David Fincher की फ़िल्म – Panic Room, दर्ऊशक को लगातार तनाव में रखने वाला थ्रिलर है, जो एक स्त्री चरित्र के साहस, मुसीबत में भी धैर्य बनाए रखकर उसकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और एक दृढ निश्चय कि वह अपनी और अपनी बेटी की सुरक्षा करके रहेगी, पर आधारित है|
सेंधमारी और चोरी भी बेहद प्राचीन काम हैं| राजा और धनी लोग अपनी धन संपत्ति और अपनी जान की सुरक्षा के लिए असामान्य कदम उठाया करते थे| धनसंपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए अति गोपनीय और हर तरह की सुरक्षा से लैस कक्ष बनवाये जाते थे जिसमें प्रवेश करने और उनसे बाहर आने का तरीका केवल दो लोगों को रहता होगा एक उसे बनाने वाले को और दूसरा राजा को|
अपनी जान की सुरक्षा के लिए भी महल में गोपनीय कक्ष बनवाये जाते थे, जहां छोटे खतरे में सुरक्षित रहा जा सके और गुप्त सुरंगे बनवाई जाती थीं जिनकी सहायता से बड़े खतरे के समय महल से निकल सुरक्षित स्थान पर जाया जा सके| जाहिर है कि इन्हें बनाने वाले कारीगर राजा के बेहद विश्वसनीय होते होंगे|
अगर धनी आदमी की धन संपत्ति की रक्षा के लिए बनाए गए गुप्त एवं सुरक्षित कक्ष को बनाने वालों में से कोई बेईमान निकल जाए और धनी व्अयक्नुत की अनुपस्थिति में खुद ही सेंधमारी करके उसके धनसंपत्ति को चुराने आ जाए तो बड़ी मुश्किल हो जाए धन संपत्ति की रक्षा करना|
महल कितना ही बड़ा हो लेकिन सुरक्षित रहने का भाव, खतरे के समय उस एक छोटे कक्ष में ही संतुष्टि देगा जहाँ के बारे में यह पूरा विश्वास जमा हो कि यहाँ कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता| यह विश्वास ही व्यक्ति को आत्मविश्वास देगा|
छत की सुरक्षा क्या है वह सहसा निराश्रय हो गया व्यक्ति ही जानता है और उस वक्त उसे फूस की बनी छत भी सुरक्षा का भाव दे जाती है|
डेविड फिंचर की फ़िल्म ऐसे ही सिनेरियो पर ही आधारित है|
नायिका मैग (जोडी फोस्टर) अपने धनी पति से तलाक लेने के बाद अपनी किशोरी बेटी के साथ एक चार मंजिला मकान में रहने आती है| प्रोपर्टी डीलर मकान दिखाते समय माँ बेटी को एक सीक्रेट रूम दिखता है जो तीसरी मंजिल पर है और अगर किसी इमरजेंसी में घर के मालिक को उस रूम में शरण लेनी पड ही जाए तो कोई बाहरी व्यक्ति उसमें घुस नहीं सकता| इस रूम की विशेषताएं जानकार मैग थोड़ा सा डर जाती है लेकिन विशाल मकान में अन्य बहुत सारी खूबियाँ हैं और इस नाते वह मकान ले लेती है|
इतने बड़े मकान में पहला दिन, उनका सामान कार्टंस में बंद चारों ओर बिखरा पड़ा है और रात हो चुकी है| यहाँ ईस्ट और वेस्ट की संस्कृतियों का अलग पहलू देखने को मिलता है| भारत में इसे सामान्य माना जाएगा कि ऐसी परिस्थितियों में माँ और बेटी एक ही कक्ष में सोयेंगीं, लेकिन पश्चिम में छोटे बच्चे भी अपने स्वंय के कक्ष में ही सोते हैं सो बेटी अलग मंजिल पर अलग कक्ष में सोती है और मैग भी कार्टंस में से थोडा सा सामान और निकाल कर, स्नान करने के बाद अपने कक्ष में सोने जाती है|
सारा घर जगह जगह लगे सीसीटीवी कैमरों के नियंत्रण में है और मैग के बेडरूम और सेफ/पेनिक रूम, दोनों जगह से सारे घर के हरेक कोने को इन कैमरों की सहायता से देखा जा सकता है|
जितना व्यक्ति सोच सकता है, उतना सुरक्षित यह घर है और ऐसे घर में अपने अपने कक्ष में थकी हुयी माँ बेटी सो रही हैं|
ऐसे मकानों में जो कम्पनियां ऐसे सेफ रूम बनाती होंगी उन्हें बनाने वाले भी आदमी ही हैं| जैसे बैंकों से, क्रेडिट कार्ड कम्पनियों से लोगों के निजी विवरण भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा बेचे जाते हैं और आर्थिक अपराध होते ही चले जाते हैं| उसी तरह सेफ रूम बनाने वाली कम्पनियों के भ्रष्ट कर्मचारियों में से एक हैं बर्नहैम (फ़ॉरेस्ट व्हिटेकर) जो अपने अपराधी साथी से एक जबरदस्त संवाद कहता है
“मेरे जैसे व्यक्ति ने ही ऐसे सेफ रूम बनाने में 12 साल का वक्त लगाया है ताकि मेरे जैसे व्यक्ति इसमें घुस न सकें“|
बर्नहैम को तो यह पता है कि यह मकान खाली है और वह अपने एक साथी को लेकर इसके सेफ रूम में छिपाये गये धन को चुराने आया है|
उसका साथी अपने एक और साथी को ले आया है|
बर्नहैम के प्रयासों से मकान में घुसने के पश्चात ही उन्हें पता लगता है कि अन्दर तो एक स्त्री और उसकी बेटी सो रहे हैं, अर्थात मकान खाली नहीं है|
अपराधियों की आपसी गलतफहमी के कारण वे मकान में घुसने के दिन को गलत निर्धारित कर लेते हैं|
बर्नहैम चुपचाप खाली मकानों में चोरी करने वाला अपराधी है| अतः वह माँ बेटीको मकान में देखकर वापिस जाना चाहता है लेकिन उसका साथी और साथी द्वारा बुलाये गए तीसरे साथी के इरादे माँ बेटी के मकान में उपस्थित रहने से नहीं बदलते| तीसरे साथी के पास पिस्तौल है सो उसकी ऊर्जा उसके पास है कि वह माँ बेटी को काबू में कर लेगा उसे जान लेने में भी कोई हिचक नहीं है| बाकी दोनों मिलकर बर्नहैम को विवश कर देते हैं कि चोरी को अंजाम दिया जाए और पहले माँ बेटी पर काबू पाया जाए|
वे नीचे की मंजिल पर चर्चा में व्यस्त हैं कि मैग की नींद खुलती है और वह वाशरूम जाती है और फ़्लश करने की आवाज सुनकर चोरों को पता लग जाता है कि ऊपर माँ या बेटी में से कोई उठी है| मैग अपने बिस्तर पर लेटने जा ही रही है कि उसकी निगाह मोनिटर पर सीसीटीवी कैमरे में कैद तीनों अपराधियों पर पड़ती है और सब कुछ समझ कर वह तेजी से बेटी के रूम की ओर भागती है, उसके भागने की आवाज सुनकर तीनों अपराधी ऊपर उसकी मंजिल की ओर भागते हैं, माँ गहरी नींद में सो रही बेटी को किसी तरह उठाकर उसके कक्ष से बाहर निकलती है और बाहर गलियारे में उनके सामने तीन अपराधी खड़े हुए मिलते हैं, जिसमें एक नकाबपोश है जिसके हाथ में पिस्तौल लिए और एक दैत्याकार बर्नहैम है|
यह उनकी पहली शारीरिक मुठभेड़ है| पहली मुठभेड़ की चूहे बिल्ली की रेस की परिणति टॉम एंड जैरी फिल्मों की गति वाली है| टॉम बस जैरी को पकड़ने ही वाला है कि जैरी शटाक से किसी झिर्री में घुस जाता है और उसकी पूंछ भी झिर्री का दरवाजा बंद होते होते अन्दर और टॉम के पास अपने हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं रहता|
अब एक चार मंजिला मकान है, जिसकी एक मंजिल के एक कमरे – सेफ/पेनिक रूम में माँ बेटी कैद हैं, और बाहर पूरे मकान पर तीन अपराधियों का कब्जा है| उस कमरे में जीवित रहने के लिए बहुत कुछ है लेकिन न तो खाने का सामान है, और न ही वहां से बाहरी दुनिया को संपर्क किया जा सकता है| मैग का मोबाइल फोन भी उसके बेडरूम में चार्जर पर लगा रह गया है|
बाहर एक स्पेशिलिस्ट अपराधी है जिसे पता है कि वह इस कक्ष के अन्दर तब तक नहीं घुस सकता जब तक कि अन्दर से माँ या बेटी में से कोई इसे न खोल दे, और अन्दर छिपे खजाने को पाने के लिए उस रूम में जाना आवश्यक है| माँ बेटी के सामने मौत है क्योंकि उन्होंने अपराधियों को देखा है, उनके बाहर निकलते ही पिस्तौल लिए हुए आदमी उन्हें शूट कर देगा|
फ़िल्म अब दो सक्रिय और शार्प दिमागों की आपसी मानसिक लड़ाई है| एक तरफ बर्नहैम है, जो कतई भी खून खराबा नहीं चाहता और चोरी के सभी तकनीकी पह्लूओं को उसे ही संभालना था|
अपनी ओर से पहली चाल मैग चलती है और पेनिक रूम में लगे माइक से बाहर स्थित स्पीकर के द्वारा अपराधियों को अपने घर से बाहर जाने की चेतावनी देती है और उन्हें डराती है कि उसने पुलिस को सूचित कर दिया है और पुलिस आती ही होगी|
दो अपराधी डर जाते हैं लेकिन पेनिक रूम के सारी असलियत जानने वाला बर्नहैम मैग की पहली चाल को बेअसर कर देता है उसे यह इशारा करके कि वह पेनिक रूम से फोन नहीं कर सकती|
अब बर्नहैम अपनी ओर से पहला मानसिक दबाव माँ बेटी पर डालता है, कैमरे के सामने ही वह घर से बाहर जाने वाले सभी खिड़की दरवाजों को कीलों से सील कर देता है, अर्थात किसी तरह माँ बेटी चुपके से उस रूम से बाहर आ भी जाएँ तो वे घर से बाहर नहीं जा सकतीं|
अब पेशेवर अपराधियों के विपक्ष में है एक माँ, जिसे स्वयं को और अपनी बेटी, दोनों को सुरक्षित रखना है| बेटी की मेडिकल कंडीशन भी है| इस भयावह माहौल में भी उसे संयम रखते हुए अपनी बुद्धि से तीनों अपराधियों को मात देनी है|
अब तक जो वर्णित है वह मात्र 20-25 मिनट में संपन्न हो जाता है और अब आगे की सारी, लगभग डेढ़ घंटे की फ़िल्म मैग और बर्नहैम के मुकाबले की है और तनाव के कारण इन डेढ़ घंटों की फ़िल्म में लगे अवधि का पता दर्शक को चल नहीं सकता क्योंकि जिसे नेल बाईटिंग थ्रिलर कहा जाता है बाकी फ़िल्म उसी का उदाहरण है|
साधारण अवस्था में जो अविश्वसनीय माने जाएँ और जिन्हें करते हुए ही तनाव से व्यक्ति का ब्रेन हेमरेज हो जाए या दिल की धड़कन रुक जाए ऐसे करतब डेविड फिंचर मैग से करवाते हुए दिखाते हैं|
चार मंजिला मकान भी अपने आप में एक चरित्र बन कर उभरता है और मकान के अन्दर बना सेफ रूम भी अपने आप में एक चरित्र ही है|
स्पेस के अन्दर स्पेस, और स्पेस के बाहर स्पेस, ये जो जगहों के वृत्तों में मनुष्यों की आवाजाही डेविड फिंचर दिखाते हैं और Claustrophobia एवं Agoraphobia दोनों के साक्षात दर्शन कराते हैं|
बड़ी विपत्ति से उत्पन्न भय के सामने भी बुद्धि को स्थिर रखकर अपना पक्ष मजबूत रखा जा सकता है यह फ़िल्म में दोनों तरफ से दिखाया जाता है|
ऐसा नहीं है कि केवल नायिका औअर उसकी बेटी को ही अपराधियों का भय है, बल्कि हर कुछ मिनटों में ऐसे पल आते हैं जब अपराधी भी भय से काँप उठते हैं कि आगे क्या होगा? वे जिस स्पेस के अस्थायी मालिक बन गए हैं उससे बाहर, इस मकान से बाहर पुलिस और समाज का राज है और उन्हें अपनी परछाई से भी भय लगता है कि कोई बाहर का आदमी देख न ले उन्हें अन्दर इतनी हरकतें करते हुए|
प्रेमचंद का एक कथन है;
भय की चरम सीमा ही दुस्साहस है
इस कथन में उपस्थित दर्शन के दर्शन फ़िल्म में बार बार होते हैं|
गृहस्वामिनी और घुसपैठ कर घर में घुसे अपराधियों की मुठभेड़ में अलग चरित्रों की अलग मानसिकता की कुंडली भी डेविड फिंचर विस्तार से खंगालते हैं और फ़िल्म के मनोवैज्ञानिक पक्ष को बहुत मजबूत रखते हैं|
ऐसे क्षण भी आते हैं जब दर्शकों में तीन अपराधियों के लिए एक सी भावना रखना असंभव बना देते हैं डेविड फिंचर| यही फ़िल्म की सफलता है कि जब जैसा चाहे जिस दिशा में चाहे दर्शक निर्देशन के सम्मोहन से बंधा हुआ उधर ही चलता जाता है|
…[राकेश]
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