाहर जाती हैं तो उनका पीछा करके उनकी गतिविधियां नोट करनी हैं| घर में भी कोई असामान्य बात दिखाई दे तो तुरंत सूचित करें| घर से बाहर आने वाले कूड़े तक को भी देखा जाए| कोई वस्तु नष्ट न की जाए इस बात पर पैनी नजर रहे| इन सब कामों में कोई कोताही न हो, इस बात की सख्त हिदायत उन्हें दे दो| दूसरा काम करो, सेठ जी के वकील भटनागर का पता लगाओ| सेठ जी की पत्नी से बिना पूछे वकील का पता लगाओ| देखो कौन है ये भटनागर वकील| कल ही मिलना पड़ेगा सेठ के वकील से|
जी सर!
(शेष)
© …[राकेश]
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