चिड़चिड़ा बूढ़ा आदमी (Cranky Old Man)
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नर्स,
तुम मेरी ओर देखती हो…
तुम क्या देखती हो?
मेरी तरफ़ देख कर तुम क्या सोचती हो?
क्या मैं तुम्हें एक चिड़चिड़ा बूढ़ा आदमी दिखाई देता हूँ?
जो बहुत समझदार नहीं है,
आदत में एकदम अनिश्चित है
जिसकी निगाहें कहीं दूर खोयी रहती हैं
जो खाते हुए अपना खाना टपकाता रहता है
और पूछने पर भी कोई जवाब नहीं देता।
तुम ऊंची आवाज में कहती हो…
‘काश तुम और ज्यादा कोशिश करते!’
तुम्हें लगता होगा
कि तुम जो कुछ भी करती हो,
उसे यह बूढ़ा नोटिस ही नहीं करता।
ये बूढ़ा
हमेशा कुछ न कुछ खोता ही रहता है
कभी जूते
कभी मोज़े|
जो विरोध करे,
न करे,
तुम्हें अपनी मर्जी चलाने देता है
कि तुम अपने ढंग से उसे स्नान करवाओ
या खाना खिलाओ
तुम्हें उसके साथ
कितना लंबा लगता होगा न दिन
काटने के लिए|
मैं यहाँ शांत व स्थिर बैठा हूँ,
जैसा कि मैं तुम्हारे आदेश पर करता हूँ…
जिस समय मैं तुम्हारी मर्जी से खाता हूँ।
क्या तुम यही सोच रही हो?
क्या तुम यही देख रही हो?
अपनी आँखें खोलो, नर्स
तुम मेरी तरफ नहीं देख रही हो।
मैं तुम्हें बताता हूँ
कि मैं कौन हूँ . . .?
आओ देखो मेरे जीवन में झाँको,
मैं दस साल का एक छोटा लड़का…
मेरे पिता हैं, माँ है,
भाई और बहनें भी हैं…
एक भरे पूरी परिवार में
सभी एक दूसरे से प्यार करते हैं|
सोलह साल की मेरी किशोर अवस्था देखो
मेरे पैरों में पंख लगे हैं
सपना देख रहा हूँ कि अब जल्द ही
मैं एक लडकी से मिलूँगा
जो मेरी प्रेमिका होगी …
बीस साल में तो मैं
विवाह के समारोह में
मैं दूल्हा बना बैठा हूँ…
इन सब यादों से
मेरा दिल आज भी उछल पड़ता है
मुझे याद आ रही हैं,
वे सारी कसमें…
जिन्हें निभाने का मैंने वादा किया था।
और पच्चीस साल की उम्र|
आह!…
मेरे अपने बच्चे हैं।
जिन्हें मेरे मार्गदर्शन की ज़रूरत है…
और एक सुरक्षित, खुशहाल घर है।
मैं तीस साल का एक अनुभवी वयस्क आदमी…
मेरे बच्चे अब थोड़े बड़े हो गए हैं,
एक दूसरे से बंधे हुए हैं…
मुझे लगता है
ऐसे बंधनों में उन्हें
लंबे समय तक बने रहने चाहिए।
चालीस की उम्र में देखो मुझे,
मेरे छोटे बेटे…
अब बड़े हो गए हैं
और घर से दूर चले गए हैं,
लेकिन मेरी पत्नी मेरे पास है…
बच्चों के जाने का दुःख हम नहीं करते,
जीवन की अन्य स्थितियों सामना साथ मिलकर
करते हैं|
पचास की उम्र में,
एक बार फिर,…
फिर से बच्चे हम दोनों की गोद में खेलते दिखाई देते हैं,
यह कितना प्रीतिकर है कि
हम अपने बच्चों के बच्चों को जानते हैं
और वे हमें…
यानी मुझे और मेरे प्रिय पत्नी को|
मेरी प्रिय और मैं बढ़ती उम्र की ओर बढ़ रहे हैं
हमारे सभी बच्चे भी उम्र में बढ़ते जा रहे हैं…
उनके अपने बच्चे भी बड़े हो रहे हैं।
ओह!
और एक दिन
मेरे जीवन पर काले बादल छा जाते हैं
मेरी पत्नी मर गयी है।
मैं भविष्य को देखता हूँ…
तो भय से काँप उठता हूँ।
और मैं उन वर्षों के बारे में सोचता हूँ…
और उस प्रेम के बारे में
जिसे मैंने अनुभव किया है।
मैं अब बूढ़ा हो गया हूँ…
और प्रकृति कितनी क्रूर है!
बुढ़ापे को
हल्के में लेकर
मूर्ख की तरह देखना या दिखाना एक मज़ाक है।
वृद्धावस्था में शरीर टूट जाता है…
सुंदरता और जोश चला जाता है।
जहाँ कभी मेरा दिल हुआ करता था,
वहाँ अब एक पत्थर महसूस होता है।
लेकिन इस बूढ़े मृतप्राय शरीर के अंदर
एक जवान आदमी अभी भी रहता है,
और कभी-कभी…
मेरा घायल व सुस्त पड़ा दिल
किसी भी कारण से जाग्रत हो जाता है
मुझे खुशियाँ याद आती हैं…
मुझे दर्द याद आता है
मुझे अनुभव होता है कि
मैं प्यार कर रहा हूँ
और जी रहा हूँ …
फिर से ज़िंदगी के क्षण|
मैं जीवन के बीते सालों के बारे में सोचता हूँ,
बहुत कम लगते हैं,
और वे भी बहुत तेज़ी से चले गए,
इस कठोर तथ्य को स्वीकार करता हूँ
कि कुछ भी स्थायी नहीं हो सकता|
तो अपनी आँखें खोलो,
लोगों …
खोलो और देखो|
क्या देख पाते हो?
एक चिड़चिड़ा बूढ़ा आदमी!
नहीं।
ज़रा और गौर से देखो…
देखो…
मुझे!
ऑस्ट्रेलिया के एक ग्रामीण कस्बे में नर्सिंग होम के जेरिएट्रिक वार्ड में एक बूढ़ा आदमी मर गया। नर्सें को उसके छोड़े सामान में यह कविता मिली। इसकी गुणवत्ता और विषय-वस्तु ने सभी को इतना प्रभावित किया कि इसकी प्रतियाँ पूरे अस्पताल में वितरित हुईं| उस बुजुर्ग व्यक्ति की अंतिम कविता भावी पीढ़ी के लिए एक वसीयत बन गयी और देश भर की पत्रिकाओं में छपी| सरल, लेकिन भावपूर्ण कविता पर आधारित एक स्लाइड प्रस्तुति भी बनाई गई। और यह बूढ़ा आदमी, जिसके पास दुनिया को देने के लिए कुछ भी नहीं बचा था , इस कविता के अनाम लेखक के रूप में लोगों की यादों में बस गया|
Painting – Old Man on his Death Bed (Gustav Klimt)
हिंदी अनुवाद – राकेश
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April 3, 2025 at 5:14 AM
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