ऑपरेशन सिन्दूर : भारत कहाँ जीता कहाँ हारा और जहाँ हारा वहां क्यों हारा ?
यह एक महत्वपूर्ण स्थिति है|
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भारतीय सेना द्वारा सटीक लक्ष्यभेदी पराक्रम दिखाने के बावजूद भारत कहाँ पिछड़ा?
भारत कुछ मायनों में पिछड़ गया यह स्पष्ट ही है|
1) भारत में वर्तमान सरकार से बेहद नफरत करने वाले बहुत बड़े बड़े गुट हैं, जो आवश्यक नहीं कि आपस में एक दूसरे को पसंद करते हों, लेकिन पिछले 20 दिन से उनकी आर्टीलरी की दिशा का लक्ष्य एक ही था भारत सरकार को झुकाओ, और संभव हो तो अभी गिराओ, इसके लिए भारतीय सेना की ऐसी तैसी करनी पड़े तो वह भी करो| ऐसा शौर्य इन गुटों ने गलवान में चीन द्वारा भारतीय सीमाओं पर आक्रमण करने के समय भी दिखाया था| बिना सत्य जाने इन्हें इस बात में रूचि थी कि बस यह सिद्ध हो जाये कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को हरा दिया| ये सरकार विरोध और देश हित विरोध के बारीक अंतर की लक्ष्मण रेखा हमेशा पार कर जाते हैं|
सरकार से यह प्रश्न पूछना कि सुरक्षा व्यवस्था में कहाँ चूक हुयी, विपक्ष, मीडिया और जनता की सजगता की श्रेणी और अधिकार में आएगा लेकिन बेसुर में गीत गाना कि यह भारत सरकार का अपना करवाया हुआ कांड है, एक घटिया प्रयास है स्वंय ही करमचंद जासूस के बेहद सस्ते संस्करण बनने का और सरकार विरोध की हवस के नशे से होश खो बैठे और देश विरोध की राह पर चल पड़ने वाले गुट ने यही किया|
2) भारत द्वारा पाक समर्थित/प्रायोजित/निर्मित आतंकवाद के विरुद्ध छेड़े गए ‘ऑपरेशन सिन्दूर‘ के धरती (और हवा में) में क्रियान्वित होते ही इसमें हथियार बनाने वाले सारे देश सक्रिय होकर बैठ गए| उन्हें भारत के सुरक्षा चक्रव्यूह और आक्रमण विधि का ‘रियल टाइम डेटा‘ मिल रहा था| हथियार निर्माता और हथियार विक्रेता दोनों तरह की लॉबी के लोग इस संघर्ष को बहुत गहराई से देख रहे थे| चीन –अमेरिका की आपसी प्रतिद्वंदिता के बावजूद दोनों ही एक बिन्दु पर सदा ही एकमत रहे हैं कि भारत की मजबूती उनके साम्राज्यवादी हितों के सामने खडी है| अमेरिका ने सन 1947 से भारत–पाक संघर्षों में खुल कर पाकिस्तान का साथ दिया है और इस बार भी न न करते प्यार उसी से कर बैठा| चीन को अपने आधुनिक हथियारों की जांच ही नहीं करनी थी बल्कि अपने लिए हथियारों के वैश्विक बाज़ार में जगह भी बनानी थी|
तुर्की 1920 के खलीफा आन्दोलन के समय महात्मा गांधी की समझ को चूना लगाने के काल से समय समय पर भारत को ठगता आ रहा है और भूकंप पीड़ित अवस्था में भारत द्वारा की गयी बहुत बड़ी सहायता को भुलाकर मुस्लिम ब्रदरहुड और इस्लामिक साम्राज्यवाद के छदम छत्र तले उसने पाकिस्तान का सक्रिय साथ दिया|
अमेरिका में चीनी लॉबी, और इंग्लैण्ड में इस्लामिक लॉबी बेहद मजबूत है| बीबीसी जैसी संस्था पर पाकिस्तान परस्त ताकतों का कब्ज़ा कोई आज की बात नहीं है| सी एन एन जैसी मीडिया एजेंसियों ने पाकिस्तान के संवाददाताओं के हवाले से बातें ऐसे रखीं जैसे उन्होंने निष्पक्ष ढंग से जांच कर सूचना गढ़ी हो, उन्होंने पाकिस्तान द्वारा गढ़ा गया नेरेटिव आगे चलाया|
अगर पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली ऐसी मजबूत होती जैसी चीनी लॉबी ने पाकिस्तान के समर्थन में दुनिया भर के अखबारों और मीडिया से प्रसारित करवाईं तो भारत के ड्रोन और भारत द्वारा अपने यहाँ ही रहकर छोडी गयी मिसाइल के अटैक, रावलापिंडी, बहावलपुर, नूर खान एयर बेस, और पाकिस्तान के अंदुरनी इलाकों में जाकर मनचाहा तांडव न कर पाते| वे पाकिस्तान की सीमाओं पर खड़े चीनी सुरक्षा के अभेद किले द्वारा सीमा पर ही धराशायी कर दी जातीं| जैसा भारत के सुरक्षा चक्र ने किया और सीमा स्थित इलाकों के लोगों ने आकाश में आतिशबाजियां देखीं और किसी शहर में कोई विध्वंस नज़र नहीं आया| बरखा दत्त जैसी भारत सरकार की समर्थक न मानी जाने वाली मीडियाकर्मी ने आतिशबाज़ी अपनी आँखों से देखी वर्ना दिल्ली में बैठ उन्हें यह स्वीकृत न होता कि भारतीय सेना ऐसे तकनीकी पराक्रम भी दिखाने में सक्षम है!
7 और 8 की रात को भारतीय सेना के विजित प्रदर्शन ने ही चीन–अमेरिका के रोयें-रोयें खड़े कर दिए थे और तभी से भारत विरोधी दुष्प्रचार वैश्विक स्तर पर अखबारों और मीडिया में शुरू हो गया| और इसे भारत के अन्दर प्रचारित करने का काम भारत के सरकार द्वेषी गैंग्स ने किया| पहले ये भारत सरकार को उकसाने में लगे थे कि युद्ध करो युद्ध करो, फिर जब भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर आरम्भ कर दिया तो इन्होने तख्तियां बदल दीं और “Say No To War” के परचम लहराने लगे और फिर भारतीय सेना के पिछड़ जाने, और पाकिस्तान की अभेद सैन्य क्षमता के गुण गाने के कोरस गाने लगे| पाकिस्तान ने कहा उसने भारत के राफेल गिरा दिए, इन्होने उसे हरिश्चन्द्र का कहा सत्य माना और हल्ला बोल दिया|
चीनी लॉबी ने एक आर्टिकल छपवाया, 11 मई की रात उसके हिंदी अनुवाद में सरकार के प्रति नफ़रत के ज़हर से लबालब भरे एक महाशय ने अपनी ओर से उसमें वाक्य जोड़ दिए जिसे सरकार विरोध के अंधभक्तों ने बिना पढ़े सोशल मीडिया पर प्रसारित करना शुरू कर दिया| तब तक भारतीय सेना प्रेस ब्रीफ कर चुकी थी जो इस गैंग ने देखी नहीं थी|
उस अनुदित लेख का एक उदाहरण राफेल के सन्दर्भ में देखिए –
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“खतरनाक किल चेन , चीन ने चुपचाप कदम रखा—जैसे पश्चिमी विश्लेषकों ने कभी कल्पना नहीं की थी:
कोई J-20 नहीं, कोई युद्ध की घोषणा नहीं , बस एक बॉक्स, एक नेटवर्क, एक चुपचाप काम करने वाली किल चेन:
Saab Erieye AWACS, चुपचाप गश्त करते हुए, J-10C फाइटर, पासिव मोड में
PL-15E मिसाइलें—300 किमी रेंज और Mach 5 की रफ्तार,
राफेल को पता भी नहीं चला कि वो टारगेट हुआ है—जब तक मिसाइल सिर्फ 50 किमी दूर नहीं रह गई।
उस गति पर, भारतीय पायलट के पास सिर्फ 9 सेकंड थे। ना बचने के लिए काफी, ना प्रतिक्रिया देने के लिए
भारतीय वायु सेना अब कश्मीर के ऊपर नहीं दिखती क्यों?”
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राफेल के सन्दर्भ में भारतीय वायु सेना ने प्रश्न के जवाब में क्या कहा?
“हम एक कॉम्बेट सिचुएशन में हैं, जहाँ loss होना भी संभव है, पर अभी यह एक चल रहा ऑपरेशन है, इस पर बाद में समीक्षा होगी| अभी के लिए यह कहना ही पर्याप्त होगा कि हमें सौंपे गए सारे लक्ष्य हमने प्राप्त किये और भारतीय वायु सेना के सारे पायलेट सकुशल वापिस आये|”
अब भारतीय नफरती गिरोह द्वारा चलायी चीन प्रायोजित लेख की सामग्री को देखें और भारतीय वायु सेना के अधिकृत बयान को पढ़ें तो कुछ सामंजस्य है? चीनी प्रायोजित रिपोर्ट के अनुसार भारतीय पायलेट के पास अगर 9 ही सेकेण्ड थे चीन की तथाकथित सुपीरियर रक्षा प्रणाली के सामने और राफेल अगर नष्ट हो गया तो उसके पायलेट को भी शहीद हो जाना चाहिए था| पर भारतीय वायु सेना के सारे पायलेट सुरक्षित अपने बेस स्टेशन पर लौट आये| तो चीन द्वारा पाकिस्तान को दी गयी अभेद सुरक्षा प्रणाली ने किसे मार गिराया हवा में, पाकिस्तान केअपने ही लड़ाकू विमान को?
पाकिस्तान के झूठ को एक और केस के माध्यम से देखा जा सकता है| पाकिस्तान ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान की धरती पर एक मिसाइल गिराई| उसने तो झूठ बोला लेकिन वह अर्ध सत्य निकला| वह सारे पाकिस्तान को पार करके बंजर भूमि पर नियंत्रित तरीके से गिराई गयी मिसाइल के अटैक के रूप में सामने आया जिससे भारत ने सन्देश दिया कि पाकिस्तान का इंच इंच भारतीय सेना की पहुँच में है और अगर युद्ध हुआ, जब कभी हुआ, पाकिस्तान की हिमाकत के कारण, तो वाकई दुनिया के नक़्शे से पाकिस्तान का नामोनिशान मिट सकता है| अगर चीन की रक्षा प्रणाली ऐसी अभेद होती तो भारतीय मिसाइल सारे पाकिस्तान का भ्रमण करके उसके पार जाने का करतब न दिखा पाती उसे भारत पाक सीमा पर ही नष्ट कर दिया जाता| भारतीय ड्रोन को माना जा सकता है कि वे आकार में इतने छोटे थे कि छोटे कद वाले चीनियों द्वारा विकसित रक्षा प्रणाली के रडारों की पकड़ में न आ पाए| पर मिसाइल?
पाकिस्तान एक सिद्ध हो चुका अपराधी देश है और चीन एक तानाशाह देश, दोनों लोकतंत्र का झूठा दिखावा करते हैं उनकी सेनाओं का कोई वास्तविक डेटा कभी दुनिया के सामने प्रस्तुत नहीं किया जाता| जबकि भारत एक स्वस्थ लोकतांत्रिक देश है जहाँ सेना का ऑडिट होता है यहाँ कोई आंकड़ा नहीं छिपाया जा सकता, कई लेयर्स की नियंत्रण शैली में भारतीय सेना काम करती है|
भारत हारा इस वैश्विक दुष्प्रचार के मामले में| भारत का विदेश मंत्रालय, भारतीय लॉबी वैश्विक स्तर पर अपने पक्ष में रिपोर्ट्स न गढवा पायी| लेकिन झूठ के पाँव नहीं होते और अंततः दुनिया के सामने सच आ ही जाएगा|
चीन को मिलने वाले हथियार बेचने के सौदों में भारी गिरावट की सूचनाएं प्राप्त हुयी हैं जिनकी काट के लिए भारत विरोधी दुष्प्रचार चीन ने और बढ़ा दिया है लेकिन एक दिन बादल छंटेंगे|
अमेरिका को बड़ा कष्ट था कि भारत ने उससे Thaad न खरीद कर रूस से S -400 क्यों खरीदे और उससे लड़ाकू विमान न लेकर फ्रांस से राफेल के कई चरणों के सौदे क्यों किये? उस नाराजगी के शेड्स में राफेल और S-400 के नष्ट होने की बिना किसी बेहतर स्रोत के मानी गयी रपटों की सच्चाई आसानी से देखी जा सकती है| भारत ने पाकिस्तान के साथ किये हरेक युद्ध में अमेरिका की सैन्य तकनीकी श्रेष्ठता के दावों की धज्जियां उडाई हैं, क्योंकि अमेरिका ने पाकिस्तान को हर काल में उच्च क्षमता वाले हथियार बेचे या भीख में दिए लेकिन भारतीय सेना ने हर मौके पर उन्हें नष्ट किया या कब्जे में लिया| अमेरिका के अजेय माने जाने वाले पैटन टैंक्स आज भी भारतीय नगरों में कैंट के बाहर चौराहों पर खड़े अमेरिका–पाकिस्तान के सैन्य गठबंधन की खिल्ली उड़ाते हैं| मंदबुद्धि जानवर के हाथों में अत्याधुनिक हथियार भी तीर कमान से कम प्रभावी रह जाते हैं, यह पाकिस्तान ने छः सात बार सिद्ध किया है| पाकिस्तान केवल छिप कर आतंक फैला सकता है| यही राह अब चीन ने भी पकड़ ली है और सीधे न लड़कर दूसरों के कन्धों पर चलाने के लिये उन्हें बंदूकें देने का कमजोर कृत्य कर रहा है|
(3) ऑपरेशन सिन्दूर के अधिकारिक रूप से घोषित किये जाने से पहले ही पाकिस्तान में इस बार एक प्रवृत्ति देखने को मिली कि उनके बुद्धिजीवी वर्ग, अखबार नवीसों, मीडियाकर्मियों, पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजनेताओं, कलाकारों में गज़ब की एकता देखने को मिली और उन्होंने भारतीय मीडिया का उपयोग करके भारत को धमकाने का काम किया| पाकिस्तान की वेली जनता ने सोशल मीडिया के हर मंच का 24 घंटे उपयोग करके पाकिस्तान द्वारा चलाये झूठों का प्रचार किया| जबकि उससे उलट भारत में बुद्धिजीवी वर्ग, सोशल मीडिया के बहुत बड़े उपभोक्ता वर्ग ने भारत सरकार को घेरने के नशे में भारत हितों का जैम कर विरोध किया और पाकिस्तान को सामग्री दी कि वे भारतीयों के कहे/लिखे मेटीरियल को भारत के विरुद्ध इस्तेमाल करे| पाकिस्तानी एकजुट हो अपनी घटिया सेना द्वारा बैठाई कठपुतली सरकार के पीछे लामबंध खड़े थे जबकि भारत में इसका उलट सीन था|
भारत इस मामले में हारा लेकिन यहाँ भारत को भारत सरकार और भारतीय सेना ने नहीं, भारत सरकार विरोधी भारतीयों ने हराया, जो संकट की घड़ी में भी भारत के हितों के साथ खड़े नहीं हो सकते| उनके अहं इतने बड़े हैं कि उन्हें इस बात का भी अंदाज़ा नहीं रह पाता कि उनकी सारी दादागिरी इसलिए चल रही है क्योंकि भारत नामक एक उदार देश उनका घर है|
हजारों सोशल मीडिया खाते, जो भारतीय नामों से खोले गए, पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए जिन्होंने भारत हित विरोधी कार्य किये, इसे उससे लडवाया, कहीं आग में घी डाला, कहीं भारतीय सेना अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी के विरुद्ध युद्ध छेड़े|
इस युद्ध में भी भारत पिछड़ा|
शकुनी बिसात पर भारतीय प्रज्ञा महाभारत काल से ही मात खा रही है|
पर ऑपरेशन सिन्दूर के सन्दर्भ में यह सत्य तो रहेगा ही कि भारतीय सेना की हवा से हवा और धरती से हवा और धरती से हवा के माध्यम से धरती पर मार करने वाली रक्षा प्रणाली पाकिस्तान में घुस कर उसे मात दे आयी| और बिलबिलाया पाकिस्तान अब इस अल्प संघर्ष को जीतने के झूठे नेरेटिव गढ़ रहा है| और बिलबिला चीन भी रहा है क्योंकि भारत ने अपरोक्ष रूप से उसके मुंह पर तकनीकी और शौर्य से भरा तमाचा मारा है उसके सामने श्रेष्ठता दिखा कर|
अमेरिका को गुप्त चोटें लगी हैं, जिसके कारण वह असमंजस में फंसा रहेगा कि चीन को रोकने के लिए भारत को समर्थन दे या पाकिस्तान परस्ती की पुरानी राह पर ही चलता रहे|
भारत के अपने विशाल बाज़ार के कारण भारत अब अमेरिका और चीन जैसे निर्यात पर आधारित देशों के सामने पूरी मजबूती से खड़े रहने लायक है और भारतीय सेना के कारण तो दुनिया की किसी महाशक्ति के सामने डट कर खड़ा हो सकता है|
देखने का मंजर यही है कि अपने विशाल बाज़ार और भारतीय सेना की शक्तियों का कितना लाभ भारत की राजनीतिक सरकारें उठा पाती हैं|
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